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जोमैटो ने शुरू की महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स के लिए ‘पीरियड्स लीव’

तर्कसंगत

August 13, 2020

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मासिक धर्म के दौरान महिला कर्मचारियों को काम के दौरान होने वाले परेशानियों को देखते हुए ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर कंपनी जोमैटो ने अपनी महिला कर्मचारियों को साल में 10 दिन अतिरिक्त “पीरियड लीव” देने का निर्णय किया है।

जोमैटो भारत में इस तरह का निर्णय वाली कुछ बड़ी कंपनियों में से एक है, जहां आधुनिकता के दौर में भी कई जगहों पर महिलाओं के मासिक धर्म को घृणा की नजर से देखा जाता है।

स्क्रॉल के अनुसार जोमैटो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपिंदर गोयल ने कहा कि कंपनी की ओर से लागू की गई इस पॉलिसी का लाभ महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने यह निर्णय विश्वास, सच्चाई और स्वीकृति की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किया है।

जोमेटो के संस्थापक और सीईओ दीपिन्दर गोयल ने कहा है कि कंपनी के महिला और ट्रांसजेंडर स्टाफ पीरियड्स के हर मासिक चक्र में एक दिन की छुट्टी के हकदार होंगे. गोयल ने एक ईमेल जवाब, जिसे सार्वजनिक रूप से शेयर किया गया है, में कहा कि, ‘पीरियड लीव के लिए आवेदन करने में उससे जुड़ी कोई शर्म नहीं होनी चाहिए. आपको कंपनी के आंतरिक ग्रुप्स या ईमेल में ये लिखने में संकोच नहीं करना चाहिए कि आप पीरियड लीव पर हैं.’

पीरियड्स के दौरान छुट्टी लेने पर अनावश्यक उत्पीड़न और अप्रिय टिप्पणियां पाने वालों से अपील करते हुए जोमेटो सीईओ ने कहा कि, ‘खुल कर बोलिए, ‘सहयोगी संस्कृति’ बनाने के लिए महिलाओं को समर्थन देने की आवश्यकता है.

CEO गोयल ने बताया कि अधिकतर महिलाओं में साल में मासिक धर्म के 14 चक्र होते हैं। इसमें कई बाद यह सप्ताह के अंत में होते हैं। ऐसे में सप्ताहांत के दिनों का समयोजन करते हुए महिलाएं पुरुषों की तुलना में 10 अतिरिक्त छुट्टी ले सकेंगी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को वास्तव में इन छुटि्टयों का उपयोग कार्य करने में अक्षम होने पर ही करना चाहिए। इन छुटि्टयों का उपयोग आम जिंदगी के कार्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

भारत में मासिक धर्म या पीरियड्स काफी हद तक एक वर्जित विषय बना हुआ है, जिसमें महिलाओं को स्वच्छता और जागरूकता की कमी सहित कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों मे तो स्थिति और भी ज्यादा खराब है, जहां सेनेटरी नेपकिन्स  तक पहुंच और उपयोग दोनों ही आम नहीं है।

बता दें कि पीरियड लीव हमेशा से एक विवादास्पद नीति रही है। इसका प्रमुख कारण है कि कई लोग इसे सेक्सिस्ट मानते हैं।

साल 2017 में मुंबई की कंपनी कल्चर मशीन ने भारत में पहली बार महिला कर्मचारियों को पीरियड लीव देने की घोषणा की थी।

हालांकि, महिला कर्मचारियों ने इस नीति का ज्यादा फायदा नहीं उठाया था और महज आठ प्रतिशत कर्मचारियों ने इसका उपयोग किया। कुछ महिला कर्मचारियों ने मातृत्व लीव के कारण यह छुट्टी नहीं ली थी।

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