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रेलवे ने यात्रियों के लिए क्यूआर कोड से टिकट बुकिंग के अलावे और क्या निर्णय लिया है?

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Image Credits: ANI/Twitter

July 25, 2020

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कोरोना वायरस से बचाव और सुरक्षित यात्रा के लिए भारतीय रेलवे ने अब नई पहल शुरू की है. इसके तहत रेलवे ने अब यात्रियों को एयरपोर्ट की तरह QR कोड वाले संपर्क रहित टिकट देने की योजना बनाई है. इसमें यात्रियों को टिकट की जगह QR कोड का लिंक दिया जाएगा और उसे स्टेशन और ट्रेनों पर मोबाइल फोन से स्कैन किया जा सकेगा.

इस पहल का पायलट प्रोजेक्ट उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज जंक्शन पर शुरू किया गया है.

मोबाइल फोन में रखना होगा क्यूआर कोड

हवाई अड्डों की भांति रेलवे भी क्यूआर कोड वाले संपर्क रहित टिकट देने की योजना बना रहा है जिन्हें स्टेशन और ट्रेनों पर मोबाइल फोन से स्कैन किया जा सकेगा. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने कहा कि वर्तमान में ट्रेन के 85 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं और काउंटर से टिकट खरीदने वालों के लिए भी क्यूआर कोड की व्यवस्था की जाएगी.

ऐसे मिलेगा क्यूआर कोड

यादव ने कहा, “हमने क्यूआर कोड प्रणाली की शुरुआत की है जो टिकट पर दिए जाएंगे. ऑनलाइन खरीदने वालों को टिकट पर कोड दिया जाएगा. विंडो टिकट पर भी जब किसी को कागज वाला टिकट दिया जाएगा तब उसके मोबाइल पर एक संदेश भेजा जाएगा जिसमें क्यूआर कोड का लिंक होगा. लिंक खोलने पर कोड दिखेगा.” उन्होंने कहा, “इसके बाद स्टेशन या ट्रेन पर टीटीई (TTE) के पास फोन या उपकरण होगा जिससे यात्री के टिकट का क्यूआर कोड स्कैन कर लिया जाएगा. इस प्रकार टिकट जांचने की प्रक्रिया पूरी तरह से संपर्क रहित होगी.” यादव ने कहा कि अभी पूरी तरह कागज रहित होने की रेलवे की योजना नहीं है लेकिन आरक्षित, अनारक्षित और प्लेटफार्म टिकट की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर कागज का इस्तेमाल बहुत हद तक कम किया जा सकेगा.

कोलकाता मेट्रो में शुरू हुई ऑलनाइल रिचार्ज सुविधा

उन्होंने बताया कि कोलकाता मेट्रो की ऑनलाइन रिचार्ज सुविधा शुरू कर दी गई है. इसी तरह IRCTC की वेबसाइट का पूरी तरह नवीनीकरण किया जाएगा और प्रक्रिया को सरल, सुविधाजनक बनाया जाएगा और होटल और भोजन की बुकिंग के साथ जोड़ा जाएगा.

सैटेलाइन द्वारा की जाएगी ट्रेनों की निगरानी

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष यादव ने कहा कि ट्रेनों पर सैटेलाइट से निगरानी रखने के लिए रेलवे ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के साथ करार किया है. इससे ट्रेनों की लोकेशन और स्पीड के बारे में रियल टाइम डाटा मिलेगा. पहले चरण में 2,700 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव और 3,800 डीजल लोकोमोटिव पर GPS डिवाइस फिट किए गए हैं. दूसरे चरण में दिसंबर 2021 तक 6,000 और लोकोमोटिव को इससे जोड़ दिया जाएगा.

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