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LAC पर सेना को खुली छूट, गोला बारूद खरीदने के लिए मिले 500 करोड़

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Image Credits: Zee News/TV Daijiworld

June 22, 2020

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चीन के साथ लगती 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात सशस्त्र बलों को बीजिंग के किसी भी दुस्साहस का ‘‘मुंहतोड़’’ जवाब देने की ‘‘पूरी आजादी’’ दे दी गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ पूर्वी लद्दाख में स्थिति की समीक्षा किए जाने के बाद सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सेना के जमीनी कमांडरों को दुर्लभ मामलों में आग्नेयास्त्रों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी गई है. इससे पहले दोनों देशों की सेनाओं के बीच दशकों से यह समझ चली आ रही थी कि टकराव के दौरान वे आग्नेयास्त्रों की शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगी.

 

क्या थे नियम ?

भारत और चीन के बीच 1996 में हुए एक समझौते में दोनों देशों के सैनिकों के आमने-सामने आने पर फायर आर्म्स (बंदूक, तोप) आदि के प्रयोग पर पाबंदी लगाई गई थी. हालांकि कई सैन्य विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि ये समझौता सामान्य गश्तों के लिए हैं और हिंसक झड़प की स्थिति में इलाके का कमांडर अपने पास उपलब्ध हर तरह के हथियार के प्रयोग की इजाजत दे सकता है. इन नियमों पर काफी भ्रम पैदा हुआ था.

अब हर हथियार की छूट

अब सभी तरह के भ्रम को दूर करते हुए सैनिकों को जरूरत पड़ने पर हर तरह के फॉयर आर्म्स के प्रयोग की मंजूरी दे दी गई है. मामले से संबंधित दो अधिकारियों ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स‘ को ये जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि अब कमांडर्स फायर आर्म्स के प्रयोग पर लगी पाबंदी से बंधे नहीं रहेंगे और असाधारण परिस्थितियों में अपने पास मौजूद हर संसाधन का प्रयोग कर सकेंगे. इनमें बंदूक से लेकर तोप तक शामिल हैं.

सेना को मिले 500 करोड़

वहीं समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच, तीनों रक्षा बलों को महत्वपूर्ण गोला-बारूद और हथियारों के अधिग्रहण के लिए प्रति परियोजना 500 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्तियां दी गई हैं.

रक्षा मंत्री के साथ इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने हिस्सा लिया. सूत्रों ने बताया कि बैठक में रक्षा मंत्री ने पूर्वी लद्दाख तथा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में समूची सुरक्षा स्थिति की समग्र समीक्षा की.

15 जून को पूर्वी लद्दाख स्थित गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुई थे. यह हिंसक झड़प उस समय शुरू हुई जब भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सीमा के अंदर लगाए टेंट को हटाने गए थे.

इसी दौरान चीनी सैनिकों ने पत्थर, कंटीले रॉड और तारों से भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था. पहले से बनाकर रखे गए ये हथियार बेहद घातक सिद्ध हुए थे.

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