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नागौर कांडः राजस्थान में दलित उत्पीड़न की ना तो ये पहली और ना ही आखिरी घटना है

Madhav Sharma

March 13, 2020

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नागौर से करीब 60 किमी चलने के बाद एक तिराहे पर पुलिस की जीप खड़ी है. उन्होंने पूछे बिना ही हाथ से इशारा किया और हमारी गाड़ी दायीं तरफ मुड़ गई. टूटी-फूटी सड़क पर करीब दो किमी चलने के बाद कुछ पुलिस वाले और दिखते हैं. उनमें से एक ने डंडा सहित अपना हाथ कच्चे रास्ते की तरफ बढ़ा दिया. करीब डेढ़ किमी कच्चे रास्ते पर चलने के बाद सैंकड़ों गाड़ियों और लोगों का हुजूम दिखाई देता है. रेत के ऊंचे-नीचे धोरों के बीच बसे भोजास ग्राम पंचायत के सोननगर गांव में पीड़ितों के 14 बीघा जीरे की फसल के एक हिस्से में कम से कम तीन सौ चौपहिया और इससे कहीं ज्यादा दोपहिया वाहन खड़े हैं. ये वही गांव है जहां के दो दलित चचेरे भाईयों को बेरहमी से पीटा गया और उनमें से एक के गुप्तांगों में पेट्रोल से भीगा हुआ पेचकश डाला गया. घर से करीब सौ मीटर पहले ही लोगों के बैठने के लिए टेंट लगाया हुआ है और उससे थोड़ा आगे चलकर चाय के लिए एक गैस चूल्हा और सिलेंडर रखा है जो बीते दो दिन से लगातार जल रहा है. खेती और मजदूरी से गुजर करने वाले इस परिवार के लिए चाय का खर्चा भी पीड़ितों के दूर के चाचा भूराराम दे रहे हैं.

 



 

दो झोपड़ी और एक साल पहले बनाए दो पक्के कमरों के इस घर के एक कमरे में पीड़ित विसाराम (24) और पन्नाराम (18) बैठे हैं. कच्ची झोपड़ियों की तरफ परिवार की महिलाएं रुक-रुक कर रो रही हैं. इन रोने वाली आवाजों में एक आवाज विसाराम की सात महीने की बच्ची की भी है. क्योंकि उसे दो दिन से मां का दूध नसीब नहीं हुआ है. मां सोहनी (विसाराम की पत्नी) पति के साथ हुए ज़ुल्म को देखकर बदहवास है और कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है. 

 



 

थोड़ी देर बाद हमें पीड़ितों से मिलवाया जाता है. बिना पुते कमरे की दीवार पर कई तस्वीरें टंगी हैं और नीचे पत्रकारों, वकीलों की भीड़ पीड़ितों को घेर कर खड़ी है. बकौल विसाराम, ‘16 फरवरी दोपहर करीब 2.30 बजे को मैं और पन्नाराम आठ महीने पहले खरीदी अपनी हीरो डीलक्स बाइक सर्विस कराने करनूं गांव गए थे. मेरी बाइक की दो किश्तें बाकी हैं जो एजेंसी वालों ने मांगी. मैंने फसल कटने के बाद ब्याज सहित सारी रकम चुकाने की बात कही. इसके बाद उन्होंने मुझे जातिसूचक शब्दों के साथ गालियां दीं और 50 हजार रुपए चोरी का आरोप लगाया.’

विसाराम आगे बताते हैं, ‘कैश काउंटर के पास पीटने के बाद हनुमान सिंह मुझे सर्विस सेंटर के पीछे ले कर गया. भींवसिंह मेरे दोनों पैरों पर खड़ा हो गया और मुझे उल्टा लिटा दिया. आईदान सिंह और सवाई सिंह ने मेरे हाथ पकड़े और लिछमण सिंह मेरी पीठ पर खड़ा रहा.

 



 

इसके बाद हनुमान सिंह ने पेचकश के ऊपर कपड़ा बांधा और उसे पेट्रोल से भिगा कर मेरे गुप्तांगों में डाल दिया.’

दूसरे पीड़ित पन्नाराम ने बताया कि ‘विसाराम के साथ ज्यादा मारपीट की गई. मुझे भी पीटा गया और किसी को नहीं बताने की बात कहकर गांव के ही अर्जुनसिंह और जेठूसिंह को फोन कर हमें ले जाने के लिए कह दिया. इसके बाद विसाराम के बड़े भाई दुर्गाराम, अर्जुनराम और जेठूसिंह हमें लेने आए.’

पुलिस को तुरंत सूचना नहीं देने के सवाल पर विसाराम ने कहा, ‘मैं बेहद डर गया था. अगर 19 फरवरी को वीडियो वायरल नहीं होता तो मैं कभी पुलिस में शिकायत नहीं करता.’ 

इसी बीच पीड़ितों से मिलने राजस्थान सरकार में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री पहुंचे. बंद कमरे में करीब दो घंटे तक दोनों ने पीड़ितों से बातचीत की. 

पीड़ित के पिता जगदीश ने कहा कि, ‘आरोपियों ने मेरे बच्चों पर चोरी का आरोप लगाकर हमसे 5100 रुपए जुर्माना भी वसूला है जो हमने पड़ोसी से उधार लेकर चुकाया है. इसके बाद दीपसिंह और भोमसिंह नाम के दो लोगों ने आरोपियों से राजीनामा करने और इसके बदले में 40 हजार रुपए देने की बात भी कही, लेकिन हमें न्याय चाहिए, पैसा नहीं.’

 



 

उधर, आरोपियों की तरफ से भी विसाराम और पन्नाराम पर 50 हजार रुपए चुराने के आरोप की एफआईआर दर्ज कराई गई है. केस में मुख्य आरोपी हनुमान की तरफ से दर्ज शिकायत में दोनों चचेरे भाईयों पर रंगे हाथ 50 हजार रुपए चुराते हुए पकड़ने की बात कही गई है. 

नागौर पुलिस अधीक्षक विकास पाठक ने तर्कसंगत से कहा कि ‘पुलिस ने सर्विस सेंटर की सीसीटीवी फुटेज खंगाली है. हालांकि अभी तक यह रकम बरामद नहीं हो सकी है.’ एफआईआर दर्ज करने में देरी और थानेदार पर जातिवाद के आरोपों पर एसपी पाठक ने कहा, ‘18 फरवरी को हमारी आईटी टीम ने सबसे पहले वीडियो को देखा और हमें इत्तला दी. 19 फरवरी को शिकायत दर्ज होने के कुछ ही देर में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. चूंकि एसएचओ और आरोपी एक ही जाति से ताल्लुक रखते हैं तो कोई भी आरोप लगा रहा है, लेकिन पुलिस ने मामले में कोई कोताही नहीं की है.’ 

 

मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित को गंभीर चोटें

विसाराम की मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया है कि उसे बहुत पीटा गया है. विसाराम की छाती पर 12*3 सेंटीमीटर, कूल्हों पर 11*2 और दाहिनी जांघ पर पीछे की तरफ 8*3 सेंटीमीटर के घाव पाए गए हैं. मेडिकल करने वाले डॉ. महावीर गोयल ने कहा कि पीड़ित के शरीर पर पिटाई के कारण कई नीले निशान हैं. मेडिकल नागौर के पं. जेएलएन राजकीय अस्पताल में हुआ. रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ कि चोटें तीन से चार दिन पुरानी हैं. 

 

अब तक केस में क्या हुआ?

पुलिस ने 19 फरवरी को दोपहर 2.15 बजे एफआईआर दर्ज की. इसके तुरंत बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. अब तक कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. एक आरोपी अभी फरार है. कोर्ट ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है. पीड़ितों को 21 फरवरी को ही 50-50 हजार रुपए मुआवजा दिया जा चुका है. राष्ट्रीय एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष एल मुरूगन ने भी 23 फरवरी को सोननगर पहुंच पीड़ितों से मुलाकात की. पीड़ितों की मांग पर सरकार ने दोनों को कॉन्ट्रेक्ट पर  नौकरी दे दी है. इसके अलावा पीड़ितों की मांग पर पांचौड़ी थानाधिकारी राजपाल सिंह को हटा दिया है. गिरफ्तार नौ आरोपियों में से सात राजपूत समाज से आते हैं.

 



दलित उत्पीड़न के ये आंकड़े राजस्थान की हकीकत बयां कर रहे हैं

प्रदेश में दलित उत्पीड़न के आंकड़े डराने वाले हैं. राजस्थान दलित उत्पीड़न के मामले में देश में पांचवें स्थान पर है. देश में होने वाले कुल अपराधों के 10.8% अपराध राजस्थान में होते हैं.  राजस्थान पुलिस के मुताबिक 2017 में अनुसूचित जाति पर अत्याचार के 4238 केस दर्ज हुए. 2018 में 4607 और 2019 में 6794 केस दलित उत्पीड़न के प्रदेशभर के पुलिस थानों में दर्ज किए गए हैं. इस तरह 2017 से 2019 के बीच दलितों पर अत्याचार के मामले 60.31 प्रतिशत बढ़े हैं. इसी तरह इस साल जनवरी तक 464 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें हत्या, गंभीर चोट, बलात्कार और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले शामिल हैं. 

इसके अलावा अनूसूचित जनजाति उत्पीड़न के आंकड़ों को देखें तो वे कम डरावने नहीं हैं. जनवरी 2020 में अनुसूचित जनजाति पर उत्पीड़न के 113 मामले दर्ज हुए हैं. 2017 में 984, 2018 में 1095 और 2019 में 1797 केस दर्ज हुए. 2017 से 2019 के बीच अनुसूचित जाति वर्ग पर अत्याचार के मामले 82.62 प्रतिशत बढ़े हैं. 

वहीं, राजस्थान पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 2019 में नागौर जिला दलित उत्पीड़न के मामले में राजस्थान में पांचवें स्थान पर है. गंगानगर, भरतपुर (408 केस), हनुमानगढ़ (311), बीकानेर (292) के बाद नागौर में 281 दलित उत्पीड़न के मामले दर्ज किए गए हैं. 

राजस्थान में दलितों पर बढ़ रहे उत्पीड़न की घटनाओं पर दलित अधिकारों के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और वकील ताराचंद वर्मा कहते हैं, ‘दलितों के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने के लिए पंचायती राज एक्ट-1995 के तहत सामाजिक न्याय समितियां बनाए जाने का प्रावधान है, प्रदेश में अभी तक इन समितियों का गठन नहीं किया गया है. 

इसी तरह ब्लॉक और जिला स्तर पर भी ऐसी कमेटियां बनाने के अलग नियम हैं, लेकिन वे भी फाइलों से बाहर नहीं आ पाए.

 

परिवार की महिलाओं का रो-रो कर बुरा हाल, राजनीति भी कम नहीं

विसाराम 10 भाई-बहनों में दूसरे नंबर के हैं. सबसे छोटे भाई की उम्र 3 साल है और सबसे बड़े भाई दुर्गाराम 25 साल के हैं. पिता जगदीश (45) ने अपनी 14 बीघा जमीन पर जीरा बोया हुआ है. पीड़ितों से मिलने आ रहे लोगों की गाड़ियों से जीरे की करीब एक चौथाई फसल खराब हो चुकी है. विसाराम की मां गीता (40) कच्चे आंगन में बार-बार बेहोश हो रही हैं. 19 फरवरी से घटना के बारे में सुनने के बाद उनकी तबीयत खराब है. सैंकड़ों की संख्या में भीड़ को देखकर गीता घबरा गईं और बेहोश हो गईं. तुरंत डॉक्टर को बुलाया गया. जांच करने पर पता चला कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है. इसी तरह पन्नाराम के पिता कालूराम भी बीमार हो गए. उन्हें एंबुलेंस से पांचौड़ी अस्पताल भेजा गया. पीड़ित के घर पर गांव की अन्य महिलाएं और रिश्तेदारों की भीड़ भी जमा है. रुक-रुक कर महिलाओं के रोने की चीखें पूरे गांव में गूंज रही हैं.

 



 

रोने और शांत होने की चीखों के बीच तमाम जगहों से आए दलित कार्यकर्ता गुस्से भरे लहज़े में फेसबुक लाइव करते दिखाई दे रहे हैं. आरोपियों को गालियों के साथ सबक सिखाने की धमकियां भी दे रहे हैं. ऐसे ही एक नेता दिल्ली के पूर्व विधायक संदीप वाल्मिकी थे. पन्नाराम के बीमार पिता की चारपाई के पास वाल्मिकी बोले, ‘शुक्र है कि वे लोग (आरोपी) सामने नहीं हैं, वरना हम उन ***** के साथ हम कुछ और ही करते.’ 

 

मंत्री न्याय दिलाने के वादे करते रहे, डांगावास का सवाल पूछा तो भड़क गए

करीब दो घंटे की मुलाकात के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल बाहर निकले. मेघवाल ने कहा, ‘पुलिस को जब तक सूचना नहीं दी जाती तब तक कार्रवाई नहीं की हो सकती. जैसे ही मामला सामने आया पुलिस ने तुरंत आरोपियों को गिरफ्तार किया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमारी सरकार दलितों के हितों की रक्षा करेगी’. इसके बाद तर्कसंगत के पत्रकार की ओर से 2015 में नागौर के डागांवास में दलितों पर हुए हमले के पीड़ितों के पुनर्वास का सवाल पूछा तो मंत्री उखड़ते हुए बोले, ‘वो दूसरा काम है, अभी यहीं की बात करो.’ इसके बाद मेघवाल ने प्रेस वार्ता खत्म कर दी. 

 



 

बता दें कि साल 2015 में नागौर के ही डांगावास में जाट समुदाय के कई हथियारबंद लोगों ने जमीन विवाद के चलते दलित परिवारों पर हमला किया था. दलित-सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी के मुताबिक ‘डांगावास में दलितों को ट्रेक्टरों से कुचला गया, जलती लकड़ियों से 

उनकी आंखें फोड़ दी गईं, पुरुषों के लिंग नोच लिए गए जबकि महिलाओं के साथ ज्यादती कर उनके गुप्तांगों में लकड़ियां घुसेड़ दी गईं.’ 

डांगावास में पांच दलितों समेत छह लोगों की हत्या कर दी गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे.

 

देरी से जागी गहलोत सरकार

बेहद गंभीर मामला होने के बाद भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना सामने आने के 24 घंटे बाद तक चुप्पी साधे रखी. 20 फरवरी को राहुल गांधी के ट्वीट के बाद गहलोत ने संवेदना जाहिर की और प्रशासनिक स्तर पर मुस्तैदी दिखानी शुरू की. गहलोत सरकार की संवेदनहीनता का ये अकेला उदाहरण नहीं है. इससे पहले थानागाजी प्रकरण () में भी सरकार पर लोकसभा चुनावों के कारण समय पर कार्रवाई नही करने के आरोप  लगे थे. वहीं, सूबे के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने नागौर कांड में तुरंत एक कमेटी का गठन किया. जिसमें राजस्व मंत्री हरीश चौधरी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भंवरलाल मेघवाल, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा शामिल थीं. कमेटी की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि शुरूआत में पुलिस प्रशासन ने मामले को लेकर कोताही बरती और समय पर एक्शन नहीं लिया. ये रिपोर्ट उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट सोनिया गांधी को सौंपेंगे. 

हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पायलट ने इस मौके को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चल रही खींचतान के बीच एक मौके के तौर पर भुनाया है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने सरकार पर मामले में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं.

पीड़ितों से मिलने वालों में भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और प्रदेश के पूर्व मंत्री व विधायक मदन दिलावर भी शामिल थे. इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के खींवसर से स्थानीय विधायक नारायण बेनीवाल भी सोननगर पहुंचे थे.

 

आरोपियों के गांव का हाल



 

तांतवास से करीब 20 किमी दूर रेतीले धोरों में बसी ढाणियों में इस केस के मुख्य आरोपी हनुमान सिंह का गांव मोतीनाथ पुरा है. इस गांव में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है. हनुमानसिंह के घर पर कुछ लड़कियां और सिर्फ तीन महिलाएं हैं. ये महिलाएं एक साथ पीड़ितों के साथ हुए कृत्य को गलत बताती हैं, लेकिन साथ में यह भी कहती हैं कि चोरी करना भी तो ठीक बात नहीं है. कानून सभी के लिए बराबर है इसीलिए सबको सजा मिलनी चाहिए. साथ ही हनुमान सिंह की पत्नी चंद्र कंवर कहती हैं, एफआईआर में उन लोगों के नाम भी लिखवा दिए हैं जो उस दिन गांव में ही मौजूद नहीं थे. 

 



 

सरकार के पीड़ितों को राहत के तमाम दावों और दलित समाज की न्याय दिलाने की मांगों के बीच एक खबर और पता चलती है कि पश्चिमी जिले बाड़मेर में एक दलित लड़के के साथ मारपीट हुई है. नागौर की तरह इस युवक के भी प्राइवेट पार्ट में सरिया घुसाया गया है. जयपुर लौटते हुए एक जोधपुर में ‘दलित युवक के साथ मारपीट और बाल काटे’ की हेडलाइन के साथ एक और खबर का नोटिफिकेशन मोबाइल पर आया हुआ था. इसीलिए नागौर में हुआ कांड राजस्थान में दलित उत्पीड़न की ना तो ये पहली और ना ही आखिरी घटना है.

 

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