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वीडियो देखिये, अस्पताल ने नौकरी छोड़ने से मना किया, बिना नोटिस व्हाट्स ऐप से चिट्ठी भेज 84 नर्सों को नौकरी से निकाला

तर्कसंगत

Image Credits: himsr/ashlinpmathew/twitter

July 14, 2020

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जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी के अंदर बने एचएएचसी अस्पताल ने अपने 84 कॉन्ट्रैक्ट नर्सों को बिना किसी पूर्व नोटिस के हटा दिया है। नर्सों को यह जानकारी उनके ऑफिस के व्हाट्सएप ग्रुप पर तब दी गई जब वे उसी समय कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहीं थीं। हटाई गईं नर्सों में ऐसी नर्स भी शामिल है जो इसी अस्पताल में कोरोना पीड़ित मरीजों की देखभाल के दौरान सक्रमित हो गई थी। आरोप है कि अस्पताल ने अपनी इस नर्स का कोरोना टेस्ट तक नहीं कराया। इस समय वह अपने घर पर होम क्वांरटीन में रहकर कोरोना से लड़ाई लड़ रही है.

बिना किसी चेतावनी के 84 नर्सों को नौकरी से निकाले जाने पर सोमवार को नर्सों ने अस्पताल परिसर के अंदर धरना दिया।

 

 

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार धरने पर बैठे नर्सों ने अपनी मांग को करखते हुए कहा “हम पिछले कुछ समय से अपने कुछ मुद्दों को उजागर कर रहे थे। इसमें अच्छी गुणवत्ता वाले पीपीई किट, एन 95 मास्क, सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था और हमें कुछ भत्ता का वितरण जैसे मांग शामिल थे। हमने अपनी इन बुनियादी मांगों को पूरा करने के लिए एमएस को कई बार सूचित किया, लेकिन किसी ने कभी भी बहुत अधिक भुगतान नहीं किया। बल्कि, प्रशासन ने हम पर चिल्लाया और हमें छोड़ने के लिए कहा। उनके द्वारा प्रयोग की जाने वाली भाषा अपमानजनक थी और उनका व्यवहार कुल मिलाकर कठोर था।”

 

HAHC अस्पताल प्रशासन से जारी टर्मिनेशन लेटर

 

हटाए गयी नर्सों में एक अन्य नर्स इस समय मैटर्निटी लीव पर चल रही हैं। अस्पताल ने उन्हें भी बिना किसी पूर्व सूचना के हटा दिया है। नर्सों को हटाने के पहले न्यूनतम एक माह का समय दिया जाना चाहिए था, लेकिन इस मामले में ऐसी कोई नोटिस नहीं दिया गया। दिल्ली सरकार ने इस अस्पताल को कोविड अस्पताल घोषित कर रखा है। इस समय यहां कोविड मरीजों के लिए 200 बेड्स की व्यवस्था है।

सबसे आश्चर्य की बात है कि यह अस्पताल हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एचआईएमएसआर) के अंतर्गत आता है। एचआईएमएसआर के डीन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि वह इस समय स्वास्थ्यकर्मियों के इस्तीफे को स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन दो दिन पहले शनिवार 11 जुलाई को व्हाट्सएप पर यह संदेश दे दिया गया कि अब उनकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं।

 

When asked for facilities is this the way a management should Respond ? Around 84 Nursing officers are being Terminated from services from Hakeem Abdul Hameed Centenary Hospital Delhi.They have done a mistake as per the Nursing officers that they have asked for Basic facilities such as Drinking water ,PPE kits and N 95 masks.Even though there is Direction from the central government that Complete salary should be given for the Health care workers during the Covid -19 pandemic how can a hospital or its management can Hold the salaries of these Nursing officers.We demand an immediate restoration of These Nursing officers who are being terminated from services and provide them with adequate facilities including PPE kit and water.To all our citizens and Government,you all have made us Corona Warriors ,we accept the fact and are ready to work for our country and its citizens.But when such incidents happen with our corona warriors ,calling them warriors may not be sufficient but we have to give them support and helping hands.#justiceforNurses#restorecoronawarriors#justiceforHahcnursingofficers

Posted by Vipin Krishnan on Monday, 13 July 2020

 

इस संबंध में इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन ने अस्पंताल प्रशासन को लिखे पत्र में कहा आपके अस्पताल से 84 अस्थाई स्वास्थ्यकर्मियों को बिना उचित नोटिस अवधि के निकालना बिल्कुल निंदनीय है। आपको वैध कारण बताते हुए यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि इस तरह की स्थिति में कोरोना वायरस से निपटने में फ्रंटलाइन वर्कर्स के तौर पर काम कर रही इन नर्सों को  नौकरी से क्यों निकाला गया। ऐसे समय में स्वास्थ्यकर्मियों को काम से न निकालने के सरकार के आदेश के बावजूद आपने इस तरह का फैसला क्यों लिया।’

 

 

पत्र में आगे कहा गया, ‘हम नर्सों को नौकरी से हटाने के अस्पाल की ओर से जारी किए गए आदेश के तर्क को समझ नहीं पा रहे हैं। वॉक-इन-इंटव्यू के जरिये इन पदों पर दोबारा नियुक्ति होगी और जिन नर्सों को निकाला जा चुका है, वे भी इसमें हिस्सा ले सकती है, यह समझ से परे है। इस समय यह फैसला अनावश्यक तौर पर लिया गया है, इसे वापस लिया जाना चाहिए। जो नर्सें काम करती आ रही थीं, उन्हें नौकरी से हटाकर इन पदों पर तुरंत भर्तियां करना क्यों जरूरी है, वह भी ऐसे समय में जब सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर नियम कायदे बने हुए हैं. हमें जवाब चाहिए।’

मीडिया से बात करते हुए दिल्ली नर्सेस फेडरेशन के अध्यक्ष एलडी रामचंद्रन ने बताया कि एसआई स्टैण्डर्ड के मुताबिक आईसीयू में प्रति मरीज की देखभाल के लिए एक नर्स होनी चाहिए। सामान्य मरीजों की देखभाल के लिए एक नर्स को 6 मरीजों की देखभाल करनी चाहिए। सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में एक नर्स को चार मरीजों को देखना चाहिए।

इसके आलावा 45 फीसदी नर्स स्टाफ को अतिरिक्त रखना चाहिए जिससे सभी नर्सों को उनकी सुविधा के अनुसार छुट्टी दिया जा सके। लेकिन किसी भी राज्य या केंद्र सरकार के तहत इन मानकों के आधार पर नर्सों की नियुक्ति नहीं की जाती जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।

 

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