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हीर खान की हेट स्पीच के बाद उपासना आर्या कौन हैं? जिनकी गिरफ्तारी की मांग हो रही है

तर्कसंगत

August 27, 2020

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो अपलोड करने और हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में एक महिला YouTuber को मंगलवार को प्रयागराज के खुल्दाबाद क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

सर्कल ऑफिसर अमित कुमार श्रीवास्तव ने मीडिया को जानकारी दी कि पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए 28 वर्षीय महिला की हीर खान के रूप में पहचान की गयी है उसे गिरफ्तार किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने श्रीवास्तव के हवाले से बताया, “वह प्रयागराज के खुल्दाबाद की रहने वाली है और बेरोजगार है। उसे मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था।”

सब-इंस्पेक्टर प्रभात कुमार सिंह की एक शिकायत फाइलफ ने पढ़ा कि हीर खान ने न केवल आपत्तिजनक टिप्पणी की, बल्कि उसने 3 मिनट 58 सेकंड के वीडियो में देवी-देवताओं के लिए अपमानजनक शब्दों और बेहद अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया।

 

 

वीडियो ने लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणियां हैं। उसके वीडियो के वायरल होने के तुरंत बाद, ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने #ArrestHeerKhan को ट्रेंड किया।

 

 

पुलिस ने भी त्वरित करवाई करते हुए उसे उसीके रिश्तेदार के घर से ढूंढ निकाला. सोशल मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, हीर खान ने 23 अगस्त को विवादित वीडियो अपलोड किया है।

 

 

उपासना आर्य का वीडियो वायरल

इस हेट स्पीच के जवाब में एक दूसरी महिला क वीडियो भी वायरल हो रहा है. अब हीर खान के बहाने ही उपासना आर्य नाम की महिला ने मुस्लिमों, पैगंबर मोहम्मद और हीर खान को गालियां बकी हैं। उपासना आर्य का गालियों वाला वीडियो वायरल होने के बाद ट्विटर पर उनकी गिरफ्तारी की मांग उठी है और हैशटैग #ArrestUpasanaArya ट्रेंड होने लगा।

 

 

इस वीडियो में उपासना आर्य देवी सीता को गाली देने वाली हीर खान के बहाने पैगंबर मोहम्मद और मुसलमानों के बारे में गालियां बक रही हैं।

सोशल मीडिया साइट्स पर उपासना आर्य के ऐसे और भी कई वीडियो मौजूद हैं। इन वीडियोज में भी उपासना आर्य उत्तेजक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं। साथ ही साथ अपने बयानों के साथ वह लोगों को भड़काने की भी कोशिश कर रही हैं। ट्विटर पर चल रहे हैशटैग के साथ लोग उपासना की पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट्स का भी हवाला दे रहे हैं।

 

 

 

ऐसे अपराधों के लिए आईपीसी की धारा 153ए उन आरोपियों के खिलाफ लगाई जाती है, जो धर्म, नस्ल, भाषा, निवास स्थान या फिर जन्म स्थान के आधार पर अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत फैलाने और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। इस धारा के तहत तीन साल की जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

 

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