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आरएसएस के स्कूलों में पिछले दो सालों में बढ़ी मुस्लिम छात्रों की संख्या

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Image Credits: TFIpost

March 5, 2020

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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर देश में दो समुदायों को बांटने की राजनीति के बावजूद जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कई नेता कट्टरवादी संगठन करार देते हैं, उसके द्वारा संचालित स्कूलों में मुस्लिम विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आरएसएस के अनुषांगिक संगठन विद्या भारती ने आंकड़े जारी कर दावा किया है कि पिछले दो सालों में मध्य प्रदेश में संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों में मुस्लिम विद्यार्थियों की संख्या करीब सात फीसद बढ़ी है।

इन स्कूलों में ये मुस्लिम छात्र न सिर्फ पढ़ाई कर रहे हैं, बल्कि रोज वंदे मातरम भी गाते हैं और सभी बच्चों के साथ भोजन से पहले प्रार्थना भी करते हैं। विद्या भारती के आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में मप्र के सरस्वती शिशु मंदिर में मुस्लिम छात्रों की संख्या 9168 थी, जो 2019-20 में बढ़कर 9804 हो गई है। हालांकि 2018-19 में छात्रों की संख्या मामूली गिरावट के साथ 9152 हो गई थी। इन स्कूलों में पढ़ रहे कई मुस्लिम छात्रों ने खेलकूद प्रतियोगिता व अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में पुरस्कार भी जीता है। ग्वालियर जिले के भितरवार में रिहान खान ने पिछले दिनों वंदे मातरम गायम प्रतियोगिता में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया था। विद्या भारती के पदाधिकारियों के मुताबिक सरस्वती शिशु मंदिर में ईसाई समुदाय के छात्र और शिक्षक भी हैं, लेकिन उनकी संख्या कम है।

आरएसएस ने कार्य विभाजन के लिए मप्र को तीन प्रांत में बांटा है। इसमें मालवा, मध्य भारत प्रांत और महाकौशल शामिल हैं। दो सालों में मालवा और मध्यभारत प्रांत में मुस्लिम छात्रों की संख्या घटी है, लेकिन महाकौशल प्रांत में इनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।

विद्या भारती के मध्यभारत प्रांत संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने मीडिया से कहा कि सरस्वती शिशु मंदिरों में किसी धर्म विशेष की शिक्षा नहीं दी जाती। यहां विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए काम किया जाता है, इसलिए अन्य धर्मो के लोग भी अपने बच्चों को यहां पढ़ाते हैं।

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