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वंदे भारत एक्सप्रेस के टेंडर में रेल कंपनियों ने हिस्सा नहीं लिया, विदेशी कंपनियों में केवल एक चीनी कंपनी

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Image Credits: NDTV

July 13, 2020

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भारतीय रेलवे ने वंदे भारत ट्रेन के 44 सेट तैयार करने के लिए शुक्रवार को टेंडर खोला. जिसमें कुल 6 कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है.इसमें चीनी सरकार के स्वामित्व वाली सीआरआरसी कॉरपोरेशन कंपनी भी शामिल है. यह इसमें हिस्‍सा लेने वाली इकलौती विदेशी कंपनी है. भारतीय रेलवे ने वंदे भारत ट्रेन के 44 सेट तैयार करने का लक्ष्य 2023 तक रखा है.

अधिकारियों ने बीते शुक्रवार को बताया कि इसके लिए कुल छह कंपनियों ने अपनी बोलियां जमा कराई हैं.

खास बात ये है कि यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध चल रहा है और चीनी सैनिकों द्वारा हमला करने के कारण भारत के 20 जवान पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में शहीद हुए थे.

भारतीय रेल ने यह निविदा 44 वंदेभारत ट्रेन की विद्युत कर्षण किट (इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन किट्स) या संचालक शक्ति सिस्टम (प्रोपल्शन सिस्टम) की खरीद के लिए जारी की थी.

लाइव मिंट के अनुसार वंदे भारत ट्रेन सेट टेंडर के लिए सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भारत इंडस्ट्रीज, इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, मेधा सर्वो ड्राइव्स प्राइवेट लिमिटेड, CRRC Pioneer इलेक्ट्रिक कंपनी लिमिटेड और पावरनेटिक्स इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने आवेदन किया है.

सीआरआरसी ने गुरुग्राम की सीआरआरसी पॉयनियर इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के जरिये बोली लगाई है. यह चीन की सरकार के स्वामित्व वाली सीआरआरसी कॉरपोरेशन लिमिटेड का संयुक्त उद्यम है.

वहीं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने सरकार से मांग की है कि इस निविदा में चीनी कंपनी सीआरआरसी को भाग नहीं लेने दिया जाए. कैट ने शनिवार को इस बारे में रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है.

उल्लेखनीय बात यह है कि ट्रेन निर्माण करने वाली प्रमुख कंपनी बॉम्बारडियर, एल्स्टॉम, सीमेंस, सीएएफ, टैल्गो और मित्शुबिशी ने इस निविदा में हिस्सा नहीं लिया.

इससे पहले सीमा गतिरोध के बाद भारतीय रेल ने 417 किमी लंबी कानपुर-दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) के लिए चीनी कंपनी को दिए गए 417 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया था.

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