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हर चौथे भारतीय के शरीर में मौजूद हैं कोरोना के ऐंटीबॉडीज, सर्वे में खुलासा

तर्कसंगत

Image Credits: Hindustan Times

August 19, 2020

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देश के हर चार में से एक शख्‍स के भीतर कोरोना से लड़ने वाली ऐंटीबॉडीज हो सकती हैं। एक नैशनल-लेवल प्राइवेट लैबोरेटरी के कोविड-19 टेस्‍ट्स के आधार पर यह बात निकलकर सामने आई है।

शहरों में कई सिविल कॉर्पोरेशंस और देश के कुछ प्रमुख रिसर्च संस्‍थानों (TIFR, IISER) के सर्वेक्षणों के नतीजे और उम्‍मीद जगाते हैं। सोमवार को पुणे के कुछ इलाकों में 50% से ज्‍यादा सीरो-पॉजिटिविटी होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा मुंबई के स्‍लमों में भी 57% पॉजिटिविटी देखने को मिली। दिल्‍ली का पहला सीरो सर्वे बताता है कि टेस्‍ट हुए लोगों में से 23% सीरो-पॉजिटिव थे। वहां दूसरे सीरो सर्वे के नतीजे इस हफ्ते आएंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया‘ की रिपोर्ट के अनुसार, थायरोकेयर लैब के सर्वे में दिल्ली में जितने लोगों को टेस्ट किया गया, उनमें से 29 प्रतिशत के खून में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज पाई गईं।

मुंबई में 27 प्रतिशत लोगों के खून में एंटीबॉडीज पाई गईं, वहीं पूरे महाराष्ट्र में ये आंकड़ा 20 प्रतिशत रहा। इसी तरह ठाणे के हर तीसरे शख्स के खून में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज मिलीं, वहीं नवी मुंबई में यह आंकड़ा 21 प्रतिशत रहा।

इससे पहले नगर निगमों और प्रतिष्ठित सरकारी संस्थाओं द्वारा शहरों के स्तर पर किए गए सर्वेज में भी एक बड़ी आबादी में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज पाई गई हैं।

जहां पुणे के कुछ इलाकों में 51.50 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडीज पाई गईं, वहीं मुंबई की झुग्गी बस्तियों में यह आंकड़ा प्रतिशत रहा।

पिछले महीने किए गए दिल्ली के सर्वे में 23 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडीज पाई गईं, वहीं दूसरे सर्वे के नतीजे इस हफ्ते आने हैं।

इन आंकड़ों पर थायरोकेयर लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ अरोकिया स्वामी वेलुमणि ने कहा, “हमारे आंकड़े दर्शाते हैं कि 24 प्रतिशत पॉजिटिविटी के साथ भारत 35 प्रतिशत के पास पहुंच रहा है जहां मामलों का कर्व फ्लैट होने लगता है। 45 प्रतिशत सीरो-पॉजिटिविटी पर कर्व नीचे की तरफ जाने लगता है। 45-50 प्रतिशत की पॉजिटिविटी पर वायरस कम प्रभावी होता है।”

हालांकि भारत हर्ड इम्युनिटी से अभी बहुत दूर है और इसके लिए 60-70 प्रतिशत आबादी में एंटीबॉडीज होनी चाहिए।

शरीर में ऐंटीबॉडीज मिलने का मतलब है कि उस शख्‍स को कोरोना से इम्‍युनिटी हासिल हो चुकी है। मगर यह इम्‍युनिटी कितने वक्‍त के लिए है, इसपर अभी एक्‍सपर्ट्स की एक राय नहीं है। जब एक सीमा से ज्‍यदा लोगों में ऐंटीबॉडीज मिलती हैं तो इससे नोवेल कोरोना वायरस के प्रति हर्ड इम्‍युनिटी डेवलप हो सकती है। महाराष्‍ट्र कोविड टास्‍क फोर्स के सदस्‍य डॉ शशांक जोशी ने कहा, “भारत इकलौता ऐसा देश है जहां के कुछ इलाकें इतनी ज्‍यादा सीरो-पॉजिटिविटी दिखा रहे हैं। साफ है कि भारतीयों की इम्‍युनिटी ज्‍यादा मजबूत है।”

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