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निर्भया को मिला इन्साफ मगर उसके बाद से लगातार बढ़े रेप के मामले

तर्कसंगत

March 20, 2020

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जिस साल निर्भया के साथ गैंगरेप हुआ, उस साल देश में रेप के 24,923 मामले सामने आए थे। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डाटा से यह जानकारी मिलती है। इसका मतलब है कि उस साल देश में हर दिन रेप के लगभग 68.28 केस दर्ज होते थे। अब निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या रेप के बढ़ते मामलों पर लगाम लग पाएगी?

2018 में बढ़े रोजाना औसतन 24 मामले

सरकारों द्वारा महिला सुरक्षा के लिए किए तमाम दावों के बीच हालात बदले नहीं। 2012 में रोजाना 68 से ज्यादा महिलाओं के साथ हैवानियत होती थी तो 2018 में आंकड़ा 91 से ज्यादा हो गया। 2018 में देशभर में रेप के 33,356 मामले सामने आए।

2012 के बाद से लगातार बढ़ रहे मामले

निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड के बाद बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने वर्मा कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने कानून को कड़ा करने के कई सुझाव दिए। इसके बावजूद देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी नहीं आई। 2012 में जहां रेप के 24,923 मामले आए तो अगले साल यह संख्या बढ़कर 33,707 पहुंच गई। यानी हर रोज 92 से ज्यादा महिलाओं के साथ रेप। 2014 में यह आंकड़ा बढ़कर 36,735 हो गया।

2017 में कम हुए मामले

2014 में रोजाना औसतन 100 से ज्यादा महिलाओं को दरिंदगी का सामना करना पड़ रहा था। इससे अगले साल संख्या में थोड़ी कमी जरूर आई, लेकिन हालात में बहुत सुधार नहीं हुआ। 2015 में रेप के कुल 34,651 (रोजाना लगभग 95 रेप) मामले आए। 2017 में 2012 के बाद सबसे कम रेप के मामले सामने आए। इस साल देशभर कुल 32,559 मामले सामने आये यानी हर रोज देश में 89 से ज्यादा रेप हुए।

अपराधियों के मन में नही पैदा हो रहा खौफ

कुछ जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में न्याय मिलने की धीमी दर और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण हैवानियत करने वाले लोगों में डर पैदा नहीं हो रहा है। 2017 में सालों से चले आ रहे 5,822 मामलों में अपराधियों को सजा मिल सकी। 2018 में रेप के 4,708 मामलों में दोष सिद्ध हुआ, जिसमें से उस साल के केवल 666 मामले थे, जबकि उस साल रेप के 33,356 मामले सामने आए थे।

निर्भया के दोषियों को सात साल बाद फांसी

निर्भया के मामले में भी ट्रायल कोर्ट ने एक साल के भीतर अपराधियों पर दोष सिद्ध कर दिया था, लेकिन उन्हें फांसी होने में सात साल से ज्यादा का समय लग गया। शुक्रवार सुबह निर्भया के परिजनों समेत पूरे देश का इंतजार खत्म हुआ और उसके चारों दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया। फांसी से कुछ ही घंटों पहले गुरुवार देर रात दोषियों ने फांसी पर रोक लगाने के लिए पहले दिल्ली हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दोनों कोर्ट से ही उनकी याचिका रद्द हो गई। दोषियों को फांसी होने के बाद निर्भया की मां ने कहा कि यह सालों के संघर्ष का नतीजा है।

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