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अब मलेशिया में पाया गया कोरोना वायरस का 10 गुना ज्यादा ख़तरनाक स्ट्रेन

तर्कसंगत

August 18, 2020

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मलेशिया में कोविड-19 बीमारी फैला रहे SARS-CoV-2 कोरोना वायरस का एक ऐसा स्ट्रेन (एक तरह का प्रकार) मिला है, जो सामान्य प्रकार से 10 गुना ज्यादा संक्रामक है। ये स्ट्रेन पहले यूरोप में फैल चुका है और अब इसे मलेशिया में पाया गया है।

वैज्ञानिकों ने चेताया है कि इस स्ट्रेन का कोरोना वायरस के लिए बनाई जा रही वैक्सीनों पर भी प्रभाव पड़ सकता है और वे इस म्युटेशन के खिलाफ अप्रभावी साबित हो सकती हैं।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक मलेशिया में कोरोना वायरस का जो म्युटेशन पाया गया है, उसका नाम D614G है। 45 संक्रमितों के एक क्लस्टर में कम से कम तीन संक्रमितों में ये स्ट्रेन पाया गया है।

भारत से वापस लौटे एक रेस्टोरेंट मालिक से इन सभी लोगों में संक्रमण फैला था। इस शख्स ने 14 दिन के होम क्वारंटाइन नियम का उल्लंघन किया और उसे इसके लिए पांच महीने जेल की सजा दी गई है और जुर्माना लगाया गया है।

कोरोना के नए स्ट्रेन वैक्सीन तैयार करने में असर डाल रहे

मलेशिया में डायरेक्टर-जनरल हेल्थ नूर हिशाम अब्दुल्ला के मुताबिक, कोरोना के जो भी स्ट्रेन सामने आते हैं, इसके कई मायने होते हैं। कोरोना अपना रूप बदलते हैं, इसका कुछ असर वैक्सीन की क्षमता पर भी पड़ता है।

डायरेक्टर-जनरल हेल्थ नूर हिशाम अब्दुल्ला के मुताबिक, कोरोना का यह स्ट्रेन मलेशिया में पाया गया है इसलिए लोगों को फिक्रमंद और हर जरूरी सावाधानी बरतने की जरूरत है। इस दौर में हमें लोगों की मदद की जरूरत है ताकि कोरोना की इस चेन को तोड़ सकें जो म्यूटेशन के कारण बढ़ रही है। दुनियाभर के मुकाबले, कोरोना के मामलों को रोकने और उससे निपटने में मलेशिया ने बेहतर काम किया है। 28 जुलाई से अब तक (16 अगस्त) यहां मात्र 26 नए मामले ही सामने आए हैं। नया स्ट्रेन मिलने के बाद यहां के लोगों को अलर्ट किया गया है।

कोरोना के सबसे ज्यादा स्ट्रेन अमेरिका और यूरोप में दिखे

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोना के स्ट्रेन में बदलाव सबसे ज्यादा यूरोप और अमेरिका में देखा गया, लेकिन यहां के स्ट्रेन अधिक खतरनाक साबित नहीं होंगे। सेल प्रेस जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कोरोना के ऐसे रूपों का वैक्सीन की क्षमता पर बहुत ज्यादा गहरा असर पड़ने की आशंका कम ही है।

फिलीपींस से मलेशिया वापस लौटे लोगों के एक क्लस्टर में भी ये नया स्ट्रेन पाय गया है। इससे पहले अमेरिका और यूरोप में भी ये स्ट्रेन बड़े पैमाने पर पाया गया था और ये सामान्य स्ट्रेन के मुकाबले अधिक तेजी से फैलता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ये स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक है और अधिक गंभीर बीमारी पैदा करता है।

हमेशा म्युटेशन करते रहने वायरसों का चरित्र है और इस कारण उनमें बदलाव भी आता रहता है। इन बदलावों के जरिए वायरस के जो अलग-अलग प्रकार बनते हैं, उन्हें स्ट्रेन कहा जाता है।

कोरोना वायरस भी इससे अलग नहीं है और इसमें भी लगातार म्युटेशन होते रहते हैं। वैज्ञानिक इन म्युटेशन्स पर नजर बनाए हुए हैं और अभी तक ऐसा कोई म्युटेशन देखने को नहीं मिला है जिसने वायरस को पहले से अधिक खतरनाक बनाया हो।

मलेशिया में कोरोना के आंकड़े

मलेशिया दुनियाभर में तबाही मचा रहे कोरोना वायरस को काफी हद तक काबू में पाने में कामयाब रहा है। यहां अब तक 9,200 लोगों को इस खतरनाक वायरस से संक्रमित पाया जा चुका है, वहीं 125 लोगों की मौत हो चुकी है। 8,859 लोग वायरस को मात दे ठीक हो चुके हैं।

हालांकि पिछले कुछ दिनों से मामलों में उछाल आया है और शनिवार को देश में 26 नए मामले सामने आए जो 28 जुलाई के बाद सबसे ज्यादा हैं।

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