सचेत

स्टडी रिपोर्ट : सार्वजनिक शौचालय के इस्तेमाल से कोरोना संक्रमित होने का खतरा ज़्यादा

तर्कसंगत

Image Credits: Media Issue

August 21, 2020

SHARES

होम क्वारंटीन के तहत लगभग 40,000 लोगों पर असम में एक स्टडी की गई, जिसमें पाया गया कि सिम्पटोमेटिक और एसिम्पटोमेटिक दोनों लोगों द्वारा कॉमन टॉयलेट का इस्तेमाल करने से कोरोनोवायरस फैलने की ज्यादा संभावना है.

123 कोरोनावायरस पॉजिटिव केस 

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, असम पुलिस ने डिब्रूगढ़ स्थित प्रतिश्रुर्ती कैंसर और पैलिएटिव ट्रस्ट की मदद से घर में रहने वाले लोगों की निगरानी की और 123 लोगों को पॉजिटिव पाया. निगरानी और उसके बाद के विश्लेषण के प्रमुख उद्देश्यों में से यह पता लगाना था कि क्या सामान्य शौचालय और नजदीकी संपर्क कोरोनोवायरस ट्रांसमिशन से जुड़े हैं.

एनडीटीवी के मुताबिक इस स्टडी का नेतृत्व असम मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी मेंबर डॉ. गायत्री गोगोई और धेमाजी के पुलिस अधीक्षक डॉ. धनंजय घणावत ने किया. मई से जुलाई तक लोगों पर नजर रखी गई. यह स्टडी आरटी-पीसीआर टेस्ट के जरिए पॉजिटिव पाए गए लोगों पर थी और ये सभी इस स्टडी में भाग लेने के लिए सहमत हुए थे. इनमें 82 प्रतिशत लोग एसिम्पटोमेटिक थे.

 

कॉमन टॉयलेट को लेकर जागरूक नहीं लोग

स्टडी में पाया गया कि होम क्वारंटीन में शौचालय के उचित उपयोग के प्रति जागरूकता न होने के कारण, एक व्यक्ति के पूरे घर के 4 प्रतिशत लोग संक्रमित हो गए. करीब 80 प्रतिशत लोगों के घर में इंडिपेंडेंट्स टॉयलेट हैं, जिसके कारण संक्रमण का खतरा नहीं था.

क्लीनिकल ​स्टडी के अनुसार, महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि अर्धसैनिक बलों के विशेष क्वारंटीन सेंटर्स में फैलने वाला वायरस होम क्वारंटीन के तहत 4 प्रतिशत की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक था. स्टडी में कहा गया है कि इन विशेष क्वारंटीन सुविधाओं में कॉमन टॉयलेट हैं और संक्रमित लोगों द्वारा इनका इस्तेमाल किया जाता है.

रिपोर्ट के अनुसार, स्टडी में कहा गया है कि परिवार में सिम्पटोमेटिक और एसिम्पटोमेटिक मामलों में परिवार के सदस्यों द्वारा कॉमन टॉयलेट का इस्तेमाल किया जाना मुख्य कारण के रूप में सामने आया है. सुविधा के भीतर रहना बड़ा जोखिम माना गया है, क्योंकि यहां करीबी संपर्क में ट्रांसमिशन का डर बना रहता है.

हैदराबाद के एक शोध समूह के एक अध्ययन में सीवेज के पानी में कोरोनावायरस कण भी पाए गए थे. इस खोज के साथ, समूह का मानना है कि अकेले हैदराबाद में कुछ छह लाख मामले हो सकते हैं, जो पूरे तेलंगाना में कुल छह गुना है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...