ख़बरें

वीडियो, कर्नाटक में कपड़ा मिल से निकाले गए 1300 मजदूर दे रहे है धरना

तर्कसंगत

June 10, 2020

SHARES

COVID-19 की मार मजदूरों पर खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. ताज़ा शिकार कर्नाटक के मंड्या जिले के श्रीरंगपटना में स्थित यूरो क्लोथिंग कंपनी के कारखानों में काम करने वाले 1,300 कपड़ा श्रमिक हैं, जिन्होंने शनिवार को रात भर अपनी नौकरी खो दी।

द न्यूज मिनट ने बताया कि यह घोषणा फैक्ट्री मैनेजर ने की थी, जिसमें पुष्टि की गई थी कि कंपनी की दूसरी फैक्ट्री (श्रीरंगपट्टना में) को बंद करने के मद्देनजर यूनिट के मजदूरों को काम से निकला जायेगा। यह भी कहा गया है कि कारखाना अब चालू नहीं होगा और श्रमिकों को उनके वेतन का आधा भुगतान किया जाएगा। कार्यकर्ताओं में से एक, मीडिया संगठन से बात करते हुए, पल्लवी ने कहा कि घोषणा ‘चेतावनी के बिना’ आई।

इस कंपनी से जीएपी, एचएंडएम, रीबॉक, एडिडास समेत दुनिया के कई जाने-माने ब्रांड्स को कपड़ा भेजा जाता था। नौकरी से निकाल देने के बाद कर्मचारी लगातार फैक्ट्री के सामने धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

 

जिस समय कार्यकर्ता शाम 5:40 बजे तक अपनी शिफ्ट पूरी करने के बाद बाहर निकल रहे थे, अचानक उन्हें कम्पनी के बाहर एक नोटिस लगा मिला और साथ ही माइक पर उनके नौकरी जाने की घोषणा की जा रही थी।

कारखाने के प्रबंधक मंजूनाथ द्वारा हस्ताक्षर किए गए, नोटिस में लिखा गया है, “कंपनी के प्रबंधन ने 8 जून, 2020 से श्रीरंगपट्टना संयंत्र में श्रमिकों को संयंत्र के हित में और कर्मचारियों के रोजगार को बचाने के लिए बंद करने का फैसला किया है।”

छंटनी का कारण COVID-19 महामारी के परिणाम और कंपनी के विनिर्माण गतिविधि पर इसके प्रभाव के रूप में बताया गया है। नोटिस में आगे लिखा था कि बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों के कारण विदेशी खरीदारों ने अपने ऑर्डर रद्द कर दिए या वापस ले लिए, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी को आगे कोई रोजगार उपलब्ध कराने में असमर्थ है।

 

 

 

कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बातचीत हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। कर्मचारियों की नौकरी बचाने के लिए मजदूर संघ ने भी हस्तक्षेप किया। हालांकि स्थानीय विधायक आर. श्रीकांतय्या ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया. उन्होंने कहा, ‘इस फैक्ट्री में काम करने वाले और आसपास रहने वालों को किस तरह से फायदा हो इस बारे में मैं अधिकारियों से बात करूंगा। इसके अलावा फैक्ट्री के प्रबंधन से भी बात करूंगा।’

बेंगलुरु में गारमेंट्स महिला कर्मिकरा मुन्नड़े (जीएमकेएम) और अल्टरनेटिव लॉ फोरम (एएलएफ) द्वारा तैयार एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, कपड़ा कारखानों के 63 प्रतिशत श्रमिकों को अप्रैल महीने का वेतन नहीं मिला है और बाकी के कर्मचारियों को उनके वेतन का 30-50 प्रतिशत का भुगतान किया गया। इसका मतलब है कि उन्हें सिर्फ तीन हजार से पांच हजार रुपये के बीच भुगतान किया गया है।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...