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गुजरात में प्रतिदिन 20 लोग आत्महत्या कर रहे हैं, गुजरात विधानसभा में हंगामा

तर्कसंगत

March 4, 2020

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भारत को विकसित देश बनाने का सपना दिखाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। दरअसल, सोमवार को गुजरात विधानसभा में सरकार की ओर से राज्य के आपराधिक आंकड़े प्रस्तुत किए गए थे। इन आंकड़ों में प्रदेश की भयावह स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में प्रतिदिन 20 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर गुजरात में लोग आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?

14,702 लोगों ने की आत्महत्या

सरकार की ओर से विधानसभा में प्रस्तुत किए गए आपराधिक आंकड़ों के अनुसार गुजरात में जनवरी 2018 से 31 दिसंबर, 2019 तक कुल 88,081 लोगों की अप्राकृतिक तरीके से मौत हुई। इनमें से 14,702 लोगों ने आत्महत्या की था। इस हिसाब से प्रदेश में प्रतिदिन करीब 20 लोगों ने आत्महत्या की। इस रिपोर्ट के आते ही विपक्ष ने विधानसभा में हंगामा कर दिया और सरकार पर लोगों के हितों को ध्यान में नहीं रखने का आरोप लगाया।

अहमदाबाद में 34 % बढ़े बलात्कार के मामले

रिपोर्ट में बताया गया है कि अहमदाबाद में बलात्कार के मामलों में साल 2018 की तुलना में 2019 में 34.57% की वृद्धि दर्ज की गई। 2018 में जहां बलात्कार की 188 घटनाएं हुई थीं, वहीं 2019 में ये आंकड़ा 253 पर पहुंच गया।

गुजरात विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस नेता परेश धनानी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह आत्महत्या के मामलों में ‘नियंत्रण’ दिखाने के लिए उन्हें ‘अप्राकृतिक मौत’ दिखा रही है। परेश धनानी ने सरकार से राज्य में आत्महत्या करने वाले किसानों का विवरण मांगा था।

दूसरे अपराधों की स्थिति

गुजरात सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में आत्महत्या के अलावा ये भी बताया गया कि राज्य में इस अवधि में लूट की 2,491, हत्या की 2,034, डकैती की 559, चोरी की 25,723, बलात्कार की 2,720, अपहरण की 5,879, सेंध लगाकर चोरी की 7,611, रोयोटिंग की 3,305 और 28,298 लोगों की आकस्मिक मौत हुई है। इस हिसाब से राज्य में प्रतिदिन चोरी की 10, बलात्कार की चार, हिंसक दंगे की चार और हत्या की तीन वारदातें होती हैं।

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि आत्महत्याओं के रिकॉर्ड में हमेशा व्यक्ति के पेशे का उल्लेख किया जाता है, लेकिन किसी के पारिवारिक कारणों से आत्महत्या करने पर उसे किसान की आत्महत्या नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा, “किसानों के पास खेती के अलावा भी आत्महत्या के लिए अन्य कई कारण हो सकते हैं। ऐसे में विपक्ष को इन मुद्दों पर राजनीति करने से बचना चाहिए।”

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