ख़बरें

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में चिमटे के कारण दो साधुओं की हत्या, सरकार ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए

तर्कसंगत

Image Credits: AajTak/News18

April 28, 2020

SHARES

कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है, लेकिन इसके बाद भी कुछ राज्यों में हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है।

ताजा मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के अनूपशहर कोतवाली थाना क्षेत्र के पगौना गांव में, जहां सोमवार रात को एक शिव मंदिर में दो पुजारियों की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। मामले को लेकर पूरे क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है।

 55 और 35 साल के इन दो साधुओं की हत्या तलवार से उसी मंदिर में की गई जहां लॉकडाउन के चलते वे अस्थायी रूप से रह रहे थे। पुलिस के मुताबिक इस हत्या के सिलसिले में राजू नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि साधुओं ने राजू पर अपना चिमटा चुराने का इल्जाम लगाते हुए उसे डांटा था जिससे वह गुस्से में था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

ASP सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी मुरारी उर्फ ​​राजू है। वारदात के बाद वह कुछ दूरी पर नशे के कारण बेसुध होकर गिर गया। खून से सना देखकर ग्रामीणों ने उसे दबोच लिया और पुलिस के सुपुर्द कर दिया। उन्होंने बताया कि गत दिनों आरोपी ने पुजारियों का चिमटा छिपा दिया था। पुजारियों ने उसे डांट लगाई थी। इसी का बदला लेने के लिए उसने वारदात को अंजाम दिया है।

पुलिस ने इन हत्याओं के पीछे किसी सांप्रदायिक कारण होने की बात को खारिज किया है। उसका कहना है कि आरोपित यह अपराध करते समय नशे में था। एएनआई से बातचीत में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि साधुओं द्वारा उस पर चोरी का इल्जाम लगाए जाने के बाद से वह गुस्से में था। उनके मुताबिक वारदात वाली रात उसने भांग का नशा किया हुआ था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा दुख जताया है तथा संज्ञान लेते हुए पुलिस के उच्चाधिकारियों को घटना स्थल का मौका मुआयना करने और विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।

बता दें कि दोनो साधू करीब 12 साल पहले अपना परिवार छोड़कर अलीगढ़ स्थित आश्रम में आए थे और वहां से दो साल बाद मंदिर में पहुंचे थे।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...