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14 फरवरी को हुई थी शादी और 12 दिन बाद दंगों में चली गयी जान

तर्कसंगत

Image Credits: News18/You Tube

February 28, 2020

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दिल्ली की हिंसा ने अपने पीछे अगर कुछ छोड़ा है तो वो अपनों को खोने का गम, दहशत, दंगे की भयावह काली यादें और बर्बादी का एक शर्मनाक और खौफनाक मंज़र, जिसे देख कर हम और आप अपने इंसान होने पर भी शक करें तो इसमें कोई शक नहीं.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में मौत का आंकड़ा 40 के पार पहुंचता लग रहा है. शनिवार 23 फ़रवरी की रात से भड़की हिंसा भले ही अब थमती लग रही है लेकिन इलाके में तनाव अब भी है. बीते चार दिनों में कइयों के घर बर्बाद हो चुके हैं. मरने वालों में हिंदू भी हैं और मुसलमान भी. मरने वालों में ज्यादातर की उम्र तीस के आस-पास ही है. ज़्यादातर अपने घर के अकेले कमाने वाले थे, शादीशुदा थे और छोटे-छोटे बच्चों के पिता भी.

इन्हीं सब दर्दनाक  कहानियों में एक कहानी है अशफ़ाक़ हुसैन की जिसने 14 फरवरी को ही शादी की थी. इन 10-12 दिनों में इन दंगों में नौजवान की जान चली गई. परिवार वालों का दावा है कि अशफ़ाक़ को सीने में 5  गोलियां मारी गयी.

14 फ़रवरी को हुई थी शादी

अशफ़ाक़ की शादी बुलंदशहर की 21 साल की तस्लीन फातिमा के साथ हुई थी. शादी के दो दिन बाद ही अशफ़ाक़ वापस दिल्ली आ गया था. इधर दिल्ली में दंगे की वारदात हर बीतते घंटे के साथ बढ़ती जा रही थी. इसकी खबर बुलंदशहर पहुँचते ही तस्लीन और अशफ़ाक़ के पिता मुस्तफाबाद के लिए  रवाना हुए. जब तक की मंगलवार की सुबह पूरा परिवार एक जगह इकठ्ठा हुआ मुस्तफाबाद और उसके आस पास की इलाके में दंगे काफी भड़क चुके थे.

परिवार ने निकाह के बाद एक जगह इकट्ठे हो कर दोपहर का खाना साथ में खाया. उस वक़्त शायद ही किस ने सोचा होगा कि जिस जोड़े की शादी 12 दिन पहले हंसी ख़ुशी से हुई है, अगले कुछ घंटे में उनकी ज़िन्दगी उजड़ने वाली होगी. अशफ़ाक़ की बीवी तस्लीन रोते हुए कहती हैं कि “मुझे उनके साथ बैठ के सुकून के चार बात करने का भी मौका नहीं मिला.”  अशफ़ाक़ की माँ का रो रो कर बुरा हाल है. हाजरा कहती हैं, “उन लोगों ने मेरे बेटे के सीने में पाँच गोलियां मारीं. उसने किसी का क्या बिगाड़ा था जो उसे इस तरह मार डाला. उसके जाने के बाद अब हमारे लिए सिर्फ़ मुसीबतें ही हैं. हम अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा करते हैं और वो आकर ज़रा सी देर में हमारे बच्चों को मार डालते हैं. क्या उन्हें रहम नहीं आता, आप ही बताइए उसकी 11 दिन की बीवी क्या करेगी अब….कहां जाएगी वो.”

पड़ोस की बिजली की खराबी ठीक करने निकला था

मीडिया से बात करते हुए परिवार ने बताया कि दोपहर के खाने के बाद अशफ़ाक़ जो कि पेशे से इलेक्ट्रीशियन था उसे पड़ोस के घर से बिजली की खराबी सही करने के लिए बुलाया गया था. उसे घर से निकलते ही गोली लगी और उसे ज़ख़्मी हालत में अल हिन्द हॉस्पिटल में ले जाया गया. जहाँ उसकी मौत हो गई. मीडिया से बात करते हुए उसके पिता जो कि सब्ज़ी बेचने का काम करते हैं ने बताया ” मैं जब नमाज़ पढ़ के लौट रहा था तब कुछ लोगों ने मुझे बताया की उसे गोली लगी है और उसे अस्पताल ले जाया गया है.

मृत्यु के बाद उसकी लाश को जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, न्यूज़ 18 से बात करते हुए अशफाक के चाचा ने बताया कि “रविवार की रात से ही उग्र भीड़ पेट्रोल बम, पत्थर, हथियार के साथ मुस्तफाबाद इलाके में उत्पात मचा रही थी और मंगलवार तक हालात बढ़ से बद्द्तर होते चले गए हमने पुलिस, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस कई सेवाओं को समय समय पर मदद के लिए गुहार लगायी मगर कोई नहीं आया.”

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