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लॉकडाउन में हुई 198 प्रवासी मजदूरों की मौत- रिपोर्ट

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June 3, 2020

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देश भर में 25 मार्च से 31 मई के बीच लॉकडाउन के दौरान करीब 200 प्रवासी कामगारों की मौत घर लौटने के दौरान 1,461 सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, इन दुर्घटनाओं में 198 प्रवासी कामगारों सहित कुल 750 लोगों की मौत हुई है। इसी तरह 1,390 लोग घायल हुए हैं।

कोरोनो वायरस संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए मोदी सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन के कारण पूरे देश में भूख-प्यास से बेहाल हजारों परिवार घर जाने के लिए निकल पड़े थे। कोई साधन नहीं होने के कारण लाखों लोग पैदल ही सामान और बच्चों को कंधे पर लादकर हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों की ओर निकल पड़े। कई इलाकों में अभी भी हजारों लोग इस सफर पर हैं।

इस दौरान मजबूरी और हताशा में जान बचाने के लिए पैदल ही घरों की ओर निकले कई मजदूरों के साथ कई हादसे भी पेश आए जिनमें करीब 200 प्रवासी मजदूरों की जान चली गई। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 94 मौतें हुईं। इसके बाद मध्य प्रदेश में 38, बिहार में 16, तेलंगाना में 11 और महाराष्ट्र में 9 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो गई।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लॉकडाउन में ये हादसे सड़कों के खाली होने पर तेज रफ्तार में वाहन चलाने के कारण हुए हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में चालकों की अनिंद्रा और अत्यधिक थकान भी प्रमुख कारण बनकर सामने आया है।

रिपोर्ट के अनुसार दुघर्टना में मरने वालों में 27 प्रतिशत प्रवासी मजदूर और 5 प्रतिशत पुलिस, डॉक्टर सहित आवश्यक सेवाओं से जुड़े अन्य लोग शामिल थे। इसी तरह 68 प्रतिशत लोग पैदल यात्री या फिर दुपहिया और तिपहिया वाहनों में सवार थे। जिन्हें तेज रफ्तार वाहनों ने कुचल दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 200 से अधिक लोगों की मौत वाणिज्यिक वाहनों में यात्रा करने के दौरान हुई है। यह वह इनमें यात्रा नहीं करते तो बच सकते थे। रिपोर्ट के अनुसार कुल हादसों में 43 प्रतिशत मौत वाहनों की आमने-सामने की भिड़ंत में हुई है। इसी तरह 15 प्रतिशम मौत वाहनों की तेज रफ्तार के कारण हुई है। इसी तरह सबसे गंभीर हादसे तेज रफ्तार वाहनों के कारण ही हुए हैं।

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