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बिहार: जानिए क्यों रेप पीड़िता और उसके दो सहयोगियों को ही कोर्ट ने हिरासत में भेज दिया

तर्कसंगत

Image Credits: News Nation

July 15, 2020

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बिहार के अररिया में एक गैंगरेप की सर्वाइवर को ही जेल भेज दिया गया है. रेप सर्वाइवर और उनके दो सहयोगियों पर कोर्ट की अवमानना का आरोप लगा है. न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने पहुंची गैंगरेप पीड़िता और उसका सहयोग कर रहे दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कोर्ट की अवमानना के आरोप में गिरफ्तार किया है.

मामला है क्या ?

बिहार के अररिया की 22 वर्षीय युवती का उसके ही जान पहचान के युवक ने अपने दोस्तों के साथ सामूहिक बलात्कार किया. पीड़िता द्वारा दर्ज़ एफाईआर के मुताबिक मोटरसाइकिल सिखाने के बहाने उनको एक परिचित लड़के ने बुलाया. पीड़िता ने बताया है कि एक स्कूल के मैदान में आधे घंटे तक उसने बाइक चलाना सिखाया और इसके बाद उसने साहिल से कहा कि देर हो गई है इसलिए वह उसे घर छोड़ आए, लेकिन वह उसे घर ले जाने की जगह नहर के पास सुनसान सड़क पर ले गया. वहीं मोटरसाइकिल पर सवार होकर तीन अज्ञात लोग आए और उसे अगवा कर सुनसान जंगल में ले गए जहां एक और आदमी शामिल हो गया और चारों ने मिलकर उससे बलात्कार किया.

एफ़आईआर के मुताबिक़ रेप सर्वाइवर ने अपने परिचित से मदद मांगी, लेकिन वो वहाँ से भाग गया.

इसके बाद पीड़िता अररिया में काम करने वाले जन जागरण शक्ति संगठन (जेजेएसएस) के सदस्यों की मदद से अपने घर पहुँची.  घर पहुंची मगर घर पर भी असहज महसूस करने के बाद, वो संगठन के सदस्यों के साथ रहने लगी. 7 और 8 जुलाई को उनकी मेडिकल जाँच हुई. उनकी मदद करने वाली दोनों सामाजिक कार्यकर्ता कल्याणी बरौला व तन्मय निवेदिता उर्फ तनवी नायक जन जागरण शक्ति संगठन से जुड़े हुए हैं. वे गैंगरेप पीड़िता की मदद कर रहे हैं.

 

कोर्ट में क्या हुआ ?

टेलिग्राफ के मुताबिक 10 जुलाई को बयान दर्ज कराने के लिए रेप सर्वाइवर को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में ले जाया गया. वहां पर 4 घंटे इंतज़ार करने के बाद पीड़िता का ब्यान दर्ज़ किया गया. पीड़िता के साथ उस वक़्त जागरण शक्ति संगठन के सहयोगी मौजूद नहीं थे. धारा 164 के तहत जब बयान दर्ज होता है, तो कोई और कोर्ट रूम में नहीं जा सकता है.

बाहर आने के बाद प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़, “बयान के बाद जब उसे न्यायिक दंडाधिकारी ने बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा, तो वो उत्तेजित हो गई. उन्होंने उत्तेजना में कहा कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है. आप क्या पढ़ रहे है, मेरी कल्याणी दीदी को बुलाइए.”

कल्याणी और तन्मय निवेदिता जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता हैं.

“बाद में, केस की जाँच अधिकारी को बुलाया गया, तब रेप सर्वावइवर ने बयान पर हस्ताक्षर किए. बाहर आकर रेप सर्वावइवर ने जेजेएसएस के दो सहयोगियों तन्मय निवेदिता और कल्याणी बडोला से तेज़ आवाज़ में पूछा कि ‘तब आप लोग कहाँ थे, जब मुझे आपकी ज़रूरत थी.”

आशीष रंजन ने द वायर को बताया, ‘कोर्ट रूम में हम लोग नहीं थे, लेकिन महिला ने कोर्ट से बाहर आकर हमें बताया कि उसने ये कहकर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया कि वह समझ नहीं पा रही है कि लिखित बयान में क्या कहा गया है, इसलिए कल्याणी को बुलाया जाए.’

बाहर से आ रही तेज़ आवाजों के बीच ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने कल्याणी को अंदर बुलाया. कल्याणी ने रेप सर्वावइवर का बयान पढ़कर सुनाए जाने की मांग की. जिसके बाद वहाँ हालात तल्ख होते चले गए. तकरीबन शाम 5 बजे कल्याणी, तन्मय और रेप सर्वाइवर को हिरासत में लिया गया और 11 जुलाई को जेल भेज दिया गया.

स्थानीय अखबार दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट में लिखा है, ” न्यायालय के पेशकार राजीव रंजन सिन्हा ने दुष्कर्म पीड़िता सहित दो अन्य महिलाओं के विरुद्ध महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि पीड़िता ने बयान देकर फिर उसी पर अपनी आपत्ति जताई.”

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, कल्याणी और तन्मय कोर्ट रूम में घुस गए और न्यायिक मजिस्ट्रेट से लिखित बयान की कॉपी जबरन ले ली और मजिस्ट्रेट से कहा कि पीड़िता का बयान उनकी मौजूदगी में दोबारा लिया जाए.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि किसी के समक्ष बयान लेने का नियम नहीं है, तो दोनों न्यायिक मजिस्ट्रेट के साथ अमर्यादित व्यवहार और गाली-गलौज करने लगे.’ रिपोर्ट में लिखा है कि, “न्यायालय में बयान की कॉपी भी छीनने का प्रयास किया गया. न्यायालय में इस तरह की अभद्रता से आक्रोशित न्यायिक दंडाधिकारी ने तीनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है.”

 

जन जागरण शक्ति संगठन का विरोध

स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार उनकी गिरफ्तारी का विरोध करने वाले एक बयान में, जन जागरण शक्ति संगठन ने कहा कि बलात्कार के मामले में न केवल बलात्कार के आघात के कारण, बल्कि अदालत के अलावा बार बार उसके उसका बयान लेने के कारण पीड़िता काफी उत्तेजित अवस्था में थी, संगठन के सदस्यों के अनुसार घटना के बाद से चार दिनों में पुलिस की जांच के दौरान भी उसे कई बार अपने ब्यान को दोहराना पड़ा था. उसे अपने परिवार का भी साथ नहीं था और साथ ही साथ मानसिक रोग विशेषज्ञ तक भी कोई  पहुंच नहीं थी, और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों मीडिया ने पीड़िता की पूरी पहचान उजागर कर दी जिसमें उनका नाम, उनके पिता का नाम और उनका पता बताया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्हें यह जानकारी कोर्ट स्टाफ से मिली है.

आशीष रंजन ने कोर्ट की इस कार्रवाई पर हैरानी जताते हुए कहा कि एक गैंगरेप पीड़ित न्यायालय में न्याय के लिए गई है, उस पर कोर्ट खफा हो जाता है और जो सामाजिक कार्यकर्ता उनकी मदद कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई हो जाती है.

 

रिहाई की मांग

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महिला थाने की एसएचओ रीता कुमारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत खराब है, थाने से जानकारी ली जाए. जिले की एसपी डीएस सावलाराम ने कहा कि तीनों की गिरफ्तारी कोर्ट के आवेदन पर हुई है, इसलिए वह कुछ नहीं कहेंगी. पीड़िता ही जेल में है, तो जांच कैसे होगी, इस सवाल उन्होंने कहा, ‘जांच अधिकारी इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया को अपनाते हुए जांच करेंगे.’

इस मसले पर बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने द वायर से कहा, ‘गैंगरेप पीड़िता को ही गिरफ्तार कर लेना हैरान करने वाली बात है. मैं मामले में संज्ञान लेते हुए अररिया प्रशासन को नोटिस देकर घटना की पूरी जानकारी ले रही हूं और प्रशासन का जवाब आने पर अग्रेत्तर कार्रवाई की जाएगी.

जन जागरण शक्ति संगठन ने जेल में कोविद -19 के जोखिम के कारण रेप सर्वाइवर और कल्याणी बडोला, तन्मय निवेदिता को “मानवीय आधार” पर तत्काल रिहा करने की मांग की है.

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