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उत्तर प्रदेश: बाराबंकी जिले में बाढ़ में डूबा गांव, कर्ज से चल रहा परिवार

Nikhil Sahu

August 13, 2020

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9 लोगो के परिवार में एकलौता कमाने वाला हूं। हर महीने अम्मा के इलाज में हजारों खर्च हो जाते है। अब तक 20 हजार का कर्जा हो गया है, नजाने पेट पालने के लिए अभी कितना और कर्ज लेना पड़ेगा ये कहना है बाराबंकी जिले के कुरौनी गांव के किसान छन्नू चौहान का। जिले में आई बाढ़ में इनके पूरे खेत पिछले एक महीने से डूबे हुए है। उनका आरोप है कि सैकड़ों गांव पानी डूबने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी हमारा हाल जानने नहीं आया है। यहां न खाने की व्‍यवस्‍था है और न पीने की हर तरफ बस पानी ही पानी है। अपने खेत की तरफ देखते हुए छन्नू कहते हर साल बाढ़ आती है और हम हर साल तीन महीने पीछे चले जाते है। कोरोना के और लॉक डाउन के कारण पहले से ही हालात बुरे थे उस पर इस बाढ़ ने और कमर तोड़ दी हैं।

 



 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 20 किलोमीटर दूर बाराबंकी जिले की सिरौली गौसपुर तहसील के लगभग एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट मे आ चुके है। सैकड़ो घर बाढ़ के पानी से डूब गए है। ऐसे में लोगों को बंधे के किनारे त्रिपाल से अपना घर बना कर रह रहे है। बाढ़ प्रभावित इलाकों के गांवों को जोड़ने वाले मार्गों की हालत जर्जर हो गई है। बाढ़ के पानी से आने जाने का रास्‍ता पूरी तरह से बंद हो गया है। मवेशियों के चारे का भी खासा संकट हो गया है। बाढ़ में पूरे गांव की फसल भी बर्बाद हो गई है। आने जाने के लिए नाव का प्रयोग करना पड़ता है, राशन लेने के लिए भी नाव से दूर तक जाना पड़ता है। ऐसे में लोगों की तबीयत खराब होने पर कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 



तिलकपुर के बाढ़ पीड़ित चंद्रिका प्रसाद का कहना है कि पानी में डूबे गांव को एक महीने से ज्यादा हो गया है। अधिकारियो पर गुस्सा दिखाते हुए वो बताते है कि “साहब लोग गाडी पर बैठ कर एक तरफ से आते है और दूसरी तरफ से चले जाते है। गाड़ी में ही बैठे-बैठे चले जाते है”। चंद्रिका अपने 8 साल के बेटे रोहन की तरफ देखते हुए बताते है कि इस बाढ़ के कारण बच्‍चे स्‍कूल तक नहीं जा पा रहे हैं। घर और स्कूल दोनों बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है। मजबूरन बंघे के किनारे त्रिपाल डाल कर रहना पड़ रहा है।  जब कभी तेज अंधी या पानी आता है तो ये भी उड़ जाता है।

 



उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त संजय गोयल बताते हैं, हमने बाढ़ प्रभावित हर जिलो का दौरा किया है। जिलाधिकारियों को बाढ़ राहत कार्यों को प्राथमिकता पर लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कोरोना गाइडलाइन के तहत सभी ग्रामीणों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग बनाने को कहा गया है। वही तिलकपुर गांव के रहने वाले राम नरेश का कहना है कि “साहब कोरोना के बारे में सुना तो है की शारीरिक दुरी बना कर रखनी पडती हैं, अब गांव में कहा कोई दुरी बना कर बैठ सकते है यहां रहने का तो ठिकाना नहीं है। राम नरेश नाव चलाते है। बाढ़ के कारण इनका काम भी ठप हो गया है लेकिन प्रशासन ने इनकी नाव ग्रामीण लोगो के आवागमन में लगा दिया है। राम नरेश के मुताबिक गांव में हर साल बाढ़ आती है। जिसकी चपेट में 40 से ज्यादा गांव आते है। वही उनकी नाव पिछले तीन साल से प्रशासन किराए पर ले रहा है लेकिन उन्हें इसका भुगतान नहीं मिल रहा।

 



कोरोना संक्रमण को लेकर भी बाढ़ प्रभावित जिलों में जागरूकता की कमी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शारीरिक दूरी का नियम ख़त्म हो गया है। लोगों को घर छोड़कर दूसरी जगह जा रहने जा रहे है। जहां जितनी जगह मिली उसी में रहने को मजबूर है। इन हालातों में वायरस से बचाव के उपाय करना मुश्किल है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ देवेंद्र सिंह नेगी के मुताबिक जिन जिलों में बाढ़ का पानी भरा है वहां एंटी लार्वा का छिड़काव करवाया जा रहा है। लोगो मास्क और सोसल डिस्टेंसिंग बनाने को कहा जा रहा है।

 



उत्तर प्रदेश के 16 जिले इस समय बाढ़ से प्रभावित हैं। अम्बेडकरनगर, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, बस्ती, गोंडा, गोरखपुर, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, मऊ, देवरिया, संतकबीर नगर और सीतापुर के 517 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। लखीमपुर-खीरी के पलिया में शारदा नदी, तुर्तीपार बलिया में घाघरा अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वही इन जिलों के 1,04,562 परिवार और 5,75,094 की जनसंख्या बाढ़ के पानी से परेशान है। साथ ही 76,723 पशु इस बाढ़ में प्रभावित हुए हैं। वही 38,248 कृषि फसल बाढ़ प्रभावित हुई है। ये जानकरी यूपी सरकार की तरफ से दी गई है। 12 अगस्त के सीएम ऑफिस ने ट्वीट किया, ‘बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में मुख्यमंत्री के निर्देश पर 262 मेडिकल टीमें लगाई गई हैं। इसके अलावा 735 बाढ़ चौकियां और 300 बाढ़ शेल्टर तैयार किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों के भरण-पोषण हेतु अब तक कुल 51,403 खाद्यान्न किट वितरित की गई हैं।



 

इसके पहले पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर और जलशक्ति राज्यमंत्री बलदेव सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह बाढ़ प्रभावितों के साथ नम्रता का व्यवहार कर उनकी मदद करें। बाढ़ इलाके के प्रभावित परिवारों को कोविड से बचाने के लिए प्रोटोकॉल का अनुपालन करवाएं। तटबंधों को रेनकटों से नुकसान रोकने के लिए मरम्मत करवाएं। तटबंधों की 24 घंटे पेट्रोलिंग करवाई जाए। इससे समय से मरम्मत आदि के कार्य को कराया जा सके। नावों को भी बाढ़ क्षेत्र में लगाया जाए। उन पर क्षमता से ज्यादा संख्या में लोग कतई न बैठने दिए जाए। आपदा का कंट्रोल रूप संचालित किया जाए। इस इलाके के लोगों से संवाद बनाए रखने के लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाया जाए। मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि  बाराबंकी से बाढ़ प्रभावित इलाकों के बचाव के लिए कुछ प्रॉजेक्ट शासन को भेजे गए हैं। उनकी समीक्षा की जा रही है,जल्दी ही उनको मंजूरी दे दी जाएगी।

हालाँकि अब ये विभागीय बातें और निर्देश वास्तविक रूप से ज़मीनी स्तर पर कितनी क्रियान्वित होती है ये अभी कहा नहीं जा सकता। क्रियान्वित होने के बाद भी इसका असर छन्नू चौहान ,चन्द्रिका आदि जैसे भुक्तभोगियों तक कैसे पहुँचता है वो देखने वाली बात होगी।

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