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सुप्रीम कोर्ट: लॉक डाउन में मोरेटोरियम पीरियड के EMI पर ब्याज के मामले में केंद्र RBI के पीछे छुप रही है

तर्कसंगत

August 26, 2020

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लॉक डाउन के दौरान लोन मोरेटोरियम अवधिमें EMI पर ब्याज में छूट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है. बुधवार को मामले में हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र से मामले में 1 सितंबर तक अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पीछे नहीं छुप सकती और उसके पास EMI पर वसूली जा रही ब्याज को माफ करने की पूरी शक्ति है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन लगाया और अब उसे ही राहत देनी होगी।

दरअसल, शीर्ष अदालत बुधवार को कोविड-19 महामारी को देखते हुए लोन की ईएमआई को स्थगित किए जाने के फैसले के बीच इसपर ब्याज को माफ करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कथित निष्क्रियता को संज्ञान में लेते हुए सुनवाई कर रही थी.

 

लोन मोरेटोरियम का मामला क्या है?

कोरोना वायरस महामारी के बीच आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहे लोगों को राहत देते हुए RBI ने 31 अगस्त तक लोन की EMI वसूले जाने पर रोक (लोन मोरेटोरियम) लगा रखी है। उसके निर्देश पर बैंकों ने अपने ग्राहकों को EMI न भरने की सहूलियत तो दी है, लेकिन उन पर EMI भरने में इस देरी के लिए ब्याज लगाई जा रही है। इसका मतलब अगर ग्राहक EMI नहीं भरते तो उन्हें इतने समय की अतिरिक्त ब्याज देनी होगी।

केंद्र की सुनवाई टालने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर RBI की इसी नीति को चुनौती दी गई है और EMI पर वसूली जा रही ब्याज को माफ करने का निर्देश देने को कहा गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ब्याज से संविधान के तहत दिए गए जीवन के अधिकार में बाधा पहुंचती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से बार-बार सुनवाई को टालने की मांग की जा रही है और उसकी तरफ से कोई हलफनामा दायर नहीं किया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मोरेटोरियम अवधि 31 अगस्त को खत्म हो रही है और जब तक इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं आ जाता, इसे बढ़ा देना चाहिए. मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी.

केंद्र आरबीआई के पीछे छुप रही है

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि केंद्र ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत उसके पास पर्याप्त शक्तियां थीं और वो ‘आरबीआई के पीछे छुप रही है.’ जस्टिस भूषण की बेंच ने कहा, ‘ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आपने पूरे देश को लॉकडाउन में डाल दिया था. आपको हमें दो चीजों पर अपना स्टैंड क्लियर करें- आपदा प्रबंधन कानून पर और क्या ईएमआई पर ब्याज लगेगा?’

लाइव मिंट के रिपोर्ट के अनुसार बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे आपदा प्रबंधन अधिनियम पर रुख स्पष्ट करें और यह बताएं कि क्या मौजूदा ब्याज पर अतिरिक्त ब्याज लिया जा सकता है. बेंच में जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम आर शाह भी शामिल हैं. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांग, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया है, SG मेहता ने कहा, ‘हम आरबीआई के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.’ मेहता ने तर्क दिया है कि सभी समस्याओं का एक सामान्य समाधान नहीं हो सकता.

केंद्र अपने रुख स्पष्ट करे

कोर्ट ने कहा कि ब्याज़ वसूलने या न वसूलने का फैसला केवल RBI पर नहीं छोड़ा जा सकता और केंद्र सरकार को मामले में अपना रुख स्पष्ट करना होगा। कोर्ट ने दो चीजों- आपदा प्रबंधन अधिनिमय और ब्याज पर ब्याज माफ करने- पर केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। सरकार को जबाव दाखिल करने के लिए 1 सितंबर तक का समय दिया गया है और इसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी।

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