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लॉकडाउन : कर्नाटक में दो भाई अपनी ज़मीन बेच कर ज़रूरतमंदों का पेट भर रहे हैं

तर्कसंगत

Image Credits: Prajavani

April 23, 2020

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कर्नाटक के कोलार में रहने वाले दो भाइयों ने तालाबंदी के कारण अपनी नौकरी गंवाने वालों की मदद के लिए शहर में अपनी 30×40 जमीन बेच दी।

COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण वेतन की हानि के कारण कई दिहाड़ी मज़दूर भूख से मर रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में इन प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए विभिन्न लोग आगे आए हैं।

चिक्कबल्लापुर जिले के चिंतामणि तालुक के मोहम्मदपुर गांव से ताज़मुल और मुज़म्मिल पाशा ने बिक्री से 25 लाख रूपये जुटाए। इस पैसे का उपयोग उन्होंने वंचित लोगों को किराने का सामान और अन्य जरूरी सामान मुहैया कराने के लिए किया।

डेक्कन हेराल्ड ने तजामुल पाशा के हवाले से लिखा है , “COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में सोशल डिस्टन्सिंग कारगर उपाय है। अगर लोगों को खाना नहीं मिलता है, तो वे उसकी तलाश में बाहर काम की खोज में निकलते हैं। उन्हें अपने घरों के अंदर रखने का एकमात्र तरीका है कि उन तक किराने का सामान और भोजन देना है।”  एक अनाथ आश्रम में छोड़ दिए जाने के बाद ताजमुल और मुजामिल को उनकी दादी अपने साथ कोलार ला आयी। दोनों ने केवल कक्षा IV तक पढाई की और उसके बाद अपनी कमाई के लिए शिक्षा छोड़नी पड़ी। “एक दयालु व्यक्ति ने हमें गौरीपेट में मस्जिद के पास एक घर दिया। हिंदू, मुस्लिम, एक सिख परिवार और कई अन्य लोगों ने हमें उन दिनों भोजन दिया। धर्म और जाति कभी भी बाधा नहीं थी। हमें इंसानियत ने जोड़ कर रकह और आज हम उसी इंसानियत को समाज में वापस लौटा रहे हैं।” ताजमुल ने कहा।

उन्होंने कहा, “उन दिनों ने हमें भोजन का मूल्य सिखाया। बचपन के इस अनुभव ने हमें तब तक गरीबों की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।”

पाशा भाइयों ने 20 लोगों के एक समूह का गठन किया, समूह ने चर्चा की और निर्णय लिया कि मदद करने का सबसे अच्छा तरीका गरीब लोगों को किराने का सामान मुहैय्या करना था। उन्होंने थोक में किराने का सामान खरीदा और संग्रहीत किया। फिर उन्होंने राशन के पैकेट तैयार किए, प्रत्येक में 10 किलो चावल, 1 किलो -आटा, 2 किलो गेहूं, 1 किलो चीनी, खाद्य तेल, चाय पत्ती , मसाला पाउडर, हैंड सैनिटाइजर की एक बोतल और फेस मास्क जैसी आवश्यक चीजें तैयार की गईं।

उनके घर के बगल में एक खुली जगह में एक तम्बू लगाया गया था और उन लोगों को भोजन परोसने के लिए एक सामुदायिक रसोईघर स्थापित किया गया था जो अपने घरों में भोजन पकाने में असमर्थ थे। पुलिस ने स्वयंसेवकों को पास जारी किए हैं ताकि वे अपनी बाइक पर आवश्यक वस्तुओं की डिलीवरी कर सकें। भाइयों ने परिवारों के प्रत्येक सदस्य को एक दिन में कम से कम तीन समय भोजन देने पर ध्यान केंद्रित किया। तजामुल ने कहा, “मुझे नहीं पता था कि सरकार लॉकडाउन आगे बढ़ाएगी। मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। लॉकडाउन समाप्त होने तक मैं जरूरतमंदों की सेवा जारी रखना चाहता हूं।”

मुजामुल ने कहा कि उनके काम की सराहना की जा रही है और कोलार के कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। करीब 12,000 लोगों को कवर करते हुए पाशा ने 2,800 से अधिक परिवारों को मुफ्त किराने का सामान दिया है। उन्होंने 2,000 से अधिक लोगों को भोजन भी परोसा है।

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