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अधिकारियों की जानकारी में रहने के बाद भी जमातियों को लेकर फैलाई गई झूठी खबर

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April 25, 2020

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शुक्रवार को बुंदेलखंड के बांदा जिले के अधिकारियों ने शहर की एक मस्जिद (खुटला मस्जिद) में पिछले 28 दिनों से क्वारंटाइन किए गए 18 लोगों को अब वहां से निकालकर कृषि विश्वविद्यालय में बने क्वारंटाइन केंद्र में भेज दिया है। पुलिस ने इस मामले पर 36 घंटे की चुप्पी के बाद इन लोगों की गिरफ्तारी से इनकार किया है।

 

मीडिया द्वारा फैलाई गयी गलत खबर

मीडिया के द्वारा फैलाई जा रही झूठी खबरें गाँव-गाँव तक पहुँच चुकी हैं। निज़ामुद्दीन मरकज से जमातियों के मिलने के बाद से देशभर में लगातार झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। गुरुवार से बुंदेलखंड के बांदा जिले में भी जमातियों को लेकर झूठी खबरें फैलाई गई। अमर उजाला, टीवी 9 भरतवर्ष, रिपब्लिक ने उस खबर को हवा दे दी जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना ही नहीं था।

 

 

गुरुवार को टीवी 9 भरतवर्ष, रिपब्लिक चैनल ने प्रमुखता से हेडलाइन देते हुए कहा कि बांदा के एक मस्जिद से 19 जमाती गिरफ्तार किए गए हैं। जबकि ये खबर बिलकुल झूठी है। अमर उजाला ने भी जमाती को मिलने और उन्हें घर भेजने की खबर को प्रकाशित किया।

 

 

इसके बारे में खुटला मस्जिद के मौलाना मोहम्मद आरिफ बताते हैं कि ‘ये सभी लोग 21 मार्च को उरई से बांदा आए थे। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू उसके बाद लॉकडाउन घोषित होने की वजह से कहीं नहीं जा पाए, इसलिए ये लोग यही रह गए। यहाँ पर जितने भी लोग रुके हुए थे उसकी जानकारी यहाँ के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को थी।’

खुटला मस्जिद के मौलाना प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि ‘पहली बार 31 मार्च को सिटी मजिस्ट्रेट मस्जिद आए और मेडिकल कॉलेज में जांच करवाने के बाद सभी को पुलिस की मौजूदगी में फिर मस्जिद में छोड़ गए थे। इसके बाद 18 अप्रैल से स्वास्थ्य और पुलिस के अधिकारी रोजाना अपने साथ ले जाते और फिर कुछ घंटों के बाद मस्जिद में छोड़ जाते।’

 

 

 

मौलाना मोहम्मद आरिफ़ कहते हैं कि मंगलवार को भी यही हुआ सभी लोगों को सुबह मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, उसके बाद शाम को लगभग छह बजे मस्जिद में छोड़ गए। लेकिन करीब एक घंटे बाद सात बजे फिर शहर कोतवाल मस्जिद आए और कहा कि अब इन्हें ले जाना पड़ेगा।” मौलाना बताते हैं कि कोतवाल साहब सभी को एंबुलेंस से ले गए हैं। इनमें 17 लोगों को कृषि विश्वविद्यालय में जबकि एक व्यक्ति जिसको दमा और उच्च रक्तचाप की शिकायत है उसे मेडिकल कॉलेज में रखा गया है।

बांदा जिले के करीब 30 साल के अनिल कुमार बताते हैं कि, ‘बुधवार को व्हाट्सप्प ग्रुप में जमातियों को लेकर हल्की-हल्की खबर सुनने को मिल रही थी, कुछ लोग बोल रहे थे कि मस्जिद से 19 जमाती गिरफ्तार किए गए हैं, गुरुवार को ये खबर न्यूज चैनल में भी आ गया, जब न्यूज में आ गया तो हम लोगों को लगा कि सच होगा, लेकिन अब मालूम चल रहा है कि ये खबर झूठी है, मैं ट्विटर पर हूँ इसलिए मुझे मालूम चल गया, ये खबर झूठी है, न्यूज चैनल वाले ये बताए ही नहीं।

इस तरह की किसी भी खबर को सिरे से खारिज करते हुए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि मंगलवार की रात खुटला (जगह का नाम) की एक मस्जिद से निकालकर 18 स्थानीय जमातियों के एक समूह को एकांतवास में रखा गया। इनमें से 18 व्यक्तियों को कृषि विश्वविद्यालय में और दमा व उच्च रक्तचाप की शिकायत वाले एक व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज में रखा गया है। उन्हें जल्द ही घरों में ही क्वारंटीन किया जाएगा।

 

 

सीएमओ संतोष कुमार बताते हैं कि ‘इन लोगों का तबलीगी जमात से कोई संबंध नहीं है। ये लोग 28 दिनों से मस्जिद में रह रहे थे। इस दौरान इन लोगों का स्वास्थ्य चेकअप हुआ है।’ सीएमओ ने बताया कि ‘सभी लोग पूरी तरह स्वस्थ्य हैं।’

 

पुलिस ने खबर को नकारा

बांदा पुलिस ने भी जमातियों के गिरफ्तारी जैसी किसी भी खबर को सिरे से नकार दिया है। बांदा पुलिस ने ट्वीट करते हुए है कि ‘बाँदा पुलिस द्वारा ऐसी कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है।’ पुलिस ने ट्वीट में कहा है कि ‘क्षेत्राधिकारी नगर को तत्काल जांच कर आवश्यक विधिक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।’

 

 

स्थानीय लोग और पत्रकार इस तरह की खबर से परेशान

मीडिया में आ रही झूठी खबरों से परेशान बांदा जिले के स्थानीय पत्रकार आशीष सागर कहते हैं कि, ‘कोरोना देश मे कुछ महीने पहले आया है लेकिन मजहबी हिंसा, कौम विशेष को गाली देना ,कुंठित करना, उन्हें देश की जनता के सामने दोयम साबित करना भारत में छह साल पहले ही शुरू हो गया। इस सरकार के आने के बाद देशभर में ज़िस तरह मजहब के नाम पर धार्मिक उन्माद फैलाये गए मसलन कभी माब लिंचिंग, गौ प्रेमी की तस्कर समझकर हत्या करना, हर हिंसा में हिन्दू मुस्लिम एंगल देना और मीडिया, सोशल मंच पर युवाओं को ब्रेनवॉश किया गया।

इसी जिले के इश्तियाक अहमद कहते हैं कि, ‘जमाती या मुस्लिमों पर किसी तरह का आरोप लगाना नया तो है नहीं। ये सब कुछ राजनैतिक लोगों, मीडिया और सोशल मीडिया का बोया हुआ ज़हर है। इश्तियाक कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में इतना ज़हर नहीं था लेकिन कोरोना के दौर में इस तरह से मुस्लिमों को बदनाम किया जा रहा है कि एक दूसरे के बीच में खाई बढ़ती जा रही है, लोगों के दिल में हिन्दू-मुस्लिम का ज़हर बैठने लगा हैं। एक कम्यूनिटी के लोगों को लगने लगा है कि मुस्लिमों ने ही इस महामारी को फैलाया है।

आशीष सागर कहते हैं कि 24 घण्टे मेरे ही घर मे मुस्लिम को हिकारत की नजरों से देखने का माहौल है जो पहले नहीं था। मेरे मुस्लिम मित्र है तो हिन्दू भी। मैं गांधी को गाली नही देता लेकिन मेरे पिता गोडसे को पूजते है। यह बात सार्वजनिक नही करनी चाहिए लेकिन बीती रात ही इसी मसले पर और सोनिया को तंज कसने पर मेरी कलह हुई है। कलह भी इतनी की पिता-पुत्र दुश्मन जैसे लगे।

 

 

इश्तियाक अहमद कहते हैं कि ‘कुछ दिन पहले जब दिया जलाने को लेकर एक हिन्दू दोस्त ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा था, मैंने उनके पोस्ट को कॉपी करके अपने वाल पर लगा दिया, उस पोस्ट से भारतीय जनता पार्टी के समर्थक इतने नाराज़ हुए कि मेरे दुकान पर आकर मुझे गालियां देने लगे, मुझे गद्दार और देशद्रोही तक कह डाले।’

स्वतंत्र पत्रकार कहते हैं कि ‘यह अनायास नहीं हुआ इस माहौल को जानबूझकर पोषित किया गया है। मेरी माँ और मैं साथ है पिता भक्तिमय आस्था में डूबे है। समाज मे आज कोरोना को भी भारतीय संदर्भ में जमाती और मुस्लिम की पैदाइश मानकर खबरों, संदेश, बयानी में परोसा जा रहा है। बुनियादी मुद्दा दफन कर घर-घर को बांटने, देश की अखंडता को तार-तार करने का एजेंडा चल रहा है जो सुनयोजित है।’

 

रिपोर्ट : रिज़वाना तबस्सुम

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