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कोरोना काल में कानपूर में सेनिटाइजेशन घोटाला, केवल क्लोरीन पानी से हो रहा छिड़काव

तर्कसंगत

Image Credits: SwachhBharatGov/Twitter

May 5, 2020

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कानपुर नगर निगम को पूरे कानपुर नगर को सेनेटाइज करने के लिए सैनिटाइजर दिया गया है जिससे कोरोना वायरस के विषाणु समाप्त हो जाएं लेकिन कोरोना वायरस भी कानपुर नगर निगम के खेल के आगे नतमस्तक हो गया। दरसल कानपुर को सैनिटाइज करने के लिए कानपुर नगर निगम को सोडियम हाइपोक्लोराइड की आपूर्ति में सप्लायरों ने एक बड़ा खेल कर दिया है समरसेबल का पानी ड्रम में भरकर तो दूसरे सप्लायर ने केमिकल में नाम मात्र की क्लोरीन मिलाई थी वहीं जलकल विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार एक नमूने में पूरी तरह से पानी वहीं दूसरे में क्लोरीन की मात्रा पीने वाले पानी में से थोड़ी ऊपर मात्र है। इतना बड़ा घोटाला होने के बाद भी आलाअधिकारी मौन रूप धारण किए हैं आखिर कहीं ना कहीं अधिकारियों की यह चुप्पी इस बात को साबित कर रही है कि इस घोटाले में अधिकारियों का पूरा आशीर्वाद है।

जागरण की खबर में कहा गया है कि कानपुर नगर निगम पूरे शहर को लॉकडाउन के दौरान नियमित रूप से सेनेटाइज तो कर रही है लेकिन इसमें ज्यादातर हॉटस्पॉट क्षेत्र में सैनिटाइज करने के लिए मुख्य तौर पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है पूरे शहर को सेनेटाइज करके कोरोना वायरस नाम की भयानक महामारी समाप्त करना है चूंकि सेनेटाइजर में सोडियम हाइपोक्लोराइट 42 फ़ीसदी क्लोरीन रखी जाती है लेकिन 1 से 3 फ़ीसदी तक सोडियम हाइपोक्लोराइट में पानी भरकर उस का घोल बनाने के बाद शहर को धड़ल्ले से सेनेटाइज किया जा रहा है तो क्या माना जाए पानी से पूरा शहर सैनिटाइज किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कानपुर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की मानें तो कानपुर के रियासी इलाके स्वरूप नगर की बीवी एस इंडस्ट्रीज व शास्त्री नगर के दमन इंटरप्राइजेज पर मौजूदा समय में माल लिया गया है जो पंजीकृत नहीं थी इन्हें 90 टन केमिकल की सप्लाई करनी थी लेकिन पहले चरण में 8.5 टन सप्लाई मात्र किया गया..

विशेषज्ञों की मानें तो वार्डों में हैंड मशीन तेजो घरों को सेनेटाइज किया जा रहा है उनमें पानी में क्लोरीन एवं गेमैक्सीन की गोलियां मिलाकर सेनेटाइजर तैयार करके नाम मात्र का छिड़काव किया जा रहा है अब ऐसे में कोरोना वायरस मरेगा या फिर इस घोटाले के उजागर होने के बाद आला अधिकारी।

मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रमिला निरंजन की मानें तो नगर निगम में आए केमिकल के अलग-अलग नमूनों को लेकर के जलकल की प्रयोगशाला में भेजा था जो पत्र जांच के लिए भेजा गया है उसमें कंपनी के मोबाइल नंबर के स्थान पर केवल 9 अंक ही लिखे हैं अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इसमें नगर निगम के अधिकारियों का भी हाथ है या फिर इन कंपनियों का इन कंपनियों का हाथ है तो नगर निगम चुप्पी क्यों साधे है…?

 

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