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LoC के पास बर्फ में दबा मिला लापता भारतीय सेना के जवान का शव, 220 दिन से थे लापता

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Image Credits: Zee News

August 17, 2020

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जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग की फॉरवर्ड पोस्ट से 8 जनवरी 2020 को लापता हुए 11वीं गढ़वाल राइफल के जवान हवलदार राजेन्द्र सिंह नेगी का शव शनिवार को बरामद कर लिया गया। राजेन्द्र सिंह नेगी करीब 8 महीने पहले नियंत्रण रेखा पर हुए हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे। तब से उनका पता नहीं चल पा रहा था, हालांकि सेना ने कुछ दिनों तक राजेंद्र नेगी की तलाश की। जब नेगी का कुछ पता नहीं चला तो उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया।

सेना के 11 गढ़वाल राइफल्स में हवलदार नेगी 8 जनवरी को LoC के पास गुलमर्ग इलाके में भारी बर्फ में फिसल गए थे और तभी से लापता थे। शुरुआत में नेगी के पाकिस्तान की तरफ फिसलने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में सेना ने इन संभावनाओं को खारिज कर दिया।

शव न मिलने पर 21 जून को ही उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया था और सेना ने इसके बारे में परिवार को भी सूचित कर दिया था।

शहीद नेगी का पार्थिव शरीर रविवार को देहरादून लाया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्री सिंह रावत ने ट्वीट कर शहीद जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की है। नेगी के परिवार में उनकी धर्मपत्नी और तीन बच्चे हैं, जो देहरादून में ही रहते हैं। सेना ने जब नेगी को शहीद घोषित किया था तो उनके परिजन मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि नेगी नियंत्रण रेखा पर तैनात थे, हो सकता है कि हिमस्खलन की चपेट में आकर पाकिस्तानी सीमा में चले गए हों।

नेगी की पत्नी राजेश्वरी देवी ने अपने पति को शहीद मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि जब तक वह उनके शव को अपनी आंखों से नहीं देख लेंगी, तब तक उन्हें मृत नहीं मानेंगी।

अब शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नेगी की यूनिट ने उनके परिवार को उनका शव मिलने की सूचना दी। नेगी के चाचा रघुवीर सिंह नेगी ने बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान भारी बर्फ में नेगी का शव मिला।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार रघुवीर ने कहा, “उन्होंने (नेगी की यूनिट) बताया कि नेगी के शव को श्रीनगर के सैन्य अस्पताल ले जाया गया है, जहां डॉक्टर शव को हमें देने से पहले कुछ अनिवार्य मेडिकल प्रक्रियाएं पूरी कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि पहले सैन्य प्रशासन ने उनसे कहा था कि नेगी का शव रविवार शाम तक देहरादून पहुंच जाएगा, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि इसमें दो से तीन दिन लग सकते हैं।

बता दें कि नेगी देहरादून से 147 किलोमीटर दूर चमोली जिले के रहने वाले थे और 2001 में सेना से जुड़े थे। उनके परिवार में उनके पीछे उनकी पत्नी और तीन बच्चे रह गए हैं।

नेगी तीन साल पहले ही चमोली स्थित अपने गांव से अपने परिवार के साथ देहरादून शिफ्ट हुए थे, वहीं उनके माता-पिता अभी भी चमोली में गांव में रहते हैं। वे सोमवार को देहरादून स्थित नेगी के घर पहुंचेगे।

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