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पंजाब, हरियाणा के किसानों ने केंद्र सरकार के तीन कृषि अध्यादेशों, महंगे ईंधन के विरोध में किया प्रदर्शन

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Image Credits: newindianexpress

July 21, 2020

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पंजाब और हरियाणा में हजारों किसानों ने सोमवार को केंद्र द्वारा पेश किए गए तीन कृषि संबंधी अध्यादेशों के विरोध और बढ़ते डीजल पेट्रोल की दाम के विरोध में एक ट्रैक्टर मार्च में भाग लिया।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, सोनीपत, भिवानी, फतेहाबाद और यमुनानगर सहित कई जगहों पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। पंजाब में, नाभा, खमनो, फरीदकोट और फिरोजपुर में विरोध प्रदर्शन हुए।

हरियाणा और पंजाब के लगभग सभी जिलों और राजस्थान के श्री गंगानगर में किसानों ने अपने ट्रैक्टरों में विरोध मार्च निकाला और अपनी मांगों की सूची जिला कार्यालय को सौंपी। प्रमुख मांग यह है कि सरकार ने हाल ही में कृषि बाजारों में सुधार के लिए शुरू किए गए तीन अध्यादेशों को वापस ले लिया जाए, आवश्यक वस्तु अधिनियम को खत्म किया जाए और अनुबंध खेती को मान्य किया जाए, और ईंधन की कीमतों में वृद्धि को वापस लिया जाए।

इस मौके पर जत्थेबंदी के जिला प्रधान गुरभेज सिंह विर्क ने कहा कि केंद्र सरकार के आर्डिनेंस किसानों को परेशान करने वाले हैं और इन आर्डिनेंस के साथ मंडियों का निजीकरण किया जा रहा है और कॉर्पोरेट घरानों की किसानों को कठपुतली बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल- डीजल के रेटों में हुए वृद्धि किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। उन्होंने मांग की कि सरकार पेट्रोल -डीजल के रेटों में कमी लाए और अपने के पास किये आर्डिनेंस वापस ले। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में इस आर्डिनेंस लागू नहीं होने दिया जाएगा।

 

 

हरियाणा भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चादुनी ने दावा किया कि राज्य भर में लगभग 15,000 ट्रैक्टर विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे। कुछ स्थानों पर, कमीशन एजेंटों (आढ़तिया) भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। पंजाब में, विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व बीकेयू (लाखोवाल) और बीकेयू (राजेवाल) गुटों द्वारा किया गया था।

आढ़तिया एसोसिएशन ने ऑर्डिनेंस फार्मर प्रोड्यूस एंड कॉमर्स एक्ट के विरोध में सोमवार को हड़ताल रखी और दुकानें बंद रखकर केंद्र सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। हड़ताल के चलते सोमवार को मंडी में बोली भी नहीं हुई। आढ़तिया एसोसिएशन के प्रधान अनिल नागौरी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाया एक्ट पंजाब तथा पंजाब के किसानों, आढ़तिया वर्ग, मजदूरों व अन्य वर्ग के हित में नहीं है। पंजाब तथा हरियाना का मंडीकरण सिस्टम एशिया और दुनिया में से सबसे बेहतरीन माना गया है।

किसानों के समर्थन में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीनों अध्यादेशों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

“वे न तो किसानों और न ही पंजाब और हरियाणा के मजदूरों के हित में हैं। भाजपा कहती हैं कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए अध्यादेश लाया गया है। लेकिन यह कम दरों पर अच्छे बीज और उर्वरक देकर किया जा सकता है।

हरियाणा कांग्रेस प्रमुख कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने किसानों को बर्बाद करने के लिए कोविद -19 महामारी के बीच एक नया अध्याय लिखा है। “अध्यादेश सरकार के पसंदीदा पूंजीपतियों को किसानों को लूटने के लिए एक मुफ्त हाथ देगा,” शैलजा ने कहा।

इस एक्ट से किसानों के मनों में डर है कि भारत सरकार उनकी फसलों जैसे गेंहू, धान, दालें, नरमा, कपास तथा सरसों पर एमएसपी देगी या नहीं। इस एक्ट से पंजाब तथा हरियाणा का मंडीकरण ढांचा तहस-नहस हो जाएगा तथा पंजाब के हजारों आढ़तिए, उनके मुनीम तथा लाखों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। आर्डिनेंस एक्ट के कारण कार्पोरेट घराने प्राइवेट मंडियों द्वारा फसलों की खरीद करेंगे तो सरकारी खरीद बंद हो सकती है और मंडी में कुछ समय बाद फसलों के भाव आधे भी नहीं रहेंगे। यदि मंडीकरण सिस्टम खत्म होता है तो इससे किसानों का शोषण होगा।

 

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