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मुंबई के इस्कॉन मंदिर में हाथ साफ करने के लिए हो रहा गोमूत्र का इस्तेमाल

तर्कसंगत

Image Credits: Twitter/RajuPNair

March 18, 2020

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पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस (Covid-19) का सामना कर रही है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभिन्न देशों की सरकार लोगों को जागरुक कर रही हैं, कि खुद को संक्रमित होने से कैसे बचाया जाए। जिसमें लोगों से कहा जा रहा है कि जितना हो सके, अपने हाथों को उतना साफ करें। लोगों को हाथ साफ करने के लिए ऐसे सैनटाइजर का इस्तेमाल करने को कहा गया है जो 60 फीसदी से अधिक एल्कोहल युक्त हो। इस दौरान भारत में गोमूत्र को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

इस्कॉन मंदिर में कोरोनावायरस के खतरे से बचाने के लिए श्रद्धालुओं के लिए गेट पर गोमूत्र रखा गया है। श्रद्धालुओं ने इस पर विरोध दर्ज कराया है और पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है। वहीं, मंदिर की प्रवक्ता परीजाता देवी का कहना था कि इसका प्रयोग करने का वैज्ञानिक आधार है। हालांकि, बाद में सफाई दी है कि सिर्फ 15 मार्च (रविवार) को गोमूत्र का प्रयोग किया गया, क्योंकि अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर की कमी हो गई थी। यह संक्रमण रोधी और एंटी बैक्टिरियल है। हमने थोड़े समय के लिए इसका प्रयोग किया था।

मंदिर प्रशासन की तरफ से आरोपों का खंडन किया गया है। कहा- यह नियमित रूप से प्रयोग नहीं किया जाता है। इससे पहले मंदिर की प्रवक्ता का कहना था कि गोमूत्र को एंटी फंगल, एंटी बैक्टिरियल और एंटी कैंसर एजेंट जैसे औषधीय गुणों के कारण अमेरिका से पेटेंट हासिल है। फिलहाल, इस्कॉन मंदिर की तरफ से बिना अनुमति के गोमूत्र रखे जाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है।

 

तलाशी के बाद गौमूत्र का छिड़काव

इस मामले को सबसे पहले एक ट्विटर यूजर @RajuPNair ने लोगों के संज्ञान में लाया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- मैं और मेरा दोस्त जब अंधेरी के इस्कॉन मंदिर परिसर में स्थित गोविंद रेस्टोरेंट गए, तब यहां हमें सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। तलाशी के बाद उन्होंने मुझे अपने हाथ दिखाने के लिए कहा और कुछ स्प्रे किया जिससे अजीब गंध आ रही थी। जब मैंने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि यह गोमूत्र है। इसके बाद राजू नायर ने मुंबई पुलिस कमिश्नर के पास एक लिखित शिकायत भी दर्ज करवाई है।

 

 

 इस घटना के आलोचना के बाद, अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने जबरदस्ती किसी को हाथ की सफाई के रूप में गोमूत्र का उपयोग करने के लिए नहीं कहा।

इस्कॉन मंदिर के पारिजात देवी दासी ने कहा, “लोग इसका इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र थे। लोग वाशरूम जाते थे और हाथ साफ करने के लिए साबुन का इस्तेमाल करते थे। यह व्यक्तिगत स्वच्छता और एहतियाती उपाय है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या गौमूत्र को हैंड सैनिटाइजर के रूप में इस्तेमाल करना बुद्धिमान था, पारिजात ने कहा, “यह गौमूत्र नहीं है। यह डिस्टिल्ड गौमूत्र है। इसके बहुत सारे फायदे हैं और यह एंटी-बैक्टीरियल है। हम नियमित सैनिटाइजर मिलते ही उन्हें तुरंत इस्तेमाल कर लेते हैं।”

जबकि COVID-19 के प्रकोप के बीच मंदिर में बड़े समारोहों को रद्द कर दिया गया था, मंदिर ने एक नोटिस जारी किया जिसमें कहा गया था कि मंगलवार से अगले नोटिस तक मंदिर दर्शनार्थियों के लिए बंद रहेगा।

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