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दिल्ली दंगे: पुलिस की चार्जशीट में ताहिर हुसैन मास्टरमाइंड, तब्लीगी जमात, उमर ख़ालिद से जोड़े तार

तर्कसंगत

Image Credits: NDTV

June 4, 2020

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उत्तर पूर्व दिल्ली में हिंसा के दौरान दंगों और आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की ‘‘हत्या’’ के पीछे एक गहरी साजिश थी जिसे निलंबित आप पार्षद ताहिर हुसैन के नेतृत्व में भीड़ ने खासतौर पर निशाना बनाया। बुधवार को अपने आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने अदालत को यह जानकारी दी। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रिचा परिहार ने आरोप पत्र पर सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख तय की है।

SIT ने इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को हिंसा का मास्टरमाइंड करार दिया है।

 

दंगों के लिए फंडिंग

चार्जशीट में ताहिर पर आरोप लगाया गया है कि उसने जनवरी के दूसरे सप्ताह में 1.3 करोड़ रुपये शेल कंपनियों में ट्रांसफर कराकर बाद में उन्हें कैश में लिया था। इसमें मीनू फैब्रिकेशन, एसपी फाइनैंशल सर्विस, यूद्धवी इंपेक्स, शो इफेक्ट एडवर्जाइजिंग और इसेंस सेलकॉम नाम की कंपनी को पैसे ट्रांसफर किए गए थे। ताहिर के घर पर कई सीसीटीवी लगे हुए हैं, लेकिन वहां 23 से 28 फरवरी के बीच की कोई भी रिकॉर्डिंग मौजूद नहीं है।

उमर खालिद के संपर्क में होने का दावा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने चार्जशीट में बताया कि ताहिर JNU में देश विरोधी नारे लगाने वाले उमर खालिद के संपर्क में भी रहा था। उमर ने ताहिर से दिल्ली में कुछ बड़ा करने की तैयारी करने को कहा था। इतना ही नहीं, ताहिर फंडिंग के लिए PFI से भी संपर्क करने में जुटा था।

दंगों से पहले जामिया इलाके में एक बैठक भी हुई थी जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने को लेकर प्रमुख जगहों पर दंगों की साजिश रची थी।

आरोप पत्र में क्या कहा गया है

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में लिखा है कि जांच से पता चला है कि अंकित शर्मा की हत्या और दंगे के पीछे गहरी जड़ें थीं, जो इलाके का एक जाना-पहचाना चेहरा था। दिल्ली के ईडीएमसी में आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन के नेतृत्व वाली भीड़ ने उन्हें खासतौर से निशाना बनाया था। आरोप पत्र में कहा गया है कि यह पाया गया है कि ताहिर हुसैन मुख्य व्यक्ति हैं, जो 24 और 25 फरवरी को चांद बाग इलाके में भीड़ को भड़का रहे थे। इसमें कहा गया है कि जांच के दौरान, अंकित शर्मा की हत्या में इस्तेमाल खून से सना चाकू और अंकित के खून से सने हत्यारे के कपड़े बरामद किए गए हैं। अपराध में इस्तेमाल एक अन्य चाकू भी बरामद किया गया है और एक अन्य मामले में ताहिर की लाइसेंस पिस्टल जब्त की गई है।

 

हत्या में सलमान नामक व्यक्ति का हाथ

पुलिस ने कहा कि अंकित की हत्या में एक आरोपी हसीन उर्फ सलमान का हाथ था। वह वह व्यक्ति है जिसने चाकू से हमला किया था। अपने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि उन्होंने एक हिंदू द्वारा 4 साल के मुस्लिम लड़के की हत्या के बारे में सुना था, इस पर वह क्रोधित हो गया और उसने चाकू ले लिया और अपने साथियों समीर, कासिम, साबिर और अन्य के साथ 25 फरवरी को चांद बाग पुलिया पर आ गया।

चार्जशीट में कहा गया है कि सलमान ने आगे खुलासा किया कि उन्होंने अंकित शर्मा पर चाकू से कई वार किए थे और उसके गुर्गों ने भी चाकू से वार किया। उसे डंडा मारा और उसकी हत्या करने के बाद उसके शव को नाले में फेंक दिया। पुलिस हिरासत रिमांड के दौरान, अपराध में इस्तेमाल  खून से सना चाकू, घटना के समय पहने गए आरोपी के खून से सने कपड़े, उसके घर से बरामद किए गए थे। बरामद चाकू और आरोपियों के कपड़े मृतक के खून से मिलान करने के लिए एफएसएल, रोहिणी भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

 

इन धाराओं के तहत दायर किया है आरोप पत्र

पुलिस ने आईपीसी की हत्या, (302), अपहरण (365), दंगा (147 और 148), धर्म, जाति आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने (153-ए) , आपराधिक साजिश (120-बी) और सबूतों का विनाश (201) सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया है। मामले में ताहिर हुसैन सहित दस लोगों को गिरफ्तार किया गया था। चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया है, जबकि चार के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दायर हो चुकी है।

वकील ने बताया शाजिश

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक जावेद ने कहा कि यह इस बात से साबित होता है कि जब उन्हें पुलिस हिरासत में लिया गया था, न तब और न ही उसके बाद उनके पास से कोई चीज बरामद की गयी। कुछ चीजों को ताहिर के खिलाफ प्लांट किया गया और उन्हीं के खिलाफ तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। जावेद का कहना है कि पुलिस ताहिर के खिलाफ एक भी सबूत नहीं पेश कर पाई है और राजनीतिक विरोधियों ने षड्यंत्र रचकर उन्हें फंसाया है। हुसैन यहां आरोपी नहीं पीड़ित हैं. उन्होंने यह दावा भी किया है कि जिस एफआईआर के आधार पर हुसैन मामला दर्ज किया गया था, वह सामान्य थी और एक हिंसक भीड़ के खिलाफ थी और उसमें बताई गई कथित हिंसा के किसी भी आरोपी का नाम नहीं था।

 

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