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वीडियो देखिये, पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में दो दिन से कोरोना शव के बीच इलाज को तरसते लोग

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Image Credits: Dainik Bhaskar/SanjiveSingh/Twitter

July 10, 2020

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें बिहार के एक अस्पताल के हालातों के बारे में बताया गया है. वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट रूप से यह दिख रहा है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच दो शव पड़े हुए हैं. इस वीडियो को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट किया है. यह वीडियो कोरोना मरीजों के लिए विशेष रूप से तैयार बिहार सरकार के एक मात्र अस्पताल नालंदा मेडिकल कॉलेज (NMCH) का है.

वीडियो बनाया है एक कोरोना पॉजिटिव मरीज़ के अटेंडेंट मणि भूषण ने. वीडियो में मणि दिखा रहे हैं कि वॉर्ड में दो डेड बॉडीज़ रखी हुई हैं. उनका पल्स मीटर और बाक़ी मशीनें ऑन हैं. वीडियो में अस्पताल प्रशासन पर ये आरोप लगाया गया कि दो दिन से ये शव यहां वॉर्ड में पड़े हुए हैं. न इन्हें यहां से हटाया गया, न ही कोई स्टाफ़ भीतर आता है.

 

 

ट्विटर पर वीडियो वायरल होने के बाद बिहार में विपक्ष नेता तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘बिहार की भयावह स्थिति देखिए. कोरोना वार्ड में 2 दिन से मृत मरीज़ों के शव रखे है. स्वस्थ मरीज़ बगल वाले बेड पर लेटे है. कोई डॉक्टर, नर्स और कर्मी नहीं है. परिजन देखभाल कर रहे है। डॉक्टर, नर्स और वेंटिलेटर मुख्यमंत्री आवास भेज दिए गए है चूँकि वहाँ भी 60 कोरोना पॉज़िटिव केस है.’

 

अस्पताल अधीक्षक ने मीडिया को बताया कि किसी भी संक्रमित मरीज की मौत के बाद एक लंबी प्रक्रिया पूरी करनी होती है. शव को सेनेटाइज करना होता है. इसके बाद प्रशासन और मृतक के परिवार को सूचित किया जाता है. इस स्थिति में कुछ समय लग जाता है. सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है. यहाँ तक की बॉडी के साथ लगे तमाम मेडिकल उपकरणों को PPE किट पहन कर ही हटाया जा सकता है.

 

 

युवक ने लल्लनटॉप से बातचीत में बताया कि वीडियो बनाने के बाद जब ये वायरल होने लगा तब 8 जुलाई की रात को 9 बजे एक बॉडी और रात 11 बजे दूसरी बॉडी हटाई गई. वीडियो में डेड बॉडी पर लगी सभी मशीनें ऑन थीं. उन्हें बंद करने तक कोई नहीं आया.

डेड बॉडी के साथ रहने पर कोरोना होगा कि नहीं ये तो नहीं मालूम. लेकिन एक मरीज़ कैसा अनुभव करता होगा, जब उसके ठीक बगल में दिन-रात उसी बीमारी से मरे हुए व्यक्ति की लाश रखी है, जिस बीमारी की वजह से वो अस्पताल आया है. कह रहे हैं कि कोरोना में मानसिक ताक़त ही सबसे ज़रूरी है. लेकिन अस्पताल के लोगों को क्या इतना भी नहीं मालूम कि एक स्वस्थ आदमी जब लाशों के बीच रह रहा हो, तो ठीक होने की ताक़त कहां से लाएगा?

 

 

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