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कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु से चलाई जाने वाली विशेष श्रमिक ट्रेनें रद्द कर दी, तेजस्वी सूर्या ने बताया साहसिक और मजबूत कदम

तर्कसंगत

Image Credits: One India/Navbharat Times

May 7, 2020

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कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु से चलाई जाने वाली विशेष श्रमिक ट्रेनें रद्द कर दी हैं। इनसे मजदूर अपने-अपने राज्यों को लौटने वाले थे। Business Standard की रिपोर्ट की मानें तो ट्रेनें रद्द करने का फैसला मुख्यमंत्री बीएस येद्दीयुरप्पा और  बिल्डर्स की बैठक मंगलवार को हुई बैठक के बाद लिया गया। इसमें बिल्डराें ने मुख्यमंत्री से मजदूरों को उनके राज्य जाने से रोकने की मांग की थी। बिल्डर्स के मुताबिक, अगर मजदूर लौट जाएंगे तो कंस्ट्रक्शन के काम में दिक्कत होगी। इसके बाद सरकार ने रेलवे को विशेष ट्रेन चलाने के लिए रेलवे से किया गया अनुरोध वापस ले लिया।

दो दिन पहले ही राज्य सरकार ने रेलवे से पांच दिनों तक हर रोज तीन ट्रेनों की व्यवस्था करने को कहा था। ये ट्रेनें बिहार के दानापुर जानी थीं। हालांकि, मंगलवार देर रात राज्यों के बीच यात्रा के लिए कर्नाटक सरकार के नोडल अधिकार एन मंजुनाथ प्रसाद ने दक्षिण पश्चिम रेलवे (एसडब्ल्यूआर) को स्पेशल ट्रेनें न चलाने के लिए चिट्‌ठी लिखी। इसमें लिखा गया था- बुधवार से विशेष ट्रेनों की जरूरत नहीं है। हम इसके लिए पहले किया गया अपना अनुरोध वापस लेते हैं। एसडब्ल्यूआर के अधिकारियों ने भी राज्य सरकार से ट्रेनों को रद्द करने के लिए चिट्‌ठी मिलने की पुष्टि की है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मामले के नोडल अधिकारी एन मंजूनाथ प्रसाद ने दक्षिण-पश्चिम रेलवे को पत्र लिखते हुए कहा, “हमने आपसे पांच दिन के लिए प्रतिदिन दो ट्रेनों का इंतजाम करने को अनुरोध किया था… चूंकि कल से इन ट्रेन सेवाओं की जरूरत नहीं है, इसलिए इस अनुरोध को वापस लिया जाता है।”

कर्नाटक की भाजपा सरकार के इस फैसले के पीछे लॉकडाउन खत्म होने के बाद औद्योगिक गतिविधियों शुरू होने पर मजदूरों की कमी की आशंका को कारण माना जा रहा है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में येदियुरप्पा ने कहा, “हम 3,500 बसों और ट्रेनों में लगभग एक लाख लोगों को उनके घर पहुंचा चुके हैं। मैंने प्रवासी मजदूरों से रुकने की अपील भी की है क्योंकि अब कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो चुका है।”

विपक्ष का विरोध

विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस फैसले के लिए येदियुरप्पा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने कहा, “हम उन्हें (प्रवासी मजदूरों) को बंधक बनाकर नहीं रख सकते। हमें उन्हें भरोसे में लेना होगा। सरकार और बिल्डरों को उन्हें प्रोत्साहन राशि देनी चाहिए।”

वहीं भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट कर कहा कि ये एक साहसिक और जरूरी कदम है और इससे कर्नाटक मजबूत बनकर उभरेगा।

श्रमिकों से लिया गया था बसों और ट्रेनों का अडवांस किराया

नवभारत टाइम्स की ख़बर में कहा गया है कि कर्नाटक सरकार ने रेलवे का किराया फिक्स किया था। बेंगलुरु से दानापुर के लिए प्रत्येक यात्री 910 रुपये, बेंगलुरु से जयपुर के लिए 855 रुपये, 770 रुपये हावड़ा के लिए, 760 रुपये, हटिया के लिए, 665 रुपये भुवनेश्वर के लिए, 830 रुपये चिकबनवाड़ा से लखनऊ के लिए 790 रुपये मलूर से बरकाकना के लिए किराया रखा गया था।

30 रुपये सुपरफास्ट और 20 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया गया था। श्रमिकों से बसों का किराया भी लिया गया था। इसमें प्रत्येक यात्री से 130 से 140 रुपये लिए गए थे। सभी यात्रियों से बसों और ट्रेनों का अडवांस किराया लिया गया था।

एसडब्ल्यूआर ने राज्य सरकार के साथ मिलकर रविवार से आठ ट्रेनों का संचालन किया था और 9,583 श्रमिकों के जाने की व्यवस्था की गई थी। एसडब्ल्यूआर ने इन वर्कर्स को दानापुर (तीन ट्रेनों), भुवनेश्वर, हटिया, लखनऊ, बरकाकाना और जयपुर भेजा।

पिछले हफ्ते 29 अप्रैल को केंद्र सरकार ने अपनी गाइडलाइंस में बदलाव करते हुए राज्यों को लॉकडाउन के कारण उनके यहां फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाने की अनुमति दी थी। हालांकि, राज्यों को इसके लिए केवल बसों के प्रयोग की अनुमति दी गई थी। राज्यों के बसों के जरिए ऐसा करने में कई परेशानियों का जिक्र करने के बाद केंद्र सरकार ने ‘श्रमिक एक्सप्रेस’ के नाम से विशेष ट्रेनें चलाने का आदेश दिया था।

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