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लॉकडाउन में खिलाते है हर दिन 150 से भी ज़्यादा जानवरों को खाना, खुद करते है पार्ट टाइम नौकरी!

Sonali

July 9, 2020

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किसी को करुणा सिखायी जा सकती है लेकिन उसे दयावान नहीं बनाया जा सकता!

20 वर्षीय साईं के लिए यह बात कहना गलत नहीं होगा। जिस उम्र में ज़्यादातर लोग अपनी ज़िंदगी और करियर को ले के उलझे रहते है, वही साईं बेज़ुबानों की ज़िंदगी, उनकी भलाई और अधिकार के लिए लगातार लड़ कर रहे है।

 

चेन्नई बाढ़ ने किया प्रेरित

तमिलनाडु के रहने वाले साईं विग्नेश ने अपना यह सफ़र 2015 में शुरू किया था। वैसे तो जानवरों से प्यार उन्हें बचपन से ही था, लेकिन 2015 की चेन्नई बाढ़ ने उन्हें एहसास दिलाया कि सिर्फ़ प्यार काफ़ी नहीं होता — उन्हें बहुत कुछ करना था।

“मैं यूँ बैठ नहीं सकता था, मुझे कुछ करना ही था उनके लिए!” उस हादसे को याद करते हुए साईं कहते है, “मेरा परिवार बचपन से ही मेरी प्रेरणा रहा है, जानवरों के प्रति प्यार और ममता शायद उनसे विरासत में मिली है! उस बाढ़ हादसे में मैंने बहुत सारे जानवरों को पीड़ित देखा — अपने परिवार की मदद और क्षमतानुसार काफ़ी बेज़ुबानों की जान बचायी और इलाज़ कराया और बस, उसके बाद मैंने रुकने का सोचा ही नहीं!”

“मैं जितने भी जानवरों की सहायता कर पाता, करता था और धीरे-धीरे आस पास के लोगों ने भी मुझे रेस्क्यू के लिए संपर्क करना शुरू कर दिया — कुछ लोग मेरी आर्थिक रूप से भी सहायता करने लगे।”

 

 

दो साल बिता खानाबदोशों सा 

तकरीबन 2017-19 के बीच साईं को अपने परिवार के साथ 7 से 8 घर बदलने पड़े थे। वज़ह थी उनके घर में 70-80 कुत्तों का रहना! इतने जानवरों के कारण मकान मालिक और पड़ोसी काफ़ी आपत्ति जताते — और क्योंकि साईं के पास और कोई जगह थी नहीं, इसलिए वे जानवरों को अपने घर ही रखते — नतीजतन उन्हें कई बार घर बदलने पड़े।

कई बार तो पड़ोसी ज़हरीली गोलियाँ उनके घर फेंकते ताकि जानवरों की मौत हो जाए। निराश होकर साईं ने पुलिस में भी शिकायत की लेकिन उन्हें जल्द ही यह एहसास हुआ कि उन्हें जानवरों के रहने लिए एक अलग जगह बनानी होगी ताकि सभी लोग शांति से रह सकें।

 

 

और तब जा कर उन्होंने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट, ‘ऑलमाइटी एनिमल सैंक्चुअरी’, पर काम करना शुरू किया। 2019 में उनके पिता के एक दोस्त, शिवमणि जी, ने अपनी ज़मीन दान में दे दी जिस पर सैंक्चुअरी बनाया जा सके। चेन्नई से 30 किलोमीटर दूर स्थित इस ज़मीन के मालिक भी एक पशु कार्यकर्ता ही है। साईं ने ऑनलाइन और अपने परिचितों के जरिये सैंक्चुअरी निर्माण हेतु फंड इकट्ठा करने शुरू किये और साथ ही अपना पुश्तैनी घर भी बेच दिया ताकि उन पैसों से निर्माण कार्य पूरा हो सके।

 

अब तक कर चुके है 700 से भी ज़्यादा जानवरों का भला!

परेशानियाँ तो बहुत आयी लेकिन साईं ने कभी हार नहीं मानी। पिछले पाँच सालों में उन्होंने अब तक 400 से भी ज़्यादा जानवरों को बचाया, उनके इलाज़ और देखभाल के साथ-साथ उनकी सारी ज़िम्मेदारियाँ भी उठायी और उनके ठीक हो जाने के बाद उन्हें वापस भेज दिया। इसके साथ ही उन्होंने 250 से ज़्यादा कुत्ते के बच्चों और बिल्ली के बच्चों को गोद लेने में मदद की।

अब तक वे बिल्लियों, कुत्तों, गायों के लिए एक-एक सेक्शन और चिकित्सा औषधालय (डिस्पेंसरी) बनाने में सक्षम रहे है। इसके साथ ही वे चिकित्सा औषधालय कार्यक्रम चलाते है जिसके तहत नियमित रूप से हर सप्ताहांत जानवरों का मुफ्त में जाँच और वैक्सीन कराया जाता है।

 

 

साईं की एक दोस्त, अनु विद्या, जो कि एक पशु कार्यकर्ता थी, की 2018 में मौत हो गयी। उनकी याद को बरक़रार रखने और सपने को पूरा करने के लिए उनके माता पिता ने भी अपना सहयोग दिया जिससे साईं ने कुत्तों के लिए एक अलग सेक्शन बनाया। साईं के पिता भी हर महीने अपनी सैलरी का एक-चौथाई हिस्सा इस नेक काम में देते है। साईं वेब डेवलपर की पार्ट टाइम नौकरी कर बाकि ख़र्चा उठाते है। इसके अलावा कभी-कभी उन्हें डोनेशन भी मिल जाता है।

वर्तमान में उनके यहाँ अभी भी 35 कुत्ते है जिनमे कुछ लकवाग्रस्त, कुछ विकलांग हैं और 12 गायें है जिन्हे अवैध बूचड़खाने से बचाया गया हैं। इन सब की देखभाल, खान-पान, रखवालों की सैलरी, बिजली बिल सब मिला कर तकरीबन पचास-साठ हज़ार रूपये का मासिक ख़र्च उठता है जिन्हे साईं अपनी पार्ट-टाइम जॉब और डोनेशन के माध्यम से पूरा करते है।

उनकी इच्छा और अधिक जानवरों को बचाने और उनका इलाज़ करने की है।

 

 

लोगों के बीच जगायी जागरूकता 

इन सबके अलावा साईं जानवरों के प्रति प्रेम और जागरूकता बढ़ाने का भी निरंतर प्रयास करते है। साल 2018 में उन्होंने ‘वाटर बाउल इनिशिएटिव’ शुरू किया — जिसका उद्देश्य भीषण गर्मी में जानवरों को पानी की कमी ना होने देना है — इसके तहत वे अब तक लोगों में 1000 से अधिक कटोरे वितरित कर चुके है। पिछले साल उन्होंने कुछ पुलिस अफ़सरों की मदद से तमिल नाडु के 230 अग्निशमन केंद्र, चेन्नई के 50 पुलिस स्टेशनों और 50 रेलवे पुलिस स्टेशनों में भी पानी के कटोरे रखे थे। उनका अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जानवर प्यासा न रहे।

लॉकडाउन की स्थिति को ले कर साईं कहते है, “लॉकडाउन के कारण नियमित योगदानकर्ताओ ने भी डोनेट करना बंद कर दिया है जिसके कारण हमें संचालन करने में भी तकलीफ़ हो रही थी। उसके ऊपर से होटल और रेस्टोरेंट बंद होने के कारण जानवरों को पर्याप्त खाना नहीं मिल पा रहा था। लेकिन मैंने हार नहीं मानी और ‘फीडिंग इनिशिएटिव’ शुरू किया जिसके तहत हम रोज़ 150-200 जानवरों को रात में खाना खिलाते है।”

 

जानवरों के अधिकार के लिए कानून पढ़ना चाहते है

“2019 में एक दिमागी रोगी ने 5 कुत्ते के बच्चों का रेप किया। 2018 में एक राजनेता ने 50 कुत्तों को ज़हर खिला कर मार दिया। एक औरत ने एक कुत्ते को बेरहमी से मार कर नाले में फेंक दिया। आख़िर क्यों? उन बेज़ुबानों का क्या दोष रहा होगा?” अपनी हाई स्कूल पूरी कर चुके साईं अब अगले साल लॉ में दाख़िला लेने की तैयारी कर रहे है। “मुझे लगता है लॉ की पढ़ाई मुझे जानवरों के हक़ में लड़ने के लिए और मददगार साबित होगी,” साईं ने अब तक 10 से ज़्यादा FIR किये है जिनमे से एक राजनेता और एक ग्राम पंचायत के ख़िलाफ़ है और मद्रास हाई कोर्ट में 2 केस फाइल की है जिनमे से एक केस ग्रेटर चेन्नई कार्पोरेशन के ख़िलाफ़ है।

साईं की यह लड़ाई लंबी और कठिन है। सच बताएँ तो अपनी ज़िंदगी किसी और के लिए समर्पित कर देना आसान नहीं लेकिन साईं इसे काफ़ी बेहतर तरीके से कर रहे है। हम कुछ और नहीं तो कम से कम आर्थिक तरीके से उनकी मदद ज़रूर कर सकते हैं। इनसे न केवल उनका हौसला बढ़ेगा बल्कि साईं जैसे कई और युवाओं को समाज की भलाई करने के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

 

आप साईं से उनके फ़ेसबुक पेज या इस ईमेल आईडी द्वारा संपर्क कर सकते है। उनकी आर्थिक रूप से मदद करने के लिए, कृपया निम्नलिखित विवरण देखें।

Name of NGO — Almighty Animal Care Trust

Facebook — www.facebook.com/almightyanimalcaretrust

Sai Vignesh — www.facebook.com/sai.vignesh.5

Contact # in case of any rescues in Chennai/ Tiruvallur — 89393 20846/ [email protected] & [email protected]

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