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पालघर में 2 साधुओं की भीड़ द्वारा हत्या, 110 गिरफ़्तार, सरकार ने कहा धार्मिक एंगल देने वालों की खैर नहीं

तर्कसंगत

Image Credits: Mumbai Mirror

April 20, 2020

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देश भर में कोरोना लॉकडाउन है और इस बीच महाराष्ट्र के पालघर जिले से शुक्रवार को मॉब लिंचिंग की शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई थी. यहां करीब 200 लोगों की भीड़ ने 2 साधु और 1 ड्राइवर को पीट-पीट कर मार डाला था.

 

क्या है मामला ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूना अखाड़े के दो साधु 35 साल के सुशील गिरी महाराज और 70 साल के चिकणे महाराज कल्पवृक्षगिरी ड्राइवर निलेश के साथ 17 अप्रैल को मुंबई के कांदिवली से गुजरात के सूरत जा रहे थे. दोस्त के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए. कांदिवली से करीब 120 किलोमीटर का रास्ता भी तय कर लिया था. पीटीआई के अनुसार कुछ लोगों ने तीनों को रोक लिया और उन्हें गाड़ी से निकाल कर पीट-पीट कर मार डाला. भीड़ को इन पर चोर होने का शक था.

पालघर के डीएम कैलाश शिंदे ने बताया कि तीनों कांदिवली से सूरत जा रहे थे. दादरा और नगर हवेली की सीमा के बीच एक गांव है. जहां ये घटना हुई है. गांव वालों के हाथ में कुल्हाड़ी, लकड़ी, पत्थर समेत दूसरे हथियार थे. इन हथियारों से उन्होंने तीनों पर हमला किया. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची. तीनों को गाड़ी में डाला. पर गांव वालों ने फिर अटैक कर दिया. मौके पर पुलिस पहुंच गई थी, और भीड़ को समझाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने उल्टा पुलिस पर ही हमला कर दिया. पुलिस पीड़ितों को अस्पताल ले जाना चाहती थी, तो भीड़ और उग्र हो गई. पुलिस की गाड़ी तोड़ दी. पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. किसी तरह अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया.

 

 

पालघर पुलिस ने लिखा, “पालघर मॉब लिंचिंग मामले में जिन 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें 9 नाबालिग़ शामिल हैं. 101 लोगों को इस महीने की 30 तारीख तक के लिए पुलिस कस्टडी में लिया गया है. इस मामले में जांच अभी जारी है.”

 

 

रविवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्न फडनवीस ने “घटना की उच्च स्तरीय जांच” की मांग की.

उन्होंने कहा, “सबसे शर्मनाक़ बात ये है कि पुलिस के सामने भीड़ लोगों को मारती है, पुलिस के हाथ से छीन कर मारती है. कहीं न कहीं महाराष्ट्र में क़ानून व्यवस्था लचर हो गई है.”

 

 

महाराष्ट्र के होम मिनिस्टर अनिल देशमुख ने ट्वीट कर कहा, ‘हमला करनेवाले और जिनकी इस हमले में जान गई, दोनों अलग धर्म के नहीं हैं. बेवजह समाज में/समाज के माध्यमों द्वारा धार्मिक विवाद निर्माण करने वालों पर पुलिस और महाराष्ट्र साइबर क्राइम डिपार्टमेंट को कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं.’

 

 

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