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सीएमआईई: लॉकडाउन एक हफ्ते और बढ़ा तो आ सकती है ये बड़ी दिक्क्त

तर्कसंगत

May 14, 2020

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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन किया गया है और लॉकडाउन 3.0 की यह अवधि 17 मई को पूरी हो रही है. इस बीच सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी के एक सर्वे में यह पता लगा है कि लॉकडाउन अगर एक हफ्ते और आगे बढ़ा तो भारतीय परिवारों में से एक तिहाई से अधिक के पास जीवन जीने के लिए जरूरी संसाधन खत्म हो जाएंगे.

मंगलवार को पेश की गई स्टडी में कहा गया है कि भारत के 84 फ़ीसदी से अधिक घरों में मासिक आमदनी में गिरावट दर्ज की गई है. देश में कामकाजी आबादी का 25 फीसदी इस समय बेरोजगारी की मार झेल रहा है.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के चीफ इकनॉमिस्ट कौशिक कृष्णन ने कहा, “अगर पूरे देश की बात करें तो 34 फ़ीसदी घरों की स्थिति खराब हो चुकी है. उनके पास एक हफ्ते के लिए जीवन जीने के जरूरी संसाधन बचे हैं. एक हफ्ते के बाद उनके पास कुछ भी नहीं बचा होगा.” उन्होंने इस बात की आवश्यकता जताई कि समाज में कम आय वर्ग के लोगों को तुरंत मदद किए जाने की जरूरत है.

सेंटर फॉर मॉनीटियरिंग इंडियन इकोनॉमी के उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वेक्षण के डेटा से पता चलता है कि नौकरी खोने वाले 11 फीसदी लोग 20-24 वर्ष की आयु के युवा थे. दूसरी तरफ, 25-29 वर्ष की आयु वाले 1 करोड़ 40 लाख युवाओं की नौकरियां चली गईं. इस उम्र वाले लोगों की 2019-20 में कुल रोजगार में 11.1 फीसदी हिस्सेदारी थी, लेकिन जॉब लॉस 11.5 फीसदी रहा.

अगर भारत के शहरी और ग्रामीण इलाकों की बात करें तो शहरी इलाकों में 65 परिवारों के पास 1 हफ्ते से अधिक के लिए जीने के संसाधन बचे हैं, जबकि ग्रामीण घरों में 54 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि उनके पास बहुत से उपाय हैं.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कम आय वर्ग के लोगों को जल्द से जल्द कैश ट्रांसफर की जरूरत है. अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो कुपोषण और गरीबी की वजह से होने वाली अन्य दिक्कतों में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है.

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