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पुलवामा हमला: चार्जशीट में साजिश का खुलासा, जानिए क्या क्या हाथ लगा सबूत के रूप में?

तर्कसंगत

Image Credits: Jagran/Navbharat Times

August 26, 2020

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पुलवामा आतंकवादी हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के मामले में मंगलवार को यहां एक विशेष अदालत में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर समेत 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।

गौरतलब है कि पिछले साल दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए उस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। अधिकारियों ने कहा कि एनआईए ने इलेक्ट्रोनिक सबूतों और विभिन्न मामलों में गिरफ्तार आतंकवादियों तथा उनसे सहानुभूति रखने वालों के बयानों की मदद से इस पेचीदा मामले की गुत्थी सुलझाई है।

 

13500 पन्नों का आरोपपत्र

जांच एजेंसी द्वारा दायर 13,500 पन्नों के इस आरोप पत्र में आत्मघाती बम हमलावर आदिल डार को शरण देने और उसका अंतिम वीडियो बनाने के लिए पुलवामा से गिरफ्तार किए गए लोगों को नामजद किया गया है। डार ने पिछले साल 14 फरवरी को दक्षिण कश्मीर के लेथपुरा के निकट लगभग 200 किलो विस्फोटक से भरे वाहन से सीआरपीएफ के काफिले को टक्कर मार दी थी।

इस मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे एनआईए के संयुक्त निदेशक अनिल शुक्ला नेताकतवर बैटरियों, फोन और रसायन खरीदने के लिए आतंकी मॉड्यूल के साजिशकर्ताओं द्वारा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल किए जाने की भी बात कही है।

 

2018 से शुरू हुई थी तैयारी

एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, अप्रैल, 2018 में अजहर के भतीजे उमर फारुक की कश्मीर में घुसपैठ के साथ इस हमले की योजना पर काम शुरू हुआ। फारुक अजहर के बड़े भाई और कंधार विमान अपहरण कांड के मुख्य आरोपी इब्राहिम अथर का बेटा है।

एनआईए के अनुसार, कुछ दिन बाद एक और पाकिस्तानी आतंकवादी इस्माइल सैफुल्लाह घुसपैठ कर भारत आ गया। यहां आशिक अहमद नेंगरू और मोहम्मद इकबाल राठौर ने इन दोनों का स्वागत किया।

चार्जशीट के अनुसार, आतंकियों ने अक्टूबर, 2018 से नवंबर 2018 के बीच विस्फोटक सामग्री इकट्ठा की। इस अभियान में शाकिर बशीर नामक एक स्थानीय आतंकी ने फारूक की मदद की और विस्फोटकों को अपने घर पर जमा किया। हमले में इस्तेमाल की गई 35 किलोग्राम RDX पाकिस्तान से लाई गई, वहीं अन्य सामग्रियों को भारत से खरीदा गया।

5 फरवरी, 2019 को फारूक, बशीर, समीर डार और फिदायीन हमलावर आदिल अहमद डार ने बशीर के घर पर IED बनाए।

 

अब तक सात लोग गिरफ्तार

इंडियन एक्सप्रेस  की खबर के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि एनआईए इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप पत्र में अजहर के अलावा विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए सात आतंकवादियों, चार भगोड़ों का नाम शामिल है। इनमें से दो भगोड़े अब भी जम्मू-कश्मीर में छिपे हुए हैं, जिनमें एक स्थानीय निवासी और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल है।

आरोप पत्र में मसूद अजहर के दो संबंधियों अब्दुल रऊफ और अम्मार अल्वी के नाम मुख्य षड्यंत्रकारी के रूप में दर्ज हैं। मृतकों में जैश के आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक का करीबी संबंधी भी शामिल है, जो 2018 के अंत में सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्राकृतिक गुफाओं के जरिये भारत में दाखिल हुआ था।

 

 अज़हर की क्लिप

टाइम्स ऑफ इंडिया‘ की रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में अजहर की एक क्लिप भी है जिसमें वह कश्मीरी युवाओं को त्राल में मारे गए अपने भतीजे उस्मान हैदर की शहादत का बदला लेने के लिए उकसा रहा है।

NIA के अनुसार, जहां जैश ने हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों को निर्देश दिए, वहीं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भी इसकी साजिश में शामिल थी और आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने में मदद की।

दूसरे हमले की साजिश

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में ये खुलासा भी किया है कि पुलवामा हमले की सफलता के बाद आतंकी ऐसी ही एक औ हमला करना चाहते थे और फियादीन हमलावर तैयार करने समेत इसके लिए तमाम तैयारियां भी कर ली थीं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण अजहर ने फारूक को दूसरे हमला करने से मना कर दिया।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ को एक एनआईए अधिकारी ने बताया कि आतंकियों के पास घुसपैठ से लेकर हमला करने तक, हर कदम की तस्वीरें थीं।

सबूत में फोटो, वीडियो, व्हाट्स ऐप्प, फ़ोन नंबर

एनआईए की जांच में हमले की गुत्थी सुलझाने में फारूक के फोन की अहम भूमिका रही। दिसंबर, 2019 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फारूक का फोन एनआईए के हवाले किया था और इसकी जांच करने पर एनआईए को हमले से संबंधित कई व्हाट्सऐप चैट, फोटो और वीडियो मिले।

एनआईए के सूत्रों ने कहा कि आरोप पत्र में जेएमआई की भागीदारी के वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। “उमर फारूक और उसके चार साथियों के हमले के बाद एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद, हमने उनके फोन स्कैन किए। उनके पास योजना के हर चरण की तस्वीरें थीं, घुसपैठ (भारत में) से लेकर निष्पादन तक। हमारे पास ऐसी तस्वीरें भी हैं जो एक सुरंग की तरह दिखती हैं (जो कि) भारत में घुसपैठ करने के लिए इस्तेमाल की गई थीं। नियोजक के रूप में हमलावर आदिल अहमद डार के अंतिम वीडियो की शूटिंग से पहले हमलावरों द्वारा योजना में शामिल सभी लोगों की तस्वीरें, कार का इस्तेमाल किया, विस्फोटक, आईईडी और यहां तक कि कई रिहर्सल के वीडियो भी हैं। इन सभी को पाकिस्तान भेजा गया था,” एक एनआईए अधिकारी ने कहा।

सूत्रों ने बताया कि हमले के समय पाकिस्तान में इन नंबरों पर सैकड़ों व्हाट्सएप कॉल किए गए थे। “हम पाकिस्तान में इन नंबरों के स्थान को इंगित करने में सक्षम हैं। किसी कारण से, पाकिस्तान में बैठे बॉस व्हाट्सएप वॉयस पैकेट के माध्यम से हमले के लिए निर्देश भेज रहे थे। इनमें से कई आवाजें रूफ असगर की हैं। एनआईए के एक अन्य अधिकारी ने कहा, हम खुले स्रोत में उपलब्ध उसके वॉयस सैंपल से फॉरेंसिक रूप से इनका मिलान कर सकते हैं।

एनआईए ने कुछ स्थानीय निवासियों का नाम बताया है – शाकिर बशीर, इंशा जान, पीर तारिक अहमद शाह और बिलाल अहमद कुचे – ने अपने घरों में आश्रय और रसद प्रदान करने के लिए।

जंग चाहता था जैश

जैश को उम्मीद थी कि पुलवामा हमले की वजह से भारत और पाकिस्तान में जंग छिड़ जाएगी और इसका फायदा उठा वह कश्मीर में और आतंकी भेजने में कामयाब रहेगा। दोनों देश युद्ध के मुहाने तक आए भी, लेकिन युद्ध से पहले तनाव कम हो गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एनआईए ने हमले की पूरी साजिश की परतें भले ही खोल दी हों, लेकिन हमले के लिए पैसा भारत कैसे पहुंचा इसकी जांच अभी भी चल रही है।

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