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चीन के कच्चे माल से बन रहा सेना का बुलेट प्रूफ जैकेट, नीति में बदलाव की मांग

तर्कसंगत

June 22, 2020

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वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सैनिकों का मुक़ाबला करने के लिए तैनात भारतीय सेना के जवान जो बुलेट-प्रूफ़ जैकेट पहनते हैं, उसमें चीन से आयातित उपकरण लगे होते हैं? सच तो यह है कि भारतीय सेना के लिए चीन में बने सामान का इस्तेमाल नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के अनुकूल ही है। सरकार ने ही इस तरह के उपकरण और दूसरी चीजें चीन से खरीदने की अनुमति दे रखी है।

 इंडियन एक्सप्रेस ने एक ख़बर में कहा है कि लेह में अग्रिम पंक्ति पर तैनात सैनिकों के लिए तुरन्त 2 लाख बुलेट प्रूफ़ जैकेट व दूसरे प्रोटेक्टिव उपकरणों की ज़रूरत है। आर्मी के प्रोटेक्टिव गियर बनाने के लिए ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) के पास जो सामान मौजूद है, उनमें से ज्यादातर चीन के कच्चे माल का इस्तेमाल करते हैं। इसमें एक कंपनी है, जिसे 2017 में कॉन्ट्रैक्ट मिला था और वो 1.86 लाख बुलेट-प्रूफ जैकेट डिलीवर करने की स्टेज में है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SMPP प्राइवेट लिमिटेड के साथ 639 करोड़ रुपए के इस कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा करते हुए संसद में कहा था कि आर्मी के लिए जैकेट बनाने के लिए चीन से कच्चे माल के आयात पर कोई बैन नहीं है।

अब हालात बदलने के साथ ही सरकार पर चीनी आयात और उत्पादों के इस्तेमाल को बंद करने का दबाव बढ़ा है नीति आोग के सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत ने इस सिलसिले में दोबारा विचार करने का भरोसा दिया है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस से खास बातचीत में सारस्‍वत ने बताया कि “एक साल पहले हमने चीनी कच्चे माल के आयात को कम करने की कोशिश की। खासकर बुलेटप्रूफ जैकेट जैसे उत्पादों में, क्योंकि चीनी माल क्वालिटी के मामले में काफी संदिग्ध रहा है। हमने उस कंपनी को भी फोन किया, जिसने पास पहले से सेना का कॉन्ट्रैक्ट था और उनसे कहा कि वह आयात किए सभी रॉ मैटेरियल की ठीक से टेस्टिंग सुनिश्चित करें। अब हमें लगता है कि हमें चीन से रक्षा उत्पादों के लिए होने वाले आयात पर फिर से सोचना होगा। हमें टेलिकॉम और प्रोटेक्टिव गियर से जुड़े कूटनीतिक क्षेत्रों में चीन के कच्चे माल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”

शनिवार को PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने चीन के प्रोडक्ट्स छोड़ने के विषय पर रक्षा सचिव को एक पत्र भेजा। PHDCCI, डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन की तरफ से बनाई गई समिति का हिस्सा था। इस पत्र में कहा गया कि बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने के लिए चीन से हाई परफॉर्मेंस पॉलीथाइलीन (HPPE) का आयात किया जाता है। पत्र में उन कदमों का ज़िक्र किया गया, जो चीन के प्रोडक्ट्स से बचने के लिए टेलीकॉम मंत्रालय ने उठाए हैं। पत्र में कहा गया कि हम आपसे अनुरोध करते हैं कि चीन के सामान पर हमारी निर्भरता को कम करने के लिए पॉलिसी बनाई जाए ताकि हमारे सुरक्षाबलों की सुरक्षा से समझौता ना हो।

सेना को बुलेट प्रूफ़ जैकेट की आपूर्ति करने वाली कंपनी एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एस. सी. कंसल ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘हाँ, हम इन उत्पादों के लिए चीन पर निर्भर हैं, पर हम देश की भावनाओं को समझते हुए वैकल्पिक आयात पर विचार कर रहे हैं। हम इसके लिए डीआरडीओ पर निर्भर हैं।’

एक दूसरे सप्लायर स्टार वायर इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक महेंद्र गुप्ता ने भी कहा कि चीन से सामान आयात किया जाता है, पर भारतीय सैनिकों की शहादत को देखते हुए अब यह देखना होगा कि चीन से आयात की कितनी अनुमति है।

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