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अनंत हेगड़े: बीएसएनएल कर्मी गद्दार, हमने बीएसएनएल को प्राइवेट कंपनी बनाने का मन बना लिया है

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Image Credits: thenewsminute

August 12, 2020

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भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने तब एक विवाद को जन्म दे दिया जब उन्होंने राज्य के स्वामित्व वाली भारत संचार निगम लिमिटेड के कर्मचारियों को “गद्दार” कहा. उन्होंने बीएसएनएल कर्मचारियों पर परेशानियों में घिरी दूरसंचार कंपनी को बचाने के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं करने का आरोप लगाया. और उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण होने पर 88,000 श्रमिकों को निकाल दिया जाएगा. भाजपा सांसद ने सोमवार को उत्तर कन्नड़ जिले के कुमटा में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा, “बीएसएनएल का तंत्र गद्दारों से भरा हुआ है. मैं उनके लिए सटीक शब्द का उपयोग कर रहा हूं.” उन्होंने बीएसएनएल कर्मचारियों पर आलसी और अक्षम होने का आरोप लगाया और उन्हें सरकारी दूरसंचार कंपनी के दुर्भाग्य के लिए दोषी ठहराया.

 

 

वीडियो में नेता अनंत हेगड़े कहते हैं “बीएसएनएल का सिस्टम गद्दारों से भरा हुआ है. मैं उनके लिए सही शब्द इस्तेमाल कर रहा हूं. बीएसएनएल कर्मचारी कंपनी को मशहूर बनाने के लिए काम नहीं कर रहे थे. सरकार ने इसे पैसा दिया. लोग सुविधाएं चाहते हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर भी मौजूद है, फिर भी कर्मचारी काम नहीं करना चाहते. पीएम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं. उन्होंने तकनीक और फंड दिया. लेकिन फिर भी वे काम नहीं करना चाहते. सरकार इस कंपनी को प्राइवेट बनाकर इसे ठीक करेगी. हम इसे खत्म करेंगे. केंद्र सरकार इसके लिए विनिवेश पॉलिसी लेकर आएगी और बीएसएनएल को बंद करेगी. आने वाले समय में इसकी जगह प्राइवेट कंपनियां ले लेंगी. हम 88 हजार कर्मचारियों को हटाएंगे. यह एक बड़ी सर्जरी की तरह होगी. हमने बीएसएनएल को प्राइवेट कंपनी बनाने का मन बना लिया है.”

एनडीटीवी के अनुसार कुमटा में सोमवार, 10 अगस्त को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यदि आप बेंगलुरु जाते हैं तो आपको उत्तर कन्नड़ का सिग्नल अच्छा लगेगा, क्योंकि वहां बीएसएनएल का सिग्नल ही नहीं आता है. दिल्ली में भी मेरे घर में सिग्नल नहीं आता है. बीएसएनएल भारत के लिए लज्जा की चीज है. बीजेपी नेता ने कहा कि बीएसएनएल को खत्म किया जा रहा है. इसका विनिवेश किया जाएगा, ये देशद्रोहियों से भरा हुआ है, मेरे शब्द सच हैं, मैंने हाल ही में एक मीटिंग में उन्हें कहा कि आपलोग अधिकारी नहीं, आप लोग देशद्रोही हैं.

पिछले साल सरकार ने बीएसएनएल और इसकी सहायक एमटीएनएल के बारे में कहा था कि इन्हें प्राइवेटाइज नहीं किया जाएगा और इन्हें संकट से उबारने के लिए एक पैकेज का वादा किया था. इसके लिए 69,000 करोड़ रुपये के एक रिवाइवल प्लान के साथ इसमें हस्तक्षेप किया जाना था ताकि यह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी अपने कर्मचारियों को उनकी सैलरी दे सके, जो बाकी है.

बता दें कि बीएसएनएल काफी घाटे में चल रही है. अप्रैल, 2019 से दिसंबर, 2019 के बीच इसका घाटा बढ़कर 39,089 करोड़ रुपये हो गया था. अक्टूबर, 2019 में केंद्र सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए पैकेज भी दिया था.

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