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बिहार में गंगा नदी पर बनने वाले मेगा ब्रिज प्रोजेक्ट में चीनी पार्टनर ना बदलने पर दो ठेकेदारों के टेंडर कैंसिल

तर्कसंगत

Image Credits: News18/Dainik Bbhaskar

June 29, 2020

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भारत-चीन विवाद के बीच बिहार में गंगा नदी पर बनने वाले एक मेगा ब्रिज प्रोजेक्ट के टेंडर को रद्द कर दिया है। प्रॉजेक्ट के लिए चुने गए चार कॉन्ट्रैक्टर में दो पार्टनर चाइनीज थे। इस मेगा ब्रिज का निर्माण पटना में गंगा नदी पर महात्मा गांधी सेतु के पास होना था।

ब्रिज का टेंडर रद्द किए जाने की जानकारी देते हुए  बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा कि महात्मा गांधी सेतु के साथ बनने जा रहे नए ब्रिज के लिए चुने गए 4 कॉन्ट्रैक्टर्स में दो पार्टनर चाइनीज थे। हमने उन्हें पार्टनर बदलने को कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसलिए हमने टेंडर को रद्द कर दिया है। ब्रिज के निर्माण के लिए दोबारा आवेदन मंगवाए हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सेतु के सामानांतर बनने वाला ये ब्रिज बेहद अहम है। यदि इस प्रोजेक्ट में विदेशी कंपनियों की भागीदारी बढ़ जाएगी तो ये देश और राज्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

 

जनवरी, 2023 में पूरा किया जाना था प्रोजेक्ट 

इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 29सौ करोड़ रुपये से ज्यादा थी जिसमें 14.500 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में गांधी सेतु के समानांतर 5.6 किलोमीटर लंबा पुल बनाना शामिल था। इसके अलावा 4 अंडरपास, एक रेल ओवर ब्रिज, 1580 मीटर लंबा पुल, 4 छोटे पुल, 5 बस शेल्टर और 13 रोड जंक्शन बनाए जाने थे। प्रोजेक्ट के लिए निर्माण की अवधि साढ़े तीन साल थी और इसे जनवरी, 2023 तक पूरा होना था। इस प्रोजेक्ट को रद्द करने का निर्णय 15 जून को पूर्वी लद्दाख की गैलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की हत्या की पृष्ठभूमि में आया है।

 

 

प्रोजेक्ट के लिए फिर से एप्लीकेशन मंगाई जाएगी

राज्य के सड़क निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा- जिन कॉन्ट्रैक्टर का चयन पुल निर्माण के लिए किया गया था, उनके साझेदार चाइनीज हैं। हमने उन लोगों से कहा था कि अपने पार्टनर बदल दो, लेकिन वे इस बात पर राजी नहीं हुए। हमने उनके टेंडर कैंसिल कर दिए हैं। हमने फिर से एप्लीकेशन मांगी है। इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने वालों में चीन की हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी और शांक्सी रोड ब्रिज कंपनी शामिल थीं। पिछले साल इस प्रोजेक्ट को आर्थिक मामलों की समिति ने मंजूरी दी थी।

 

महाराष्ट्र सरकार ने भी चीनी कंपनी से हुआ एमओयू रोका

इसी हफ्ते महाराष्ट्र सरकार ने चीनी कंपनी के साथ हुए 5 हजार 20 करोड़ के मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर रोक लगा दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से अपील की थी कि चीन के बहिष्कार से जुड़े अभियान के संदर्भ में वह अपनी नीतियां स्पष्ट करे। यह एमओयू चीन के हेंगली ग्रुप, ग्रेट वाल मोटर्स और पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशन के साथ किया गया था।

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