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पीएम केयर्स फंड पर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर, कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

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Image Credits: Inshorts/TheWire

June 3, 2020

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बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में अधिवक्ता अरविंद वाघमारे की जनहित याचिका में पीएम केयर्स फंड के विविध पहलुओं पर सवाल खड़े किए गए हैं। सरकार की ओर से फंड में जमा रकम के लेन-देन को सार्वजनिक नहीं करने, पीएम केयर्स फंड चैरिटेबल ट्रस्ट में नए सदस्यों की नियुक्ति नहीं करने, ट्रस्ट का ऑडिट कराने जैसे विविध मुद्दे उठाए हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई में केंद्र का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने इस याचिका को खारिज करने की प्रार्थना की।

जस्टिस सुनील बी. शुक्रे और अनिल ए. किलोर की नागपुर पीठ ने वकील अरविंद वाघमरे की याचिका पर सुनवाई की और केंद्र को निर्देश दिया कि वे अपने जवाब में हलफनामा दायर करें और अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

लाइव लॉ के मुताबिक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने पीठ से कहा कि ये याचिका खारिज कर दी जानी चाहिए क्योंकि ऐसी ही एक याचिका को अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही पीएम केयर्स फंड पर केंद्रित दो याचिकाओं को खारिज कर अपना फैसला सुना चुका है। ऐसे में इस विषय पर हाईकोर्ट को सुनवाई नहीं करनी चाहिए। विविध पक्षों को सुनकर न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अनिल किल्लोर की खंडपीठ ने मामले में प्रतिवादी केंद्रीय गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के प्रधान सचिव को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिका के अनुसार, PM CARES Fund ट्रस्ट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में है और रक्षा, गृह और वित्त विभागों के मंत्री इस ट्रस्ट के सदस्य हैं। यह कोरोना वायरस प्रकोप द्वारा उत्पन्न किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ बनाया गया था।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि PM CARES Fund के दिशा निर्देशों के अनुसार, चेयरपर्सन और तीन अन्य ट्रस्टियों के अलावा, चेयरपर्सन को तीन और ट्रस्टियों की नियुक्ति या नामांकन करना था। हालांकि, 28 मार्च, 2020 को ट्रस्ट के गठन के बाद से आज तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है।

याचिकाकर्ता के अनुसार 28 मार्च से लेकर अब तक सरकार ने ट्रस्ट पर किसी भी नए सदस्य की नियुक्ति नहीं की है। बगैर निर्देशों का पालन किए इस ट्रस्ट द्वारा करोड़ों रुपए का चंदा लिया जा रहा है। ऐसे में इस ट्रस्ट पर विपक्षी दलों के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की नियुक्ति होनी चाहिए।

 

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