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471 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने पर रेलवे के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट पहुंची चीनी कंपनी

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Image Credits: metrorailnews

July 19, 2020

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रेलवे ने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सिग्नल एवं दूरसंचार कार्य के लिए एक चीनी कंपनी के साथ किया गया करार ‘काम की धीमी गति’ को लेकर शुक्रवार को रद्द कर दिया.

यह कार्य कानपुर और मुगलसराय के बीच कॉरिडोर के 417 किलोमीटर लंबे खंड पर किया जाना था. डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) इस परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी है.

डीएफसीसीआईएल के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने शुक्रवार को कहा, ‘‘ यह निरस्तीकरण पत्र आज जारी किया गया.’’

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, डीएफसीसीआईएल की फंडिंग करने वाले विश्व बैंक ने अभी तक चीनी कंपनी को बाहर किए जाने पर अपनी अनापत्ति नहीं दी है. हालांकि, रेलवे ने फैसला किया है कि वह विश्व बैंक का इंतजार किए बिना परियोजना के इस हिस्से को खुद से पूरा करेगी.

वहीं, शुक्रवार को 471 करोड़ रुपये का करार वापस लिए जाने से पहले ही चीनी इंजीनियरिंग कंपनी अदालत चली गई है.

इस बारे में साइन हुए कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से चीन की कंपनी ने कुछ राशि बैंक गारंटी के रूप में जमा करवाई थी, जो नॉन-परफॉरमेंस (काम न होने) की स्थिति में डीएफसीसीआईएल को मिल सकती है.

अधिकारियों ने कहा कि चीनी कंपनी को इस परियोजना से बाहर निकालने का काम जनवरी 2019 में शुरू हुआ था क्योंकि वह निर्धारित समयसीमा में काम नहीं कर पायी थी. उन्होंने कहा कि कंपनी तब तक महज 20 फीसद ही काम कर पायी थी.

डीएफसीसीआईएल ने इस साल अप्रैल में विश्व बैंक को यह ठेका रद्द करने के अपने फैसले से अवगत कराया था. विश्व बैंक ही इस परियोजना के लिए फंडिंग कर रहा है.

सचान ने कहा, ”काम की धीमी गति के चलते हमने चीनी कंपनी को दिया गया ठेका रद्द कर दिया क्योंकि इस धीमी गति से हमारे कार्य में बहुत देरी हो गयी। हमें अब तक उनसे (विश्व बैंक से) से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिला है लेकिन हमने उसे बता दिया कि हम ठेका रद्द कर रहे हैं और हम अपनी तरफ से इस काम के लिए धन देंगे.’’

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