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बीएसएनएल के कर्मचारी संगठनों ने आज बुलायी राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल

तर्कसंगत

Image Credits: ET Telecom

February 24, 2020

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सरकार की ओर से घोषित 69 हजार करोड़ रुपए के रिवाइवल पैकेज में हो रही देरी के विरोध में आज यानी सोमवार को सरकारी कंपनी बीएसएनएल के कर्मचारी एकदिवसीय भूख हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल में देशभर के बीएसएनएल कर्मचारी शामिल हो रहे हैं।

इस संदर्भ में ऑल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ बीएसएनएल (एयूएबी) ने अपने बयान में कहा था कि, ‘एयूएबी 24 फरवरी, 2020 को देशव्यापी अनशन का आयोजन कर रहा है। बीएसएनएल के पुनरोद्धार को लेकर केंद्रीय कैबिनेट के फैसले को जल्द लागू करने की मांग और कर्मचारियों के शिकायतों के निपटारे की मांग को लेकर इसका आयोजन किया जा रहा है।’

एयूएबी ने कहा है कि रिवाइवल पैकेज में 4जी स्पेक्ट्रम का आवंटन, 15,000 करोड़ रुपये की राशि जुटाने के लिए सॉवरेन गारंटी जारी करना, संपत्तियों की बिक्री और वीआरएस को लागू करना शामिल है। इनमें से केवल वीआरएस स्कीम को लागू किया गया है। इसके जरिए 78,569 बीएसएनएल कर्मचारियों को सेवानिवृत्त किया गया है। चार माह पूरे होने वाले हैं लेकिन तब भी बीएसएनएल को 4जी स्पेक्ट्रम आवंटित नहीं किया गया है।एयूएबी ने कहा है कि यह बेहद परेशान करने वाला है कि लगभग 4 महीने बीत जाने के बाद भी बीएसएनएल को 4 जी स्पेक्ट्रम आवंटित नहीं किया गया है।

इसके अलावा 8,500 करोड़ रुपये जुटाने के लिए सरकार ने बीएसएनएल को अभी तक गारंटी भी नहीं दी है। वहीं कंपनी की परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण का काम भी धीमी गति से चल रहा है. बीएसएनएल के कर्मचारी संगठनों के संघ का कहना है कि 4जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में देरी और कोष की अनुपलब्धता के चलते बीएसएनएल की 4जी सेवा 2020 के अंत से पहले शुरू होने की संभावना नहीं है।

इससे पहले पिछले साल नवंबर महीने में आर्थिक संकट से जूझ रही सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि कंपनी प्रबंधन उन्हें जबरन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए मजबूर किया जा रहा है। कर्मचारियों ने इसके खिलाफ देशव्यापी भूख हड़ताल की थी।

वित्त वर्ष 2017-18 में बीएसएनएल को 31,287 करोड़ का नुकसान हुआ था। कंपनी में फिलहाल 1.76 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। वीआरएस देने से कर्मचारियों की संख्या अगले पांच सालों में 75 हजार रह जाएगी।

बीएसएनएल में करीब 1.68 लाख कर्मचारी हैं जबकि एमटीएनएल के करीब 22,000 कर्मचारी हैं. दोनों कंपनियों पर कुल 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें से आधा कर्ज एमटीएनएल का है, जो सिर्फ दिल्ली और मुंबई में परिचालन करती है। दोनों कंपनियां बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए लंबे समय से स्पेक्ट्रम की मांग कर रही थी ताकि 4जी सेवा शुरू की जा सके।

 

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