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असम क्वारंटाइन सेंटर से 100 मरीज ने भाग कर किया हाईवे जाम, मंत्री बोले सुविधा चाहिए तो होम क्वारंटाइन में जायें

तर्कसंगत

Image Credits: Deccan Herald/Amar Ujala

July 17, 2020

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देश में कोरोना संक्रमण भयावह स्थिति में पहुंच गया है. भारत में 10 लाख से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आ चुके है. पूर्वोत्तर में असम में हालात गंभीर बने हुए. पूर्वोत्तर भारत में असम सबसे बड़ा कोरोना हॉटस्पॉट है. असम में 20 हज़ार से ज्यादा लोग कोविड पॉजिटिव पाए जा चुके है. राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य संबंधि सुविधाओं की पोल खुलती नज़र आ रही है. गुरुवार को करीब 100 कोविड मरीजों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर जमकर प्रदर्शन किया.

द हिन्दू के रिपोर्ट के अनुसार असम में कोरोना वायरस के लगभग 100 मरीज एक कोविड देखभाल केंद्र से भाग गए और नेशनल हाईवे पर जाकर जाम लगा दिया। इन मरीजों ने केंद्र में खराब व्यवस्था होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें उचित खाना और पानी नहीं दिया जा रहा है। शीर्ष अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर उन्हें समझाया जिसके बाद वे वापस केंद्र पहुंचे। उन्हें केंद्र पर व्यवस्था ठीक करने का आश्वासन दिया गया है।

मामला असम के कामरूप जिले के चांगसारी स्थित कोविड देखभाल केंद्र का है। मामले की जानकारी मिलने पर कामरूप के डिप्टी कमिश्नर कैलाश कार्तिक पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और मरीजों से हाईवे खाली कर केंद्र वापस लौटने का अनुरोध किया।

रोगियों ने आरोप लगाया कि उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और बिस्तरों की स्थिति ठीक नहीं है। एक ही कमरे में 10 से 12 मरीजों को रखा जा रहा है। मरीजों की शिकायत सुनने के बाद डिप्टी कमिश्नर ने उन्हें समय पर कार्रवाई और उचित प्रबंधन का आश्वासन दिया।

एनडीटीवी की खबर के अनुसार असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर मरीज कोविड देखभाल केंद्र में खुश नहीं हैं तो वह होम क्वारंटाइन के विकल्प का चयन कर सकते हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “हम उन्हें केंद्र पर लाए हैं ताकि वे ठीक हो सकें और अन्य लोगों को संक्रमित न करें। अगर वे यहां खुश नहीं हैं, वे वचनपत्र पर हस्ताक्षर कर होम क्वारंटाइन में जा सकते हैं।

हेमत बिस्वा ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं और उन पर काम का अधिक बोझ होने के कारण कुछ देरी हो गई होगी। उन्होंने कहा कि असम में टेस्टिंग से लेकर रहने और खाने तक का खर्च राज्य सरकार उठा रही है।

 

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