पर्यावरण

कोल ब्लॉक के नीलामी के खिलाफ हेमंत सोरेन सरकार गयी सुप्रीम कोर्ट

तर्कसंगत

Image Credits: Nai Dunia/Financial Express

June 23, 2020

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केन्द्र सरकार की कोयला खदानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के फैसले के खिलाफ झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पीएम मोदी ने अपनी सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के हिस्से के रूप में, गुरुवार को वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वाणिज्यिक खनन के लिए 41 कोयला ब्लॉकों की नीलामी शुरू की थी। इनमें से लगभग 22 ब्लॉक झारखंड में हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह ‘पूरी तरह से बिजनेसमैन के झुंड से घिरी हुई है’।  इसलिए उन्होंने राज्य के 22 कोयला ब्लॉकों को नीलामी करने के अपने फैसले को खारिज कर दिया है।

सोरेन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘मोदी सरकार ने राज्य सरकारों को विश्वास में लिए बिना जल्दबाजी में यह निर्णय लिया है।  सरकार पूरी तरह उद्योगपतियों के झुंड से घिरी हुई है। उनकी टिप्पणी शनिवार को तब आई है जब उनकी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें उन ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई, जो राज्य को करीब 90,000 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचा सकती थीं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कमर्शियल माइनिंग के लिए कोयला खदानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू किये जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला राज्य विरोधी है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा कि झारखंड की भावना से केंद्र को पहले ही अवगत करा दिया गया था, लेकिन उस पर कोई विचार नहीं किया गया। अब मजबूर होकर राज्य सरकार ने केंद्र के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य को विश्वास में नहीं लिया है, जो जरूरी था, क्योंकि कोयला क्षेत्र में सबसे बड़ा हित झारखंड का ही जुड़ा है।

झारखंड में खनन को लेकर कई समस्याएं रही हैं। जमीन अधिग्रहण और विस्थापन की भी समस्या रही है। केंद्र को पहले खनन क्षेत्र का सामाजिक और आर्थिक सर्वे कराना चाहिए था, ताकि यह पता चल सके कि खनन क्षेत्र के लोगों को इसका फायदा मिला या नहीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में रैयतों को उनका अधिकार नहीं मिला है, जबकि पहला अधिकार उनका ही है। सीएम ने कहा कि कई साल बाद कोयला खदान आवंटन की नयी प्रक्रिया शुरू की गयी है। हमने जिस व्यवस्था को छोड़ दिया था, एक बार फिर उसी व्यवस्था की ओर लौट रहे हैं।

हेमंत सोरेन ने कहा, ‘कोल ब्लॉक आवंटन में विदेशी निवेश के आने की बात कही जा रही है। कोरोना के कारण पूरी दुनिया में लॉकडाउन है। इस स्थिति में कोल ब्लॉक को बाजार से सही मूल्य नहीं मिलेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि, नीलामी से पहले खनन एरिया में सोशियो इनवायरमेंट असेसमेंट (सामाजिक और पर्यावरण प्रभाव का मूल्यांकण) का होना जरूरी है। जो कि फिलहाल सुनिश्चित नहीं किया गया है।’

झारखंड सरकार 22 कोयला ब्लॉकों को अपनी मंजूरी नहीं देने पर अड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने रविवार को ट्वीट किया था कि मोदी सरकार का निर्णय ‘सह संघवाद की घोर अवहेलना’ करने वाला था।

 

 

हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक इस खनन से झारखंड के चकला खदान के नजदीक 55 प्रतिशत, चोरीटांड तिलैया के 50 प्रतिशत, सेरेगढ़ा का 44 प्रतिशत फॉरेस्ट एरिया खत्म हो जाएंगे।

झारखंड के एडवोकेट जनरल राजीव रंजन ने कहा कि राज्य सरकार ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत में एक रिट याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि जिन कोयला ब्लॉक की नीलामी होनी है उनमें से कुछ झारखंड में हैं। केन्द्र सरकार के कोयला खदानों की नीलामी के इस फैसले से कोरोना काल में राज्य को कोई लाभ नहीं मिलेगा।

रंजन ने कहा कि इससे राज्य को नुकसान होगा क्योंकि बाजार मूल्य नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि नीलमी से पहले एक विशाल जनजातीय आबादी और जंगलों पर प्रतिकूल प्रभाव के जरूरी कोई मूल्यांकन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि निर्णय में सभी पहलुओं को कवर करने के लिए एक विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।

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