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दंगाइयों के लिए सेना के जवान का धर्म उसके कर्म से ज़्यादा मायने रखता है

तर्कसंगत

February 28, 2020

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राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के कई इलाकों की सड़कों और गलियों में करीब चार दिन तक चला हिंसा का नंगा नाच अब थम जरूर गया है, लेकिन दंगाइयों के तांडव की राख चारों तरफ बिखरी है। जैसे-जैसे हालात सामान्य होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे दंगाइयों का शिकार हुए लोगों की दिल दहला देने वाली कई कहानियां सामने आती जा रही हैं, जो देश के कानून और संविधान पर भरोसी करने वालों को शर्मिंदा करती हैं।

ऐसी ही एक घटना सामने आई है, दिल्ली के खजूरी खास इलाके की, जहां भड़के दंगों में 25 फरवरी को दंगाइयों ने एक मोहल्ले में रहने वाले सभी मुसलमानों के घरों को जला दिया। इन्हीं घरों के बीच एक घर बीएसएफ के जवान मोहम्मद अनीस का भी था, जिसे दंगाइयों ने पूरी तरह राख कर दिया। साल 2013 में बीएसएफ में भर्ती हुए अनीस तीन साल तक जम्मू और कश्मीर में तैनात रह चुके हैं, लेकिन दंगाइयों के लिए अनीस के राष्ट्रवादी होने के लिए ये भी काफी नहीं था।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार 25 फरवरी की रात जब दंगाई उनके मोहल्ले खास खजूरी गली में दाखिल हुए तो उस समय घर में पिता मो. मुनीस (55), चाचा मो अहमद (59) और 18 वर्षीय चचेरी बहन नेहा के साथ खुद बीएसएफ जवान अनीस भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि जब दंगाई गली में तबाही मचाने लगे और आसपास के मुसलमानो के घर जलाने लगे, तो उन्हें लगा कि घर के बाहर मो. अनीस, बीएसएफ का लगा नेमप्लेट देखकर दंगाई जरूर उनका घर छोड़ देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

खबर के अनुसार सबसे पहले दंगाइयों ने घर के बाहर खड़ी कार को आग के हवाले कर दिया और फिर घर पर पत्थरबाजी करने लगे। इसी दौरान एक गैस सिलेंडर घर के अंदर फेंकते हुए दंगाई जोर-जोर से नारे लगाने लगे “इधर आ पाकिस्तानी, तुझे हम नागरिकता देते हैं”। ऐसे हालात में मौत से बचने का कोई मौका नहीं देख अनीस किसी तरह परिवार सहित घर से छिपकर निकल भागने में कामयाब रहे। इसी दौरान अनीस ने किसी तरह अनीस के हालात की खबर अर्द्धसैनिक बलों को चल गई, जिन्होंने अनीस से संपर्क कर उन्हें और उनके परिवार को वहां से सुरक्षित निकाला।

घटना के तीन दिन बाद अनीस के घर का जला हुआ अवशेष आज भी वहीं पड़ा हुआ है। अनीस के घर के पास खजूरी खास की दो गलियों में मुसलमानों के करीब 35 घरों को जलाकर राख कर दिया गया है। इन गलियों में सिर्फ एक मुसलमान का ही घर बचा है। लेकिन इस कयामत में सबसे ज्यादा नुकसान बीएसएफ जवान मोहम्मद अनीस के परिवार का हुआ है, क्योंकि अगले तीन महीने में घर में दो-दो शादियां होने वाली थीं और जेवरात सहित उसके सारे सामान और नकद पैसे घर में रखे थे, जो सब के सब खाक हो गए। खबर के अनुसार बहन नेहा की शादी अप्रैल में होनी है, जबकि खुद अनीस की शादी मई महीने में तय है।

घरवालों ने बताया कि इस हमले में उनकी सारी जमापूंजी, शादी के लिए बनवाए सोने के जेवरात और चांदी जेवरात सब तबाह हो गए। परिवार वालों ने कहा कि वे किस्तों पर हर महीने पैसे बचाकर जेवर खरदते थे, वे सभी जेवर जलकर खाक हो गए और इसके अलावा शादी के लिए रखे तीन लाख रुपये भी खाक हो गए।

बता दें कि दिल्ली का खजूरी खास इलाका हिंदू बहुल इलाका है, लेकिन अनीस और उनके परिवार के अनुसार उनके घर पर हमले में उनका कोई भी पड़ोसी शामिल नहीं था। सभी हमलावर बाहरी थे। उन्होंने बताया कि उनके हिंदू पड़ोसी लगातार दंगाइयों से वहां से चले जाने के लिए कह रहे थे। बाद में इन्हीं हिंदू पड़ोसियों ने आग बुझाने में मदद भी की।

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