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राज्यों के बकाये GST को भरना अब केंद सरकार के बस की बात नहीं

तर्कसंगत

Image Credits: Financial Express

July 29, 2020

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वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने मंगलवार को हुई एक बैठक में स्थायी संसदीय समिति को बताया है कि राजस्व साझेदारी की मौजूदा फॉर्मूला के तहत केंद्र सरकार राज्यों के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का हिस्सा दे पाने में सक्षम नहीं है.

द हिंदू के अनुसार, इस स्थायी संसदीय समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद जयंत सिंहा कर रहे थे.

बैठक में शामिल हुए दो सदस्यों के हवाले से लिखा कि पांडे से कोरोना महामारी के चलते खजाने में आई कमी के बारे में पूछा गया था. जवाब मिला कि अभी जो जीएसटी की कमाई बांटने का फॉर्मूला है, उसके अनुसार तो केंद्र राज्यों को पैसा नहीं दे सकता. इस पर संसदीय समिति के सदस्यों ने पांडे से पूछा कि केंद्र सरकार राज्यों से किए अपना वादों से कैसे मुकर सकती है? इस पर वित्त सचिव का जवाब था कि अगर टैक्स कलेक्शन एक निश्चित सीमा से कम होता है तो जीएसटी एक्ट में राज्यों को पैसा देने के फॉर्मूले में बदलाव की व्यवस्था है. यानी टैक्स कलेक्शन कम होने पर राज्यों को मिलने वाले पैसे की हिस्सेदारी में कमी की जा सकती है.

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक सोमवार को वित्त मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 के जीएसटी मुआवजे के लिए केंद्र सरकार ने 13806 करोड़ रुपये की अंतिम किस्त जारी की है. राज्यों को किए जाने वाले मुआवजे के भुगतान के फॉर्मूले पर दोबारा काम करने के लिए जुलाई में जीएसटी परिषद की बैठक होने वाली थी. हालांकि, अभी तक यह बैठक नहीं हो सकी है.

बता दें कि समिति की यह बैठक देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद पहली बार हुई. इस दौरान भी भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करने के बजाय समिति ने ‘नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और भारत की विकास कंपनियों को वित्त मुहैया कराना’ जैसे मुद्दे को उठाया.

न्यूज़ 18 के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सांसदों मनीष तिवारी, अंबिका सोनी और एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने इस बात की पुरजोर मांग की कि समिति को महामारी के कारण भारी नुकसान उठाने वाली अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करनी चाहिए. समिति के अध्यक्ष जयंत सिंहा को लिखे गए एक पत्र में मनीष तिवारी ने कहा था कि संकट की इस घड़ी में चुने गए विषय पर चर्चा कराने से लोगों को लगेगा कि समिति भ्रम का शिकार हो गई है. यह ज्ञात हुआ है कि समिति के अध्यक्ष जयंत सिंहा ने कहा कि सदस्यों द्वारा पूछे गए अधिकतर प्रश्न राजनीतिक थे जिनका जवाब वित्त मंत्रालय के अधिकारी नहीं दे सकते थे. इनका जवाब केवल मंत्री निर्मला सीतारमण दे सकती हैं वह भी संसद में इस मुद्दे पर बहस के दौरान.

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