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द हिंदू ने पैसे की किल्ल्त का हवाला देते हुए 20 पत्रकारों को नौकरी से निकाला

तर्कसंगत

June 25, 2020

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कोविड-19 महामारी और महीनों के लॉकडाउन का असर देश की अर्थव्यवस्था के साथ विभिन्न वर्गों पर देखने को मिल रहा है और मीडिया भी इससे अछूता नहीं है.

लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ढेरों पत्रकारों के वेतन में कटौती की गई है, कइयों की नौकरी जा चुकी है. इसका नया उदाहरण द हिंदू है, जहां अख़बार के मुंबई ब्यूरो में 20 पत्रकारों को इस्तीफ़ा देने और ब्यूरो की संपादकीय जिम्मेदारियां कम करने को कहा गया है.

142 साल पुराने इस अख़बार का मुंबई संस्करण चर्चगेट इलाके में द हिंदू समूह की एक इमारत में 2015 में दो दर्जन के करीब पत्रकारों के साथ शुरू किया गया था. इनमें अधिकतर मध्यम से वरिष्ठ स्तर के पत्रकार थे, जो मुंबई के साथ-साथ महाराष्ट्र भी कवर करते थे.

22 जून को निकाले जा रहे पत्रकारों को एचआर विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर कहा गया कि उन्हें तीन महीने का वेतन और डीए दिया जाएगा.

 


द हिंदू के पत्रकारों को एचआर विभाग द्वारा भेजा गया पत्र.


 

इससे पहले पिछले हफ्ते मुंबई ब्यूरो के अधिकतर पत्रकारों को मौखिक तौर पर ब्यूरो प्रमुख द्वारा नौकरियां जाने के बारे में बताया गया था और यह सलाह दी गई थी कि वे खुद इस्तीफ़ा दे दें.

एक वरिष्ठ पत्रकार, जिन्हें नौकरी छोड़ने को कहा गया था, ने मीडिया को बताया, ‘लिखित में कोई बात नहीं हुई थी.’ चूंकि कोई आधिकारिक पत्र नहीं दिया गया था, तो बीस में से 14 पत्रकारों ने अपनी नौकरी के बारे में स्पष्टीकरण के लिए प्रबंधन को लिखा था.

उन्होंने लिखा, ‘छंटनी और मुंबई संस्करण के बंद होने की अटकलों के बीच हम आपसे स्पष्टीकरण चाहते हैं. हम सभी के लिए अपनी नौकरियां बचाना बेहद महत्वपूर्ण है. हम सभी को अपने काम पर गर्व है और हमें लगता है कि हमारे मूल्य 140 साल पुराने द हिंदू की ईमानदारी और आदर्शों से मेल खाते हैं.’

इसके बाद सभी पत्रकारों को औपचारिक रूप से टर्मिनेशन लेटर भेज दिए गए, जिसमें उन्हें सेवा समाप्त होने पर मिलने वाले लाभों का नुकसान न हो, इसलिए इस्तीफ़ा देने का विकल्प दिया गया.

पत्रकारों के प्रबंधन को भेजने के फौरन बाद प्रेस काउंसिल ने इस बारे में स्वतः संज्ञान लेते हुए हस्तक्षेप किया और अचानक कर्मचारियों को निकालने के इस फैसले के बारे में संपादकों से जवाब मांगा.

लाइव लॉ के मुताबिक पीसीआई के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सीके प्रसाद ने द हिंदू के मुंबई ब्यूरो में काम कर रहे भारी संख्या में पत्रकारों को अपने पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहने पर चिंता जतायी है.

परिषद की विज्ञप्ति में कहा गया है,“हमें पता चला है कि अख़बार का प्रबंधन औद्योगिक विवाद क़ानून, 1947 के तहत उन नियमों और शर्तों का पालन नहीं कर रहा है जिसके तहत उनकी नियुक्ति की गई है और इसके तहत उनकी शिकायतों का निपटारा नहीं कर रहा है जिसकी वजह से इनकी शिकायतों का समुचित निदान नहीं हो रहा है”.

बीते तीन महीनों में इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा अपने विभिन्न ब्यूरो में खूब छंटनी की गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी अपने कई संस्करण बंद किए हैं.

महाराष्ट्र के सकाल टाइम्स ने अपने प्रिंट एडिशन को बंद करते हुए 50 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला. इसी तरह द टेलीग्राफ ने भी इसके दो ब्यूरो बंद किए और करीब पचास कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने को कहा.

इसके अलावा हिंदुस्तान टाइम्स मीडिया समूह ने भी डेढ़ सौ के करीब कर्मचारियों को काम से निकाला था. डिजिटल मीडिया संस्थान द क्विंट ने इसके कई कर्मचारियों को अवैतनिक अवकाश पर भेज दिया है.

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