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अहमदाबाद सिविल अस्पताल में धर्म के आधार पर बंटे वार्ड डॉक्टर बोले- सरकार का फैसला, सरकार ने कहा हमें खभर नहीं

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Image Credits: Middleeasteye

April 16, 2020

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धर्म देखकर तो लोगों को संक्रमित नहीं कर रहा है, लेकिन गुजरात के अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में धर्म के आधार पर कोरोना वार्ड ज़रूर बना दिये गये हैं. यानी हिंदू के लिए अलग वार्ड और मुसलिम के लिए अलग. यह कैसा आदेश है?

अहमदाबाद सिविल अस्पताल पर आरोप लगा है कि वो अपने यहाँ धर्म के आधार पर मरीज़ों को अलग-अलग कर रहा है.

वहाँ मरीज़ों का कहना है कि 12 अप्रैल के पहले तक सारे कोरोना संक्रमितों को एक ही वॉर्ड में रखा जा रहा था. मगर अब हिंदू और मुसलमान रोगियों को अलग-अलग वॉर्डों में भेज दिया गया है. लेकिन सरकार ने इस तरह की खबरों को निराधार बताया है. सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि गुजरात के अस्पताल में धर्म के आधार पर कोई भेद-भाव नहीं किया जा रहा है.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 12 अप्रैल की रात को सभी मुस्लिम रोगियों से ये कहते हुए दूसरे वॉर्ड में चले जाने के लिए कहा गया कि वहाँ बेहतर सुविधाएँ हैं जबकि हिंदू रोगियों से उसी वॉर्ड में रहने के लिए कहा गया. C4 वॉर्ड से फ़ोन पर बात करते हुए रोगी ने बताया कि उसके और कुछ अन्य रोगियों के वजह पूछने के बाद भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया.

मुस्लिम कार्यकर्ता दानिश क़ुरैशी ने अस्पताल में भर्ती एक दोस्त से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि अस्पताल के कुछ हिंदू मरीज़ों ने अस्पताल के कर्मचारियों से शिकायत की थी कि वो मुसलमानों के साथ सहज महसूस नहीं कर रहे.

एक और मुस्लिम नेता इकराम मिर्ज़ा ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ‘लोग हमारे साथ नहीं रहना चाहते और सरकार ऐसे असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक तरीक़े से लोगों को अलग कर उनका साथ दे रही है’.

 

मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने दिए अलग अलग बयान

बीबीसी से बात करते हुए मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर जीएच राठौड़ ने धर्म के आधार पर मरीज़ों को अलग किए जाने की बात से इनकार करते हुए कहा कि इलाज कर रहे डॉक्टरों ने मरीज़ों की स्थिति देखने के बाद ऐसा करने का सुझाव दिया था.

इसके पहले डॉक्टर राठौड़ ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “आमतौर पर महिला और पुरुष मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड होते हैं, लेकिन यहां हमने हिंदू और मुस्लिम मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड बनाए हैं.”

जब उनसे धर्म के आधार पर वार्ड के विभाजन की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि यह सरकार का निर्णय है और इस बारे में सरकार ही कुछ बता सकती है. बता दें, अस्पताल का एक ब्लॉक अहमदाबाद-गांधीनगर क्षेत्र के लिए COVID-19 अस्पताल में बदला गया है.

गुजरात के अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमितों और संदिग्धों के लिए 1,200 बेड का इंतजाम किया गया है. ये बेड दो वार्ड में लगे हैं और हैरानी की बात ये है कि इन वार्डों का विभाजन धर्म के आधार पर किया गया है.

अस्पताल में भर्ती 186 लोग

नियमानुसार संक्रमित मरीजों को संदिग्ध लोगों से अलग वार्ड में रखना होता है. फिलहाल इस अस्पताल में भर्ती कुल 186 लोगों में से 150 कोरोना वायरस संक्रमित हैं और बाकी संदिग्ध हैं. सूत्रों के मुताबिक, संक्रमित 150 लोगों में से 40 मुस्लिम हैं.

 

उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्यमंत्री को खबर नहीं

जब राज्य के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मामने की जानकारी न होने की बात कही. पटेल ने कहा, “मुझे ऐसे किसी फैसले की जानकारी नहीं है. आमतौर पर तो महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग वार्ड होते हैं. मैं इस बारे में पूछताछ करुंगा.”

इसी तरह अहमदाबाद के कलेक्टर ने भी मामले से अनभिज्ञता जताई. उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया था.

इस मामले पर सूचना विभाग ने ट्वीट करके इसे भ्रामक जानकारी बताया है. सूचना विभाग ने ट्वीट करते हुए कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ये भ्रांति फैला रही हैं कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में कोरोना के मरीज़ों को धर्म के आधार पर अलग अलग वार्ड में रखा गया है.

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