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मध्य प्रदेश सरकार ने कन्यादान योजना के अंतर्गत दी जाने वाली राशि को कम करने का फैसला किया है

तर्कसंगत

August 20, 2020

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मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार मुख्यमंत्री कन्यादान और निकाह योजना में बड़ा बदलाव करने जा रही है. सरकार ने योजना के तहत 51 हजार रुपये की राशि को 28 हजार रुपये करने का फैसला किया है.

राज्य के सामाजिक न्याय और निशक्तजन कल्याण विभाग के मंत्री प्रेम सिंह पटेल ने कहा कि ’51 हजार की राशि देना सरकार के लिए संभव नहीं है इसलिए सरकार इस फैसले पर फिर से विचार कर रही है. आने वाले दिनों में इसे वापस 28 हजार रुपये किया जाएगा.’

सामाजिक कल्याण मंत्री प्रेम सिंह पटेल ने अपने एक बयान में कहा कि “इस योजना में पिछली शिवराज सरकार में तय राशि ही दी जाएगी.” मंत्री ने कहा कि पिछली कमलनाथ सरकार ने बिना सोचे-समझे इसे बढ़ाने का फैसला ले लिया था. जिन हितग्राहियों को योजना के तहत 51 हजार का भुगतान नहीं हो सका, उनको मौजूदा सरकार उतनी राशि नहीं देगी.

दरअसल, राज्य में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार आई थी तब उसने अपने वचनपत्र में कन्यादान और निकाह योजना के तहत शादी करने वाले जोड़ों को मिलने वाली 28 हजार की सहायता राशि को बढ़ाकर 51 हजार रुपये करने का वादा किया था. कमलनाथ  ने मुख्यमंत्री की शपथ लेते ही सबसे पहले किसान कर्जमाफी और उसके बाद कन्यादान योजना की सहायता राशि को 51 हजार करने के फैसले पर दस्तखत करके खूब वाहवाही बटोरी थी.

हालांकि काफी कोशिशों के बाद भी कभी बजट तो कभी राजनैतिक समस्याओं के चलते कांग्रेस शासन काल में जिन जोड़ों की शादी हुई, उन्हें इस योजना का फायदा नहीं मिल सका. सूत्रों के मुताबिक पार्टी के आर्थिक हालात खराब होने के चलते करीब 20 हजार जोड़ों को इस योजना का फायदा नहीं मिला. इसे लेकर मंत्री प्रेम सिंह का कहना है कि कांग्रेस से इस बात का जवाब मांगना चाहिए कि वादा पूरा क्यों नहीं किया गया.

 

किनको मिलती थी कन्यादान राशि

इसके लिए जरूरी है कि कन्या या कन्या के अभिभावक मध्यप्रदेश के मूल निवासी हों. शादी कर रहे जोड़े में कन्या 18 वर्ष और उसका होने वाले वाला पति 21 साल से कम उम्र का न हो. इसके अलावा कन्या का नाम समग्र विवाह पोर्टल पर रजिस्टर हो.
ऐसी परित्यक्ता महिला जो निराश्रित हो और स्वयं के पुनर्विवाह के लिए आर्थिक रूप कमजोर हो. जिनका कानूनी रूप से तलाक हो गया हो वे भी इस योजना के लाभ ले सकती हैं. ऐसी विधवा महिला जो निराश्रित हो और स्वयं के पुनर्विवाह के लिए आर्थिक तौर पर सक्षम न हो. आदिवासी अंचलों में प्रचलित जनजातीय विवाह पद्धति से एकल विवाह करने पर भी योजना का लाभ मिलता है.

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