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आरबीआई रिपोर्ट: बैंकों का एनपीए पिछले दो दशक में सबसे अधिक होने की आशंका है

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Image Credits: Financial Express

July 25, 2020

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रिजर्व बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में आशंका जताई है कि मार्च 2021 तक बैंकों का सकल एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो सकता है. यह मार्च 2020 में 8.5 प्रतिशत था. लंबे समय तक लॉकडाउन के कारण बिजनस बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लाखों लोग बेरोजगार हो गए.

रिपोर्ट के अनुसार, बहुत गंभीर दबाव वाले परिदृश्य में सकल एनपीए मार्च 2021 तक 14.7 प्रतिशत तक जा सकता है.

इसमें कहा गया है, ‘दबाव परीक्षण यह संकेत देता है कि सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए अनुपात मार्च 2020 के 8.5 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2021 में 12.5 प्रतिशत तक हो सकता है. यह आकलन तुलनात्मक परिदृश्य के आधार पर किया गया है.’

रिपोर्ट के अनुसार, ‘अगर वृहत आर्थिक माहौल और खराब होता है, ऐसे में बहुत गंभीर दबाव वाले परिदृश्य में अनुपात बढ़कर 14.7 प्रतिशत हो सकता है.’

इसमें कहा गया है कि वृहत आर्थिक झटकों की पृष्ठभूमि में देश के बैंकों की मजबूती का परीक्षण किया गया. यह परीक्षण वृहत दबाव वाले परीक्षण के जरिये किया गया.

लाइव मिंट के अनुसार, सकल एनपीए के लिए जताया गया यह अनुमान पिछले दो दशक में यह सबसे अधिक है. इससे पहले साल 1999 में एनपीए उच्च स्तर पर पहुंचा था.

वहीं, आरबीआई ने जो अनुमान जताया है वह वैश्विक रेटिंग संस्था एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स द्वारा जताए गए अनुमान के करीब है. एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अनुमान जताया है कि अगले साल तक भारत का एनपीए 13.2 फीसदी तक बढ़ जाएगा.

बता दें कि इसी महीने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि अगले छह महीने में बैंकों के फंसे कर्ज यानी एनपीए में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा था कि समस्या को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए, उतना अच्छा होगा.

बैंकों की लोन बुक की स्थिति अगर और खराब होती है तो इससे कैपिटल बफर प्रभावित होगा और बैंकों के लिए जरूरत के समय कंपनियों को ऋण देना मुश्किल हो जाएगा. लोग के भुगतान में मोहलत से कंपनियों को कुछ राहत मिली है लेकिन अगस्त में इस मोहलत के खत्म होने के बाद कई बैंकों के लोन एनपीए में बदल सकते हैं. आईसीआईसीआई बैंक से लेकर यस बैंक तक कई बैंकों ने पूंजी बढ़ाने के लिए शेयर बेचकर पूंजी जुटाने की घोषणा की है. इसकी वजह यही है कि उन्हें आने वाले दिनों में अपने लोन के एनपीए में बदलने का खटका है.

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