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परेशानियों से जूझ रहा चैंपियन खिलाड़ी का परिवार, चंद महीने पहले देश को दिलाया था गोल्ड मेडल

Rizavana Tabassum

May 4, 2020

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‘इस समय मुझे अपनी डाइट नहीं मिल पा रही है, मुझे काफी बुरा लगता है कि एक इन्टरनेशनल खिलाड़ी जो भारतीय टीम की कैप्टन है आज वो अपने ही देश में अपने लिए लड़ रही है, लॉकडाउन में अपने डाइट के लिए स्ट्रगल कर रही है। दूसरी तरफ कुछ इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं जो करोड़ों का दान कर रहे हैं लेकिन हमारे लिए सोचने वाला कोई नहीं है।’

ये कहना है भारतीय खो-खो टीम की कैप्टन नसरीन शेख का। नसरीन की अगुवाई में ही भारत ने नेपाल को हराकर साउथ एशियन गेम्स का गोल्ड जीता था। नसरीन 40 नेशनल, 3 इंटरनेशनल मैच खेल चुकी हैं लेकिन आज हालत यह है कि वह अपने डाइट के लिए संघर्ष कर रही है, नसरीन की आर्थिक स्थिति काफी खराब है, उनके घर में खाने के लिए नहीं है।

 



सरकार की तरफ से नहीं मिल रही कोई मदद

तर्कसंगत से फोन पर बातचीत में नसरीन बताती हैं कि ‘अभी तक मुझे सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिला है, मैं सरकार की इस रवैये से काफी दुखी हूँ इतना सब कुछ अचीवमेंट हासिल करने के बाद भी गवरमेंट की तरफ से मुझे कोई हेल्प नहीं मिल रही है। मैं काफी कोशिश भी की, ट्विटर और मेल से मेसेज दी कि मुझे अच्छी डाइट के लिए बहुत जरूरत है लेकिन अभी तक किसी ने मुझे कोई जवाब नहीं दिया है।’ नसरीन कहती हैं कि हमने खेल मंत्री को भी ट्वीट की लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया है।’

घूम-घूमकर बर्तन बेचते हैं नसरीन के पिता

दिल्ली के शकरपुर की रहने वाली नसरीन के घर में पांच बहनें और चार भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। नसरीन के घर उनके और पिता के अलावा दूसरा कोई कमाने वाला नहीं क्योंकि सभी भाई-बहन अभी पढ़ रहे हैं। भारतीय खिलाड़ी नसरीन कहती हैं कि ‘मेरे अब्बू दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बर्तन बेचते हैं। मैं और मेरे छोटे भाई-बहन पढ़ाई करते हैं। मैं फाइनल ईयर में हूँ।’

 



 

नसरीन के पिता गफ़ूर कहते हैं कि ‘मेरी बेटी काफी मेहनती है और अच्छी खिलाड़ी भी है, जो देश को गोल्ड मेडल जीता चुकी है। लेकिन मेरी आर्थिक हालत ऐसी है जिसकी वजह से मैं अपनी बेटी को आगे बढ़ाने में कहीं न कहीं मुसीबत का सामना करता हूं। लॉकडाउन की वजह से सब बंद है, मैं खुद किसी को अपनी स्थिति नहीं बताना चाहता लेकिन क्या करूँ, हालत काफी खराब हो गई है।

पढ़ाई पर फोकस कर रही हैं नसरीन 

नसरीन कहती हैं कि ‘वर्तमान समय में मैं पढ़ाई पर ध्यान लगा रही हूँ। जॉब के बारे में बात करते हुए नसरीन कहती हैं कि मैं इंडियन टीम और एयरपोर्ट एथोरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से खेलती हूँ। एथोरिटी ऑफ इंडिया में काम करती हूँ, वो कोई जॉब नहीं है, बस अच्छी डाइट के लिए हमें पे करते हैं। नसरीन कहती हैं कि लॉकडाउन की वजह से कोई काम नहीं हो पा रहा है, अब्बू का काम बंद है। मैं भी काम पर नहीं जा रही हूँ, एक संस्था की तरफ से कुछ पैसे मिले थे मुझे उसी से हमारे घर का खर्च चल रहा है। कुछ पैसो की दिक्कत हुई तो एयरपोर्ट वाले सर को मेल की, उन्होने जो भी मेरी पेमेंट वो मुझे भेज दिया लेकिन सरकार की तरफ से मुझे कोई मदद नहीं मिल रही है।

 



 

सरकार की तरफ से मिली निराशा

नसरीन कहती हैं कि ‘मुझे सरकार से काफी उम्मीद थी लेकिन अभी तक उन्होने कोई भी हेल्प नहीं की। हालांकि एथोरीटी ऑफ इंडिया ने मेरे लिए काफी कुछ किया, मुझे दिक्कत ना हो इसके लिए उन लोगों ने काफी हद तक मेरी मदद की है, वो चीज गवरमेंट को करनी चाहिए लेकिन उन लोगों ने मेरी तरफ देखा नहीं।’

नसरीन कहती हैं कि एक एथलीट को प्रॉपर डाइट लेना बहुत जरूरी है और इस समय लॉकडाउन के कारण बिलकुल भी नहीं मिल पा रहा है, आगे रिकवर करने में मुझे बहुत टाइम लग जाएगा, क्योंकि एक दिन हम प्रॉपर डाइट नहीं लेते हैं तो हमसे खेला नहीं जाता है, वीकनेस सी महसूस होती है और इस समय तो बहुत बुरा हाल है।

आने वाले समय में होने वाले खो-खो मैच को लेकर नसरीन बताती हैं कि, अभी हमारे एशियन चैंपियनशिप होने वाले थे जो लॉकडाउन की वजह से कैंसिल हो गया था। मैं काफी टाइम से उसकी तैयारी में लगी हुई थी।

 

मेरे गुरु हैं अश्विनी शर्मा

नसरीन बताती हैं कि मैं जूनियर हाई स्कूल से ही खो-खो खेलना शुरू कर दी थी, मेरे गुरु अश्विनी शर्मा ने मुझे खो-खो खेलना सिखाया, वो मुझे लगातार मोटिवेट करते गए, और मैं अपने खेल में रमती गई। फाइनल ईयर आते-आते तक मैं 40 नेशनल और तीन इन्टरनेशनल मैच खेल चुकी हूँ। पहला इंटरनेशनल मैच 2016 में खेली हूँ, इसके बाद लंदन में एक चैंपियनशिप हुई थी उसके बाद साउथ एशियन गेम्स में कैप्टन के रूप में खेली थी।

 



मुस्लिम लड़की होते हुए आसान नहीं थी राह

नसरीन कहती हैं कि एक मुस्लिम लड़की होने के नाते मैं अलग-लग जगह पर काफी संघर्ष की हूँ, मुस्लिमों में तो वैसे ही लड़कियों को खेलने नहीं देते हैं, छोटे कपड़े पहनने के लिए काफी ताने सुनी हूँ, रिश्तेदारों की काफी बातें सुननी पड़ी, इन सभी बातों को मैं इगनोर करते हुए अपने गेम पर फोकस की और अपने देश भारत के लिए खेली। मुझे यही लगता है कि मैं इतनी मेहनत करती हूँ तो मुझे एक गवरमेंट जॉब मिल जाय और जो लोग ताने मारते हैं उन्हें दिखाऊँ कि मैं कहाँ हूँ, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, अब तो मैं काफी निराश हो गई हूँ।

 



 

नसरीन कहती हैं कि ‘अभी तक मुझे कभी नहीं लगा था लेकिन अब लग रहा है कि शायद मुस्लिम होने की वजह से मेरी कोई हेल्प नहीं किया जाता है क्योंकि जब आप अपने देश के कैप्टन हो तो गवरमेंट की रिस्पॉन्सबिलिटी मेरी तरफ बढ़ जाती है, सरकार को चाहिए को वो मेरी तरफ ध्यान दे और देखे कि हम कितना स्ट्रगल कर रहे हैं। वैसे ही हम लोगों के ऊपर काफी प्रेशर होता है एक तो अच्छा खेलने के लिए हम स्ट्रगल कर रहे होते हैं कि हम कितना अच्छा खेल सकते हैं फिर लॉकडाउन में हम खाने के लिए स्ट्रगल कर रहे हैं तो मुझे फील हो रहा है कि मैं मुसलमान हूँ शायद इसलिए मुझे ज्यादा स्ट्रगल करना पड़ रहा है।’

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