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बच्चों की ऑनलाइन क्लास के लिए पिता ने बेची गाय, मदद को सोनू सूद आगे आये

तर्कसंगत

Image Credits: Bharat News/Amar Ujala

July 24, 2020

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कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनियाभर में स्थिति बिगड़ी हुई है। भारत में इस महामारी का असर लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में कई तरह की पाबंदियां अभी तक जारी हैं। स्कूल-कॉलेजों का शुरू न होना भी इनसे एक है। इसके चलते फिलहाल सभी जगह ऑनलाइन पढ़ाई जारी है। हालांकि, हर परिवार बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है और ऐसा ही कुछ हिमाचल प्रदेश में हुआ हैं, जहां एक गरीब परिवार को बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी गाय बेचनी पड़ी।

परिवार की आमदनी का जरिया रही गाय महज 6000 रुपये में बिकी।

कुलदीप कुमार कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी तहसील के गुम्मर गांव में एक गौशाला में रहते है। उसकी बेटी अनु और बेटा वंश एक सरकारी स्कूल में क्रमश: कक्षा चौथी और दूसरी कक्षा में पढ़ते हैं। राज्य में महामारी के मद्देनजर सरकार के आदेश पर प्रदेश भर के स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की हैं। ऐसे में उनके पास स्मार्टफोन और इंटरनेट न होने से बच्चे पढ़ नहीं सकते थे।

कुलदीप ने बताया, “मैं बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए जब स्मार्टफोन नहीं खरीद पा रहा था तो मैंने अपनी एक गाय को 6,000 रुपये में बेचने का फैसला किया।” जबकि वह गाय का दूध बेचकर ही अपनी आजीविका कमाता है और उसकी पत्नी एक दिहाड़ी मजदूर है। हालांकि, गाय बेचने से पहले कुलदीप स्मार्टफोन खरीदने के लिए बैंकों और निजी ऋणदाताओं के पास लोन के लिए भी गए थे।

हालांकि समस्या अब भी बनी हुई है, क्योंकि एक फोन से दो बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। वहीं ये भी पता चला कि कुलदीप को वैसे कोई सरकारी लाभ नहीं मिल रहे हैं, जो गरीबों को मिलते हैं। कुलदीप कुमार की खराब वित्तीय स्थिति के बारे में जब स्थानीय बीजेपी विधायक रमेश धवाला को अवगत कराया गया, तो उन्होंने सरकारी मदद देने का आश्वासन जरूर दिया है।

इस खबर के आने के बाद सोनू सूद इस खबर से परेशान नजर आए और उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि चलो इस शख्स की गाय वापस दिलाते हैं। क्या कोई इस आदमी की डिटेल्स मुझे भेज सकता है? सोनू का ये ट्वीट फैंस के बीच काफी वायरल हो रहा है।

 

 

बता दें कि सोनू कोरोना महामारी के बीच हरसंभव मदद की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुंबई के जुहू स्थ‍ित होटल के दरवाजे भी मेड‍िकल वर्कर्स के लिए खोले थे। उन्होंने लॉकडाउन के समय में ट्रेन, एयरप्लेन, बस हर तरह से मजदूरों को घर पहुंचाने का काम किया है। वे मजदूरों को रोजगार दिलाने के लिए एक मोबाइल एप भी शुरू करने वाले हैं।

 

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