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सुप्रीम कोर्ट: पिता की पैतृक संपत्ति पर बेटी का समान अधिकार

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Image Credits: Prime News

August 12, 2020

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में साफ किया कि सितंबर, 2005 में हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम लागू होने से पहले पिता की मौत होने पर भी पैतृक संपत्ति पर बेटियों का बराबर का अधिकार होगा। इसका मतलब 2005 से पहले पैदा हुई सभी बेटियों का अपने पिता की संपत्ति पर बराबर का अधिकार होगा।

अब तक इस विषय पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी और मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो विपरीत फैसले थे।

मनी कण्ट्रोल के अनुसार 9 सितंबर, 2005 को लागू हुए हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम के जरिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में संशोधन करके बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार दिया गया था।

तब से इस अधिनियम से संबंधित कई मामले सुप्रीम कोर्ट में आ चुके हैं जिनमें कोर्ट साफ कर चुकी है कि 2005 में अधिनियम लागू होने से पहले जन्मी बेटियों का भी पैतृक संपत्ति पर बराबर अधिकार होगा।

2015 में दिए गए पुराने फैसले को किया खारिज

2015 में प्रकाश बनाम फूलवती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संशोधित अधिनियम के तहत दिए गए अधिकार 9 सितंबर, 2005 को जिंदा पिताओं की जिंदा बेटियों पर लागू हैं। इसका मतलब अगर 9 सितंबर, 2005 से पहले पिता की मौत हो गई है तो बेटी को संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा।

इस नए फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में दिए गए अपने उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन के तहत अधिकार 9 सितंबर 2005 तक संपत्ति के जीवित हिस्सेदार की जीवित बेटियों के लिए लागू हैं। फिर चाहे बेटियां कभी भी पैदा हुई हों। सुप्रीम कोर्ट के 2015 के इस फैसले के खिलाफ कई अपील की गई थीं। अब यह स्पष्ट है कि भले ही पिता की मृत्यु हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू होने से पहले हो गई हो, फिर भी बेटियों का माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार होगा।

वहीं फरवरी, 2018 में दनम्मा बनाम अमर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2005 का संशोधित अधिनियम बेटियों को पैतृक संपत्ति में वे सभी अधिकार देता है जो बेटों को प्राप्त हैं। इसका मतलब 2005 में अधिनियम लागू होने से पहले पिता की मौत हो गई है तो भी पैतृक संपत्ति पर बेटी का बराबर का अधिकार होगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों में अंतर को रेखांकित किया था।

अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिनियम में संशोधन का मकसद बेटियों को बराबरी प्रदान करना था और ये सभी शर्तें इसमें बाधा हैं। कोर्ट ने साफ किया कि अगर पिता की मौत अधिनियम लागू होने से पहले हो गई है तो भी बेटी को पैतृक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी।

इसके अलावा कोर्ट ने ये भी साफ किया कि 2005 से जन्मी बेटियों का भी संपत्ति पर बराबर का हक होगा।

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